स्वयं की पदोन्नति का खेल पूरा,अधीनस्थों का भविष्य अधर में,आईटीआई प्राचार्य पर गद्दारी का आरोप, कमिश्नर ने दिए कड़ी जांच के आदेश
Junaid Khan - शहडोल। शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) में जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों की संवेदनहीनता और स्वार्थी रवैये का एक चौकाने वाला मामला सामने आया है। संस्थान के प्राचार्य पर अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए अपने ही अधीनस्थों के हक पर डाका डालने का गंभीर आरोप लगा है। शासकीय आईटीआई शहडोल में कार्यरत दो लिपिक, एक चौकीदार और 14 प्रशिक्षण अधिकारियों सहित कुल 17 निष्ठावान कर्मचारियों की पदोन्नति का मामला पूरी तरह अटक गया है। आरोप है कि प्राचार्य ने संयुक्त संचालक (जेडी) से तालमेल बिठाकर अपनी खुद की पदोन्नति और चरित्रपंजिका (सीआर) से जुड़े सभी कार्य चुटकी बजाते ही पूरे करवा लिए, लेकिन वर्षों से सेवा दे रहे अपने कर्मचारियों की वार्षिक गोपनीय चरित्रावली (सीआर) समय पर नहीं लिखी। नियमानुसार पदोन्नति के बाद प्राचार्य का तबादला अन्यत्र हो जाना चाहिए था, परंतु उन्होंने अपने राजनैतिक व प्रशासनिक प्रभाव का अनुचित इस्तेमाल कर शहडोल में ही अपनी जमावट बनाए रखी। प्राचार्य की इस स्वार्थी कार्यशैली और मनमानी के खिलाफ पीड़ित कर्मचारियों में भारी रोष और आक्रोश व्याप्त है। इस पूरे प्रशासनिक तंत्र में सबसे शर्मनाक और दुखद पहलू एक शत-प्रतिशत दिव्यांग महिला कर्मचारी के साथ हुई उपेक्षा का है। लगभग छः माह बाद सेवानिवृत्त होने वाली इस दिव्यांग महिला कर्मचारी ने अपने जीवन के अनमोल वर्ष संस्थान को दिए, परंतु उनकी सीआर भी उचित ढंग से नहीं लिखी गई, जिसके कारण उनके जीवन का अंतिम पदोन्नति का अवसर प्रभावित हो गया। कई अधिकारी और कर्मचारी पिछले 22 से 37 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं और लगातार बेहतर परीक्षा परिणाम दे रहे हैं, लेकिन उनकी वफादारी का इनाम उन्हें पदोन्नति से वंचित रखकर दिया गया। इस पूरे फर्जीवाड़े और तानाशाही रवैये की खबर जैसे ही जन-प्रतिनिधियों और युवा नेताओं तक पहुंची, मामला गरमा गया। युवा नेता प्रत्युष गौतम ने मामले को प्रमुखता से उठाते हुए दोषी प्राचार्य और विभागीय अफसरों पर तत्काल निष्पक्ष जांच और सख्त दंडात्मक कार्रवाई की पुरजोर मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए शहडोल संभाग की संवेदनशील और कड़क संभागायुक्त (कमिश्नर) सुरभि गुप्ता ने तुरंत हस्तक्षेप किया है। कमिश्नर की इस त्वरित कार्रवाई और कड़े रुख की चारों तरफ भूरि-भूरि प्रशंसा हो रही है। उन्होंने कर्मचारियों के उत्पीड़न और प्रशासनिक लापरवाही को बेहद गंभीरता से लेते हुए पूरे प्रकरण के सूक्ष्म परीक्षण और त्वरित जांच के कड़े निर्देश दिए हैं। कमिश्नर के इस सख्त तेवर से आईटीआई प्रबंधन और उच्चाधिकारियों के गलियारों में हड़कंप मच गया है। पीड़ित कर्मचारियों में अब न्याय की आस जगी है कि प्रशासन की इस सख्ती से न केवल उनकी लंबित सीआर तत्काल तैयार होगी और पदोन्नति का रास्ता साफ होगा, बल्कि अपनी कुर्सी का गलत फायदा उठाकर मातहतों का शोषण करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कड़ी गाज गिरेगी।
