मॉडल रोड निर्माण,रसूखदारों पर मेहरबान प्रशासन

भेदभावपूर्ण कार्रवाई से जनता में भारी उबाल,नपा अध्यक्ष के दावों की खुली पोल


Junaid Khan - शहडोल। शहर के बस स्टैंड से बुढ़ार चौक के बीच बन रही 1300 मीटर लंबी बहुप्रतीक्षित मॉडल रोड का निर्माण कार्य एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही, पक्षपात और रसूखदारों को संरक्षण देने के आरोपों के घेरे में आ गया है। शुक्रवार को 17 मीटर के तय दायरे में आने वाले अवैध निर्माणों को ढहाने के लिए प्रशासन का बुलडोजर (जेसीबी) तो चला, लेकिन इस कार्रवाई ने निष्पक्षता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां आम जनता और छोटे दुकानदारों ने कानून का सम्मान करते हुए खुद अपने लाखों रुपये के आशियाने और दुकानें तोड़ लिए, वहीं दूसरी तरफ सड़क के इसी 17 मीटर के दायरे में आने वाले 5 से ज्यादा बड़े और प्रभावशाली लोगों के निर्माणों को प्रशासन ने छूना तक मुनासिब नहीं समझा। नगर पालिका और स्थानीय प्रशासन की यह 'चुन-चुन कर की गई कार्रवाई' अब सीधे कानून-व्यवस्था और पुलिस-प्रशासन की साख को खुली चुनौती दे रही है।

रसूख के आगे झुका अमला, फूटा जनता का गुस्सा 

इस दोहरी नीति और खुल्लम-खुल्ला किए जा रहे भेदभाव से स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। मौके पर मौजूद लोगों का साफ कहना है कि जब नियम सबके लिए बराबर हैं, तो कुछ खास चेहरों और रसूखदारों को यह वीआईपी ट्रीटमेंट क्यों दिया जा रहा है? नगर पालिका का दस्ता और प्रशासनिक अधिकारी इन चुनिंदा अवैध ढांचों पर कार्रवाई करने से कतरा क्यों रहे हैं? क्या इन रसूखदारों के आगे प्रशासन ने घुटने टेक दिए हैं या फिर पर्दे के पीछे कोई बड़ा खेल चल रहा है? जनता का आरोप है कि नगर पालिका अध्यक्ष घनश्याम जायसवाल भले ही मंचों से 'भेदभाव न बरतने' का खोखला दावा कर चुके हों, लेकिन जमीन पर हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। इस पक्षपातपूर्ण कार्रवाई ने ठेकेदार द्वारा किए जा रहे सड़क निर्माण और पुरानी सड़क को उखाड़ने के काम की रफ्तार पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं, क्योंकि जब तक ये वीआईपी अतिक्रमण नहीं हटेंगे, तब तक खंभे लगाने और सड़क को पूर्ण आकार देने का काम अधर में लटका रहेगा।

बड़ी लापरवाही, कभी भी भड़क सकता है जनाक्रोश 

प्रशासन की यह लचर और भेदभावपूर्ण कार्यप्रणाली आने वाले दिनों में कानून-व्यवस्था के लिए एक बड़ा संकट खड़ी कर सकती है। अपने आशियाने गंवा चुके आम नागरिक अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। जनता की सीधी मांग है कि विकास के नाम पर हो रहे इस तमाशे को तुरंत बंद किया जाए और बिना किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के दायरे में आने वाले सभी 05 से अधिक वीआईपी निर्माणों को भी जमींदोज किया जाए। अगर प्रशासन ने समय रहते अपनी इस घोर लापरवाही को नहीं सुधारा और रसूखदारों पर मेहरबानी जारी रखी, तो बुढ़ार चौक और बस स्टैंड का यह पूरा इलाका उग्र आंदोलन और कानून-व्यवस्था की नाकामी का गवाह बन सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमे की होगी।

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