ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री,बुजुर्ग की सनसनीखेज हत्या और लूट का महज 72 घंटे में खुलासा, शहडोल पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने जीता जनता का भरोसा

मुस्तैद पुलिसिंग,साइबर सेल और कोतवाली टीम के अचूक जाल में फंसे शातिर कातिल, होटल कर्मी ही निकले मुख्य साजिशकर्ता


Junaid Khan - शहडोल। जिला मुख्यालय के बलपुरवा बस स्टैंड और विवेक नगर क्षेत्र में उस समय सनसनी फैल गई, जब एक सूने मकान के भीतर 81 वर्षीय सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी जगदीश प्रसाद मिश्रा का रक्तरंजित शव संदिग्ध परिस्थितियों में नग्न अवस्था में पाया गया। शरीर पर गहरे चोट के निशान और घटनास्थल के हालात चीख-चीखकर किसी खौफनाक वारदात की गवाही दे रहे थे। सुबह जब रोजाना की तरह काम करने वाली महिला घर पहुंची, तो इस रूह कंपा देने वाले दृश्य को देखकर उसकी चीख निकल गई। देखते ही देखते मौके पर स्थानीय लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। इस अंधे कत्ल की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक (एसपी) स्वयं दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और बारीकी से घटनास्थल का मुआयना किया। इसके तुरंत बाद फॉरेंसिक एक्सपर्ट और साइबर सेल की टीमों को सक्रिय कर साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई युद्धस्तर पर शुरू कर दी गई। इस अंधे कत्ल और सनसनीखेज लूटपाट की गुत्थी को सुलझाना शहडोल पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन कानून के रखवालों ने अपनी पेशेवर दक्षता का परिचय देते हुए महज कुछ ही घंटों के भीतर इस 'ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री' का पर्दाफाश कर दिया। थाना प्रभारी कोतवाली के कुशल नेतृत्व में गठित विशेष टीम और साइबर सेल की तकनीकी टीम ने जब कड़ियां जोड़नी शुरू कीं, तो संदेह के घेरे में सूर्या इंटरनेशनल होटल के कर्मचारी आए। तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर तंत्र के अचूक तालमेल से पुलिस ने दो शातिर आरोपियों—देवानंद महरा (25 वर्ष, निवासी कठौतिया, सिंहपुर) और उसकी महिला सहयोगी अनुश्री परस्ते (21 वर्ष, निवासी मालाचऊ, उमरिया) को दबोच लिया। कड़ी पूछताछ में आरोपियों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया, जिससे यह साफ हो गया कि आर्थिक लालच में इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया गया था। पुलिस की तफ्तीश में जो चौंकाने वाला खुलासा हुआ, वह किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं था। आरोपी देवानंद मिश्रा जी के घर के सामने स्थित होटल में काम करता था और उसे भली-भांति मालूम था कि बुजुर्ग अकेले रहते हैं और उनके पास मोटी रकम हो सकती है। इसी वित्तीय लाभ को हथियाने के लिए दोनों आरोपियों ने एक सोची-समझी साजिश रची। योजना के तहत अनुश्री को बुजुर्ग के घर में घरेलू काम के बहाने दाखिल कराया गया ताकि घर की हर गतिविधि और संपत्ति की सटीक टोह ली जा सके। इसके बाद 2 जून 2026 की कालरात्रि को दोनों ने मिलकर इस वीभत्स हत्याकांड और लूट की घटना को अंजाम दिया। सीएसपी राजेंद्र मोहन दुबे के मार्गदर्शन में कोतवाली पुलिस की इस त्वरित, पारदर्शी और बेहद पेशेवर कार्रवाई की पूरे संभाग में जमकर तारीफ हो रही है। इस सफल पुलिसिंग ने न केवल अपराधियों के हौसले पस्त किए हैं, बल्कि आम जनता के बीच खाकी के इकबाल और सुरक्षा के भरोसे को और मजबूत कर दिया है। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया जा रहा है।

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