सिस्टम शर्मसार,मौत पर 'मैनेजमेंट' का खेल

लापरवाही छुपाने को बिना पीएम बिहार भेज रहे थे मजदूर का शव,परिजनों ने बनारस से मोड़ा 


Junaid Khan - शहडोल। शहडोल के सिंहपुर थाना क्षेत्र में मानवता को शर्मसार करने और कानून की धज्जियां उड़ाने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक निजी अस्पताल प्रबंधन और विद्युत टॉवर निर्माण करा रही ठेका कंपनी ने अपनी गर्दन बचाने के लिए सारी हदें पार कर दीं। ग्राम पठरा में विद्युत टॉवर निर्माण के दौरान ऊंचाई से गिरकर गंभीर रूप से घायल हुए बिहार निवासी 39 वर्षीय मजदूर अनोज सिंह पिता प्रकाश सिंह की 13 दिनों के इलाज के बाद निजी अस्पताल में मौत हो गई। इस संवेदनशील मामले में कानूनी प्रक्रिया (पोस्टमार्टम) का पालन करने और पुलिस को सूचना देने के बजाय, अस्पताल प्रबंधन और ठेका कंपनी ने सांठगांठ कर मामले को रफा-दफा करने की नीयत से शव को चुपचाप एंबुलेंस में लादकर बिहार के लिए रवाना कर दिया। निजी अस्पताल और रसूखदार ठेका कंपनी की इस अमानवीय और कानून-विरोधी करतूत का भंडाफोड़ तब हुआ, जब मृतक का भाई शव लेकर बनारस पहुंचा। वहां मौजूद सजग परिजनों और परिचितों ने जब देखा कि शव का बिना पोस्टमार्टम कराए ही लाया जा रहा है, तो उन्होंने सिस्टम के इस खूनी खेल को भांप लिया। परिजनों ने शव को आगे ले जाने से साफ इनकार कर दिया और बनारस से ही गाड़ी को वापस शहडोल के लिए मुड़वा दिया। 17 जुलाई की शाम शव वापस शहडोल पहुंचा, जिसके बाद 18 जुलाई को कड़ी मशक्कत और हंगामे के बाद पुलिस की मौजूदगी में शव का विधिवत पोस्टमार्टम कराया जा सका। यह घटना सीधे तौर पर स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और श्रम विभाग की मॉनिटरिंग पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है कि आखिर कैसे एक रसूखदार लॉबी ने कानून को अपनी जेब में रखकर शव को जिले की सीमा से बाहर भिजवा दिया? इस पूरे मामले ने अब पुलिस और प्रशासनिक अमले की कार्यप्रणाली को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। कोतवाली टीआई राघवेंद्र सिंह के मुताबिक, 3 जुलाई को हुए इस हादसे से लेकर मरीज की मौत (16 जुलाई) तक, निजी अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को किसी भी तरह का मेमो या सूचना नहीं दी थी। अस्पताल के डॉक्टरों ने 16 जुलाई को कंधे के ऑपरेशन के बाद मरीज की तबीयत बिगड़ने और दम तोड़ने की बात तो मानी, लेकिन पुलिस को अंधेरे में क्यों रखा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। हादसे के वक्त ठेका कंपनी के कर्मचारियों ने आनन-फानन में घायल मजदूर को विचारपुर गांव में संचालित इस निजी अस्पताल में भर्ती कराया था, जिससे साफ है कि शुरू से ही मामले को दबाने की स्क्रिप्ट लिख दी गई थी। फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या केवल जांच के नाम पर खानापूर्ति होगी या फिर बिना पीएम के शव गायब करने की कोशिश करने वाले इस रसूखदार 'सिंडिकेट' और अस्पताल के लाइसेंस को निरस्त कर गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज होगा?

Previous Post Next Post