अस्पताल के सामने बेखौफ रफ्तार,गोद में मासूम को लिए पैदल महिला को स्कूटी ने रौंदा, कहां सो रहा है पुलिस प्रशासन?

सड़कों पर उड़ रही नियमों की धज्जियां,वीआईपी आवाजाही, पास में स्कूल और मूकदर्शक बनी खाकी अधिकारियों को सीधी चुनौती! 


Junaid Khan - शहडोल। जिला मुख्यालय के सबसे व्यस्त और संवेदनशील इलाके यानी जिला अस्पताल के ठीक सामने दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है, जिसने पुलिस गश्त और शहर की यातायात व्यवस्था के दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। निगम कॉलोनी की निवासी जया मौर्य जब अपने दो मासूम बेटों श्रेयांश और रेहान को साथ लेकर पैदल पांडवनगर की ओर जा रही थीं, तभी एक बेकाबू ग्रे रंग की स्कूटी (क्रमांक MP 18 S 6430) के चालक ने उन्हें भीषण टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि मां की गोद में लिपटा मासूम बच्चा छटककर सड़क पर जा गिरा। हादसे में महिला और दोनों मासूम बच्चों के सिर, हाथ और मुंह पर गंभीर चोटें आई हैं। घटना के बाद घायलों को इलाज के लिए अस्पताल के चक्कर काटने पड़े। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरी वारदात को अंजाम देकर आरोपी चालक मौके से बड़ी आसानी से फरार हो गया और पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। यह कोई दूर-दराज का इलाका नहीं, बल्कि वही सड़क है जहां से हर रोज आला प्रशासनिक अधिकारी, मजिस्ट्रेट, पुलिस के बड़े अफसर और जनप्रनिधि अपनी लाल-नीली बत्तियों वाली गाड़ियों में गुजरते हैं। इसी इलाके में स्कूल भी संचालित होते हैं, जहां बच्चे और महिलाएं हर शाम बड़ी संख्या में पैदल आवाजाही करते हैं। इसके बावजूद, स्कूल के छूटने के समय और शाम की गश्त के दौरान पुलिस का एक भी जवान सड़क पर तैनात नजर नहीं आता। कागजों में तो 'ऑपरेशन गश्त' और महिला सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अस्पताल जैसी जगह के सामने भी आवारा और बेकाबू वाहन चालकों का कब्जा है। जब सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाके में गोद में बच्चा लिए चल रही महिला सुरक्षित नहीं है, तो फिर आम नागरिकों की सुरक्षा का जिम्मा आखिर किसके भरोसे है? घटना के दो दिन बीत जाने के बाद भी कोतवाली पुलिस केवल धारा 281, 125(a) बीएनएस और 184 एमवी एक्ट के तहत अज्ञात चालक पर औपचारिकता के लिए मामला दर्ज कर कागजी खानापूर्ति में जुटी है। यह सीधे तौर पर जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली और पुलिस की घोर लापरवाही पर कड़ा सवालिया निशान लगाता है। क्या जिम्मेदार अधिकारियों को किसी बड़े हादसे का इंतजार था? शाम को टहलने निकलने वाली महिलाओं और मासूम बच्चों की सुरक्षा को ताक पर रखकर आखिर कौन सी गश्त की जा रही है? यह खबर केवल एक एक्सीडेंट की रिपोर्ट नहीं, बल्कि सोए हुए जिला प्रशासन, यातायात पुलिस और संबंधित विभाग के बड़े अफसरों को सीधी चुनौती है कि वे अपनी कुंभकर्णी नींद से जागें और सड़कों पर बेलगाम दौड़ रहे ऐसे हादसों के जिम्मेदार तत्वों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करें।

Previous Post Next Post