05 हजार छात्रों की एंट्री अटकी,डीईओ की चेतावनी बेअसर,क्या कागजों पर ही सिमट गई 07 हजार बच्चों की साइकिल योजना?
Junaid Khan - शहडोल। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब और ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को आसानी से विद्यालय तक पहुंचाने के उद्देश्य से संचालित नि:शुल्क साइकिल वितरण योजना, शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अफसरों और संस्था प्रमुखों की नाकामी की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के तहत जिले के शासकीय विद्यालयों में कक्षा छठवीं एवं नवमीं में अध्ययनरत लगभग सात हजार विद्यार्थियों को साइकिल प्रदान की जानी है। विभागीय दावों के अनुसार अब तक करीब पांच हजार बच्चों को साइकिलें बांटी भी जा चुकी हैं, लेकिन चौंकाने वाला सच यह है कि जिन बच्चों को साइकिल मिल चुकी है, उनकी कोई भी एंट्री ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज नहीं की गई है। स्कूलों के प्राचार्यों द्वारा साइकिलों का चेसिस नंबर और वितरण संबंधी आवश्यक विवरण पोर्टल पर अपलोड न करने के कारण भोपाल मुख्यालय में बैठे उच्च अधिकारियों के सामने जिले की साख धूमिल हो रही है। इस घोर प्रशासनिक ढिलाई को लेकर लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त ने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) और जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) को कड़े पत्र जारी कर जमकर फटकार लगाई है, बावजूद इसके मैदानी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। बार-बार मिले सख्त निर्देशों के बाद भी स्कूल के प्राचार्यों द्वारा दिखाई जा रही यह स्वेच्छाचारिता और लापरवाही सीधी-सीधी शासन की योजना को पलीता लगाने जैसी है। ऑनलाइन पोर्टल पर डाटा अपडेट न होने से राज्य स्तर पर जिले की वास्तविक प्रगति बेहद दयनीय दिख रही है, जिससे योजना की पारदर्शिता पर भी गहरे सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, मामले में जिला शिक्षा अधिकारी अतुल चौधरी का कहना है कि "पोर्टल पर अद्यतन जानकारी अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं, यदि समय-सीमा में वितरण की जानकारी फीड नहीं होती है तो संबंधित प्राचार्यों और कर्मचारियों पर सीधी अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।" लेकिन सवाल यह उठता है कि सिर्फ चेतावनी और कागजी पत्राचार से तंत्र कब तक चलेगा? आखिर जिम्मेदार अधिकारियों पर समय रहते ठोस कार्रवाई करने से हाथ क्यों कांप रहे हैं? अगर बार-बार कहने पर भी प्राचार्य अपनी मनमानी पर आमादा हैं, तो जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग अब तक ऐसे लापरवाह जिम्मेदार अधिकारियों पर निलंबन जैसी कठोर कार्रवाई करने का साहस क्यों नहीं जुटा पा रहा है? क्या भोपाल से फटकार मिलने के बाद ही जिला स्तर के अधिकारी कुंभकर्णी नींद से जागेंगे?
