नगर पालिका की गरिमा तार-तार: रात के सन्नाटे में 'सिस्टम' ने ही की सरकारी दस्तावेजों की डकैती
Junaid Khan - शहडोल। धनपुरी लोकतंत्र के चौथे स्तंभ और प्रशासनिक पारदर्शिता को चुनौती देते हुए धनपुरी नगर पालिका में एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे संभाग के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। जहाँ एक ओर आम जनता सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटकर फाइलों के आगे बढ़ने का इंतज़ार करती है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार पदों पर बैठे नुमाइंदों ने ही रात के अंधेरे में चोरों की मानिंद दफ्तर में घुसकर सरकारी दस्तावेजों पर हाथ साफ कर दिया। यह महज एक चोरी नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के सुबूतों को मिटाने की एक बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रही है। लग्जरी गाड़ी से आए और फाइलों का 'शिकार' कर ले गए। सूत्रों और सीसीटीवी फुटेज से जो कड़वी सच्चाई उभरकर सामने आई है, वह किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। आरोप है कि सहायक राजस्व निरीक्षक (एआरआई) राम विशाल नापित अपने अन्य सहयोगियों राजेश और एक अज्ञात साथी के साथ एक लग्जरी थार गाड़ी में सवार होकर आधी रात को नगर पालिका कार्यालय पहुंचे। नियमानुसार जिस कार्यालय में दिन के उजाले में प्रवेश के लिए अनुमति लगती है, वहां ये रसूखदार अधिकारी ताला खोलकर चोरों की तरह दाखिल हुए और स्थापना कक्ष में रखी महत्वपूर्ण फाइलों को लेकर रफूचक्कर हो गए। सीसीटीवी ने खोली पोल, 'अदृश्य' हाथों का खेल उजागर। साजिशकर्ताओं को शायद यह गुमान था कि रात का अंधेरा उनके काले कारनामों को ढक लेगा, लेकिन कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों ने इस पूरी "डकैती" को कैद कर लिया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह बेखौफ होकर सरकारी संपत्ति और गोपनीय दस्तावेजों के साथ खिलवाड़ किया गया। अब यह वीडियो इंटरनेट मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है, जिससे विभाग की साख पर बट्टा लगा है।आखिर कौन सा 'राज' छिपाने की थी मजबूरी? इस घटना ने कई तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर उन फाइलों में ऐसा कौन सा काला चिट्ठा दफन था, जिसे बचाने के लिए एक जिम्मेदार अधिकारी को अपराधी बनने पर मजबूर होना पड़ा? क्या यह किसी बड़े भ्रष्टाचार की फाइलें थीं? या फिर आने वाले समय में होने वाली किसी बड़ी जांच का डर? वार्ड नंबर 04 के पार्षद और भाजपा नेता प्रवीण बडोलिया ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) से लिखित शिकायत की है। उन्होंने सीधे तौर पर पूछा है कि ऐसी क्या मजबूरी थी जो चोरों की तरह दफ्तर में घुसना पड़ा? प्रशासनिक खेमे में खलबली, सीएमओ ने साधी सख्ती। मामला गरमाते ही नगर पालिका प्रशासन हरकत में आया है। धनपुरी सीएमओ पूजा बुनकर ने घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे कार्यालय की मर्यादा और सुरक्षा के साथ बड़ा समझौता माना है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस तरह की अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आनन-फानन में संबंधित अधिकारी और उनके सहयोगियों को 'कारण बताओ' नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। अवैध खनन और भ्रष्टाचार की बू! क्षेत्रीय जानकारों की मानें तो यह मामला केवल फाइलों की आवाजाही का नहीं है। स्थापना कक्ष से दस्तावेजों का गायब होना इस बात का संकेत है कि विभाग के भीतर कोई बड़ा खेल चल रहा है। चर्चा है कि पिछले कुछ समय से चल रहे अवैध कार्यों और प्रशासनिक अनियमितताओं के सुबूतों को खुर्द-बुर्द करने के लिए यह "ऑपरेशन मिडनाइट" अंजाम दिया गया। यदि इसकी निष्पक्ष जांच हुई, तो कई बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
जनता का सवाल: रक्षक ही भक्षक क्यों? नगर पालिका जैसे जनहितकारी संस्थान में इस तरह की सेंधमारी ने आम जनता के विश्वास को झकझोर दिया है। लोगों का कहना है कि अगर रक्षक ही भक्षक बन जाएंगे, तो सरकारी दस्तावेजों की गोपनीयता कैसे सुरक्षित रहेगी? क्या थार गाड़ी में सवार होकर आने वाले इन 'प्रभावशाली' लोगों पर पुलिसिया कार्रवाई होगी, या मामला रसूख के नीचे दबा दिया जाएगा? जांच की आंच में झुलसेंगे कई नाम फिलहाल, प्रशासन इस बात की तहकीकात कर रहा है कि आखिर कौन-कौन से दस्तावेज बाहर ले जाए गए हैं और इसके पीछे का असली मास्टरमाइंड कौन है। सीएमओ ने आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट आते ही दोषियों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। लेकिन सवाल वही बरकरार है क्या नोटिस की खानापूर्ति से यह दाग धुल पाएगा या प्रशासन इस बार वाकई में कोई बड़ी नजीर पेश करेगा? विपक्ष और जागरूक नागरिकों ने खोला मोर्चा। इस घटना के बाद से ही शहर के प्रबुद्ध वर्ग और विपक्षी नेताओं ने प्रशासन को आड़े हाथों लिया है। चेतावनी दी गई है कि यदि इस मामले में लीपापोती की गई, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। यह खबर प्रकाशित होने के बाद अब गेंद प्रशासन के पाले में है कि वह अपने दागदार दामन को साफ करता है या दोषियों को संरक्षण देना जारी रखता है।
