एपेक्स किडनी केयर कंपनी की घोर लापरवाही,सिविल सर्जन के पत्रों को कड़ेदान में डाल रहा प्रबंधन,क्या जिम्मेदारों पर केवल 'कागजी पेनल्टी' का चलेगा हंटर?
Junaid Khan - शहडोल। भीषण गर्मी और नौतपा के इस दौर में जहां सामान्य इंसान का जीना मुहाल है, वहीं शहडोल जिला अस्पताल परिसर में मानवता को शर्मसार करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। अस्पताल के ब्लड बैंक के ठीक नीचे संचालित हो रही डायलिसिस यूनिट में पिछले एक सप्ताह से सभी एयर कंडीशनर (AC) पूरी तरह से बंद पड़े हैं। किडनी की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बेहद संवेदनशील मरीजों को इस चिलचिलाती गर्मी में डायलिसिस जैसी जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है, जिससे उनकी जान पर सीधा बन आया है। गौरतलब है कि डायलिसिस एक अत्यंत कृत्रिम और नाजुक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसके जरिए शरीर से अपशिष्ट पदार्थों और अतिरिक्त पानी को बाहर निकाला जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान मरीजों के शरीर का तापमान नियंत्रित रखना अनिवार्य होता है, लेकिन जिम्मेदार एजेंसी की लापरवाही के कारण यहां भर्ती होने वाले मरीजों को असहनीय गर्मी और भारी बेचैनी का सामना करना पड़ रहा है।
एक साथ सारे AC खराब होना बड़ी साजिश या भारी भ्रष्टाचार?
चौंकाने वाली बात यह है कि इस यूनिट में कुल तीन AC लगे हैं और तीनों के तीनों एक साथ पिछले सात दिनों से ठप पड़े हैं। तकनीकी जानकारों और प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि एक साथ सारे AC का खराब हो जाना उस वेंडर या कंपनी की नीयत और सामान की गुणवत्ता पर गंभीर संदेह पैदा करता है, जिससे ये उपकरण खरीदे गए थे। सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि 'एपेक्स किडनी केयर' नाम की जिस निजी एजेंसी को जिला अस्पताल ने अपने परिसर में जगह, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाएं मुफ्त या रियायती दरों पर उपलब्ध करा रखी हैं, वह कंपनी मरीजों से तो डायलिसिस का पूरा शुल्क वसूल रही है, लेकिन उन्हें न्यूनतम मानवीय सुविधाएं देने में भी कतरा रही है। सरकारी संसाधनों का दोहन कर चांदी काट रही इस कंपनी पर स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों का कोई नियंत्रण या 'कमांड' नहीं रह गया है, जिसके चलते यह एजेंसी पूरी तरह से बेलगाम होकर अपनी मनमर्जी से काम कर रही है।
रोजाना आ रहे 20 से अधिक मरीज,प्रशासन के 'कागजी दावों' की खुली पोल
08 बेड की क्षमता वाली इस संवेदनशील यूनिट में रोजाना 20 से 24 गंभीर मरीज अपनी जिंदगी की उम्मीद लेकर आते हैं। इन मरीजों से फीस की मोटी रकम तो समय पर वसूल ली जाती है, पर इस भीषण उमस में उन्हें तड़पने के लिए छोड़ दिया गया है। ऐसा नहीं है कि यह समस्या पहली बार आई है; इससे पहले भी इस यूनिट में AC बंद होने और अव्यवस्थाओं की शिकायतें आ चुकी हैं, लेकिन हर बार मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इस पूरे मामले में जिला अस्पताल की सिविल सर्जन डॉ. शिल्पी सराफ ने माना है कि उन्होंने कंपनी को सुधार के लिए लगातार पत्राचार किया है, लेकिन निजी कंपनी के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। सिविल सर्जन का कहना है कि "हमने कंपनी को पत्र लिखे हैं, पर अब तक AC का सुधार नहीं हो पाया है। हम आज फिर बात करते हैं। यह यूनिट एपेक्स किडनी केयर कंपनी चला रही है। इस महीने हम इस पर पैनाल्टी भी लगाएंगे।हालांकि,पत्रकारिता के इस दौर में अब जनता यह सवाल पूछ रही है कि जब मरीजों की जान पर बनी हुई है, तब प्रशासन केवल पत्रों के आदान-प्रदान और मामूली 'पैनाल्टी' की कागजी खानापूर्ति कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला क्यों झाड़ रहा है? इस अवैध और अमानवीय कार्यप्रणाली पर तुरंत तालाबंदी या सख्त कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?
