रेलवे इंस्टिट्यूट की दीवार गिरने से तीन मासूमों के गंभीर रूप से घायल होने के बाद बिलासपुर तक मची खलबली, मगर जमीनी हकीकत में सिर्फ लीपापोती का खेल जारी
Junaid Khan - शहडोल। कोयलांचल और आदिवासी बाहुल्य संभाग मुख्यालय शहडोल में रेलवे प्रशासन की घोर लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये ने एक बार फिर आम जनता और मासूमों की जिंदगी को दांव पर लगा दिया है। विगत पिछले कुछ दिनों में रेलवे कॉलोनी परिसर स्थित रेलवे इंस्टिट्यूट में एक बेहद जर्जर दीवार गिरने का भीषण हादसा सामने आया, जिसने पूरे महकमे की आंखें खोलकर रख दीं। इस दर्दनाक घटना में तीन निर्दोष बच्चे गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे थे, जबकि तीन अन्य बच्चों को आंशिक चोटें आई थी। यदि समय रहते कोई बड़ा चमत्कार न हुआ होता, तो यह घटना कई परिवारों के चिराग बुझा सकती थी। इस पूरे मामले में स्थानीय आईडब्ल्यू (इंजीनियरिंग शाखा) से लेकर सीनियर डिवीजनल अधिकारियों की लापरवाही साफ तौर पर उजागर हुई है, जिन्होंने बार-बार चेतावनी दिए जाने के बाद भी इन जर्जर और मौत का कुआं बन चुके भवनों को खुला छोड़ रखा था।
बिलासपुर से जांच और दिखावे की कार्रवाई पर प्रहार
इस गंभीरतम हादसे की गूंज जब बिलासपुर जोनल मुख्यालय तक पहुंची, तो आनन-फानन में उच्च अधिकारियों ने जांच दल का गठन कर शहडोल भेजा। जांच टीम के आने और प्रशासनिक दबाव बढ़ने के बाद रेलवे ने अपनी साख बचाने के लिए आनन-फानन में एक निजी ठेका कंपनी को काम सौंपकर केवल 44 जर्जर आवासों को चिन्हित कर उन पर बुलडोजर चलवाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। रेलवे ग्राउंड के पास शुरू हुई इस मशीनी कार्रवाई को देखकर ऐसा प्रतीत कराया जा रहा है मानो पूरा महकमा बेहद संवेदनशील हो चुका है। लेकिन जमीनी सच इससे कोसों दूर है। 'दैनिक प्रदेश सत्ता' की पड़ताल में यह साफ हुआ है कि यह पूरी कवायद केवल बिलासपुर से आए अधिकारियों को संतुष्ट करने और अपनी खाल बचाने के लिए की जा रही एक सुनियोजित खानापूर्ति और लीपापोती है, ताकि करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार और विभागीय नाकामी के असली चेहरों पर पर्दा डाला जा सके।
ट्विटर और सोशल मीडिया पर दी गई चुनौती का असर न होना
उल्लेखनीय है कि इस जानलेवा लापरवाही को लेकर 'दैनिक प्रदेश सत्ता' द्वारा पूर्व में भी वीडियो प्रमाणों, जमीनी सबूतों और खबरों के माध्यम से देश के रेल मंत्री, प्रधानमंत्री, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री, बिलासपुर के डीआरएम (महाप्रबंधक) और (मंडल रेल प्रबंधक) सहित भाजपा-कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को टैग कर लगातार ट्वीट किए गए थे। लेकिन इस मूक-बधिर प्रशासन ने तब तक कोई सुध नहीं ली जब तक मासूमों का खून सड़कों पर नहीं बह गया। आज भी जो कार्रवाई की जा रही है, वह सिर्फ ऊपरी अधिकारियों को दिखाने के लिए 'लीपा-पोती' मात्र है, ताकि भ्रष्टाचार की जो अविरल धारा महकमे के भीतर बह रही है, वह बिना किसी रुकावट के चलती रहे और बड़ी मछलियां साफ बच निकलें।
