प्रबंधन की 'तकनीकी' लापरवाही से भुखमरी की कगार पर रामपुर बटुरा OCM के कोयला मजदूर

मई का महीना बीता,जून के 08 दिन निकले,बैंक ऑफ बड़ौदा के खाताधारक कर्मियों का वेतन अटका, EMI बाउंस होने से बढ़ेगा मानसिक तनाव


Junaid Khan - शहडोल। सोहागपुर साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की रामपुर बटुरा ओपनकास्ट माइन (OCM) में इन दिनों कोयला उगलने वाले मजदूरों के घरों में अंधेरा छाने की नौबत आ गई है। हर महीने की 1 और 2 तारीख को पसीने की कमाई का हक पा लेने वाले सैकड़ों अधिकारी-कर्मचारियों का मई माह का वेतन आज 8 जून बीत जाने के बाद भी उनके खातों में नहीं पहुंचा है। प्रबंधन इस गंभीर मानवीय और आर्थिक संकट को महज एक 'तकनीकी समस्या' का झुनझुना थमाकर टालने की कोशिश कर रहा है। सवाल यह उठता है कि जब मजदूर अपनी जान जोखिम में डालकर 24 घंटे प्रबंधन का खजाना भर रहे हैं, तो उनके भुगतान के वक्त सिस्टम को 'लकवा' कैसे मार जाता है? यह सीधे तौर पर प्रबंधन की घोर लापरवाही और तानाशाही पूर्ण रवैये को दर्शाता है, जिसे क्षेत्र का जागरूक मीडिया और मजदूर संगठन कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।

मजदूरों पर दोहरी मार, एक तरफ खाली जेब, दूसरी तरफ बैंक पेनल्टी और बाउंसिंग चार्ज का डर

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा प्रशासनिक और वित्तीय खेल बैंक ऑफ बड़ौदा के खाताधारक कर्मचारियों के साथ हो रहा है। एटक (AITUC) यूनियन के सचिव राकेश कुमार गुप्ता ने इस तानाशाही के खिलाफ सीधे तौर पर मोर्चा खोलते हुए प्रबंधन को चेतावनी पत्र थमाया है। पत्र के जरिए प्रबंधन की आंखें खोलने की कोशिश करते हुए बताया गया कि वेतन में इस अप्रत्याशित विलंब से कर्मचारियों के सामने भारी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। आज के दौर में अधिकांश कर्मचारियों की बैंक ऋण, होम लोन, गाड़ी की ईएमआई (EMI) और अन्य आवश्यक पारिवारिक खर्चों की देय राशियाँ महीने के पहले हफ्ते में खाते से स्वतः (ECS/NACH) कटती हैं। समय पर वेतन न आने से ये सभी भुगतान बाउंस हो रहे हैं। इसका नतीजा यह होगा कि बिना किसी गलती के मजदूरों पर अतिरिक्त जुर्माना (पेनल्टी) थोपा जाएगा और उनका सिबिल (CIBIL) स्कोर भी खराब होगा। प्रबंधन की इस सुस्ती ने मजदूरों को भीषण मानसिक तनाव और पीड़ा के दलदल में धकेल दिया है।

एटक यूनियन की दोटूक चुनौती- तत्काल भुगतान हो, वरना भविष्य में भुगतने होंगे गंभीर परिणाम 

राकेश कुमार गुप्ता, सचिव (एटक यूनियन, रामपुर बटुरा ओसीयम सोहागपुर क्षेत्र) ने दोटूक लहजे में कहा है कि गंभीर समस्या पर तत्काल संज्ञान लेते हुए बैंक एवं संबंधित विभाग से तालमेल बिठाया जाए और कर्मचारियों के वेतन का भुगतान शीघ्र सुनिश्चित कराया जाए। यूनियन ने प्रबंधन को चेताया है कि भविष्य में ऐसी तानाशाही और घोर लापरवाही की पुनरावृत्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि प्रबंधन ने अपनी कुंभकर्णी नींद से जागकर बैंक और संबंधित विभागों से तत्काल समन्वय नहीं किया और भुगतान में और देरी की, तो यह सुलगता हुआ असंतोष किसी बड़े औद्योगिक विवाद का रूप ले सकता है। अब देखना यह है कि सोहागपुर क्षेत्र का यह लापरवाह प्रबंधन कब तक अपनी 'तकनीकी' आड़ में छिपता है या फिर मजदूरों के हित में त्वरित और संवेदनशीलता के साथ कोई ठोस कदम उठाता है।

Previous Post Next Post