जीएसटी की दबिश से हड़कंप प्रशासनिक कुंभकर्णी नींद टूटी

कमिश्नर के हंटर के बाद जागी मंडी और जीएसटी टीम, क्या सिर्फ ट्रक पकड़ा जाएगा या सफेदपोश आकाओं तक पहुँचेंगे हाथ? 


Junaid Khan - शहडोल। क्षेत्र में सक्रिय अवैध महुआ कारोबार के काले साम्राज्य पर जब मीडिया ने अपनी पैनी नजर डाली, तो शासन-प्रशासन के गलियारों में हड़कंप मच गया। पिछले दिनों प्रमुखता से प्रकाशित खबर का ऐसा जोरदार असर हुआ कि जो अधिकारी अब तक मौन साधे बैठे थे, उन्हें आखिरकार मैदान में उतरना पड़ा। कमिश्नर के कड़े निर्देशों के बाद जीएसटी विभाग की टीम ने दलबल के साथ कृषि उपज मंडी परिसर में दबिश दी, जिससे अवैध कारोबारियों के सिंडिकेट में खलबली मच गई है। अवैध महुआ का 'काला खेल' उजागर मंडी परिसर में अवैध रूप से खड़े 350 क्विंटल महुआ से लदे ट्रक की जब्ती महज एक बानगी है। हकीकत यह है कि यह पूरा खेल बिना किसी वैध अनुज्ञा और कागजों के खेला जा रहा था। सोमवार को जब बिना परमिशन के इस खेप को प्रदेश की सीमा पार कराने की कोशिश की गई, तब यह मामला प्रकाश में आया। मीडिया की सक्रियता ने इस पूरे मामले की परतें उधेड़ दीं, जिसके बाद प्रशासनिक अमला हरकत में आने को मजबूर हुआ। जीएसटी टीम की एंट्री और 'सचिन उद्दे' का एक्शन मंगलवार को जीएसटी विभाग की टीम जांच के लिए सीधे ग्राउंड जीरो यानी मंडी परिसर पहुँची। यहाँ विभाग के अधिकारी सचिन उद्दे ने मौके पर मौजूद ट्रक का बारीकी से निरीक्षण किया। प्रशासनिक सख्ती का आलम यह था कि ट्रक चालक के पास परिवहन से संबंधित कोई भी संतोषजनक दस्तावेज नहीं मिले। विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चालक को नोटिस थमा दिया है और मालिकाना हक के प्रमाण मांगे हैं। सिंडिकेट को खुली चुनौती। 07 दिन का अल्टीमेटम इस पूरे प्रकरण में अब सबकी नजरें सात दिनों की समय सीमा पर टिकी हैं। प्रशासन ने महुआ मालिक को दस्तावेज पेश करने के लिए एक हफ्ते का वक्त दिया है। यह 7 दिन केवल एक ट्रक चालक के लिए नहीं, बल्कि उन बड़े मगरमच्छों के लिए भी चेतावनी है जो पर्दे के पीछे रहकर इस पूरे 'सिंडिकेट' को संचालित कर रहे हैं। सवाल यह है कि क्या यह अवैध व्यापार केवल एक ट्रक तक सीमित है, या इसके पीछे कोई बड़ा माफिया नेटवर्क काम कर रहा है? प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान हैरानी की बात यह है कि इतना भारी मात्रा में महुआ मंडी परिसर के भीतर कैसे पहुँचा और अधिकारियों की नाक के नीचे इसे सीमा पार कराने की तैयारी कैसे हो गई? क्या बिना स्थानीय संरक्षण के इतना बड़ा अवैध परिवहन संभव है? मीडिया की खबर ने सीधे तौर पर प्रशासन को चुनौती दी है कि वह केवल छोटे प्यादों (ड्राइवरों) पर कार्रवाई करके इतिश्री न करे, बल्कि उस सिंडिकेट की जड़ पर प्रहार करे जो सरकार के राजस्व को चूना लगा रहा है। बिना परमिशन सीमा पार करने की 'जुर्रत' सूत्रों की मानें तो यह महुआ चोरी-छिपे बाहरी राज्यों में खपाने की योजना थी। बिना अनुज्ञा (Permit) के प्रदेश की सीमा लांघने की कोशिश यह दर्शाती है कि अवैध कारोबारियों के हौसले कितने बुलंद हैं। उन्हें न तो कानून का डर है और न ही प्रशासन का खौफ। लेकिन इस बार मीडिया के हस्तक्षेप ने उनकी प्लानिंग पर पानी फेर दिया है। जांच की आंच कहाँ तक जाएगी? जीएसटी विभाग की टीम ने परिवहन के वैध दस्तावेज और महुआ के सोर्स की जानकारी मांगी है। यदि सात दिनों के भीतर सही दस्तावेज पेश नहीं किए गए, तो यह साफ हो जाएगा कि यह महुआ पूरी तरह अवैध है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी पारदर्शिता बरतता है। क्या उन रसूखदारों के नाम सामने आएंगे जिन्होंने इस काले धंधे में अपना पैसा लगा रखा है? खबर का असर: अब चुप नहीं बैठेगा मीडिया यह कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि जब मीडिया अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए सच को सामने लाता है, तो तंत्र को जवाबदेह बनना ही पड़ता है। प्रशासन के लिए यह एक कड़ा संदेश है कि जनता और प्रेस की नजरें हर अवैध गतिविधि पर हैं। भ्रष्टाचार और अवैध उत्खनन या परिवहन के खिलाफ यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक अंतिम दोषी सलाखों के पीछे नहीं पहुँच जाता। भविष्य की रणनीति: सिंडिकेट के 'आका' रडार पर आने वाले सात दिन इस क्षेत्र की राजनीति और प्रशासनिक साख के लिए महत्वपूर्ण हैं। यदि प्रशासन ने ढिलाई बरती, तो यह माना जाएगा कि सिस्टम भी इस सिंडिकेट का हिस्सा है। लेकिन जिस तरह से जीएसटी टीम ने दबिश दी है, उससे उम्मीद जागी है कि इस बार 'महुआ के खेल' का पर्दाफाश होकर रहेगा।

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