चिन्हित स्थानों के अलावा अन्य बड़े अड्डों का खुलासा
रेलवे की यह तथाकथित बुलडोजर कार्रवाई केवल रेलवे कॉलोनी के एक छोटे से हिस्से तक ही सीमित होकर रह गई है, जबकि वास्तविकता यह है कि पुरानी बस्ती से लेकर रेलवे फाटक के पास, प्रसिद्ध विनस होटल के ठीक सामने और समूचे स्टेशन रोड पर रेलवे की संपत्ति से जुड़े दर्जनों ऐसे खंडहर मकान लावारिस हालत में खुले पड़े हैं। विनस होटल के सामने बनी रेलवे की पुरानी लाइब्रेरी, जो कभी ज्ञान का मंदिर हुआ करती थी, आज इस समूचे संभाग में युवाओं के भविष्य को स्वाहा करने वाला सबसे बड़ा 'ब्लैक होल' और 'सुसाइड पॉइंट' बन चुकी है। इस खंडहर के भीतर जाने पर रोंगटे खड़े कर देने वाला मंजर दिखाई देता है, जहां हजारों की तादाद में इस्तेमाल की जा चुकीं घातक नशीली सुइयां (सिरिंज), प्रतिबंधित कफ सिरप की खाली बोतलें और थिनर जैसी जानलेवा चीजें बिखरी पड़ी हैं, जो कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ा रही हैं।
पुलिस और आरपीएफ की रहस्यमयी खामोशी पर सीधा सवाल
ये लावारिस खंडहर केवल नशेड़ियों के अड्डे नहीं हैं, बल्कि यह क्षेत्र में होने वाली गंभीर आपराधिक वारदातों की मुख्य शरणस्थली बन चुके हैं, जहां पूर्व में भी मर्डर, बलात्कार, लूट और खूनी गैंगवार जैसी कई जघन्य वारदातें और रहस्यमयी मौतें दर्ज हो चुकी हैं। स्थानीय पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की नाकों के ठीक नीचे, दिन के उजाले से लेकर रात के अंधेरे तक मौत का यह सामान खुलेआम बिकता और खपता है। शहर के भीतर धड़ल्ले से चल रहे इस अवैध काले कारोबार की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि स्थानीय कोतवाली पुलिस और आरपीएफ की रहस्यमयी खामोशी पर अब सीधे तौर पर मिलीभगत के गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आखिर बिना किसी पुख्ता नेटवर्क और प्रशासनिक मौन सहमति के, इतनी भारी मात्रा में प्रतिबंधित मेडिकल नशा इन युवाओं तक कैसे पहुंच रहा है?
रेल प्रशासन को खुली चुनौती और अंतिम चेतावनी
रेलवे प्रशासन ने अपनी कागजी फाइलों को दुरुस्त करने के लिए कुछ चुनिंदा मकानों को जमींदोज तो कर दिया, लेकिन उन मुख्य 'डेंजर जोन' बन चुके भवनों को जस का तस छोड़ दिया है जहां वर्तमान में भी अनैतिक और असामाजिक गतिविधियों का संचालन बेखौफ जारी है। स्थानीय बुद्धिजीवियों और नागरिकों का साफ कहना है कि यदि प्रशासन वाकई गंभीर है और कागजी कोरम पूरा करने की बजाय वास्तविक समाधान चाहता है, तो रेलवे कॉलोनी से लेकर पुरानी बस्ती और विनस होटल के सामने तक फैले हर एक जर्जर ढांचे को तत्काल प्रभाव से जमींदोज किया जाए। 'दैनिक प्रदेश सत्ता' रेल प्रशासन को यह खुली चुनौती देता है कि यदि वक्त रहते इस आधी-अधूरी कार्रवाई को बंद कर सभी खंडहरों पर पूर्ण प्रहार नहीं किया गया, तो आने वाले समय में किसी भी बड़े हादसे या जनहानि की पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर रेल अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन की होगी।
