38 क्विंटल गांजा मामले में हाईकोर्ट से आरोपी को मिली जमानत

जबलपुर हाईकोर्ट ने कहा ट्रायल में लगेगा समय 

आरोपों के गुण-दोष पर टिप्पणी किए बिना ₹50 हजार के निजी मुचलके पर जमानत मंजूर 


Junaid Khan - शहडोल। बहुचर्चित 38 क्विंटल से अधिक गांजा बरामदगी मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने एक अहम आदेश पारित करते हुए आरोपी विवेकानंद गुप्ता को नियमित जमानत प्रदान कर दी है। न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने 29 जुलाई 2026 को पारित आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया आवेदक की भूमिका सीमित प्रतीत होती है तथा उसके विरुद्ध स्वतंत्र प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में, मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना उसे जमानत पर रिहा किया जाना उचित होगा। मामला जयसिहनगर थाना क्षेत्र में वर्ष 2025 में दर्ज एनडीपीएस एक्ट की धाराओं 8 एवं 20 के तहत अपराध से संबंधित है। अभियोजन के अनुसार मामले में कुल 38 क्विंटल 26 किलोग्राम 100 ग्राम गांजा बरामद किया गया था, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 3.06 करोड़ रुपये बताई गई है। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि आवेदक के खिलाफ कोई स्वतंत्र प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है और उसकी कथित संलिप्तता केवल सह-आरोपियों के कथनों पर आधारित है। यह भी तर्क दिया गया कि चार्जशीट में वाहन क्षतिग्रस्त होने संबंधी तथ्य स्पष्ट नहीं हैं तथा किसी स्वतंत्र गवाह ने आवेदक को घटनास्थल पर देखने की पुष्टि नहीं की है। वहीं, शासन की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि आवेदक अपने पिता एवं अन्य सह-आरोपियों के साथ गांजा परिवहन और भंडारण की प्रक्रिया में शामिल था तथा उसकी भूमिका स्पष्ट है। इसलिए उसे जमानत का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि आवेदक 16 फरवरी 2026 से न्यायिक अभिरक्षा में है, जांच पूरी हो चुकी है और चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि आवेदक की भूमिका सीमित बताई गई है तथा उसके विरुद्ध स्वतंत्र साक्ष्य का अभाव है। साथ ही, मुकदमे के शीघ्र समाप्त होने की संभावना नहीं होने के कारण उसे जमानत दिए जाने का आधार बनता है। इस बहुचर्चित मामले की पैरवी हाई कोर्ट का अधिवक्ता योगेश सिंह बघेल ने की जिसमें हाईकोर्ट ने आरोपी को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके एवं समान राशि के एक जमानतदार पर रिहा करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, उसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 480(3) के तहत निर्धारित सभी शर्तों का पालन करने के निर्देश भी दिए गए हैं। हाईकोर्ट का यह आदेश केवल जमानत से संबंधित है। इससे आरोपी दोषमुक्त घोषित नहीं होता। मामले का अंतिम निर्णय ट्रायल कोर्ट में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा।

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