महीने भर से अंधेरे में 5 गांव,सुध लेने वाला कोई नहीं,कबाड़ माफिया पर पुलिस की मेहरबानी या आपराधिक लापरवाही?
Junaid Khan - शहडोल। जिले के जैतपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत जनपद पंचायत बुढार की ग्राम पंचायत कोठी और आसपास के इलाकों में प्रशासनिक संवेदनहीनता और खाकी की खामोशी का खौफनाक मंजर देखने को मिल रहा है। ग्राम पंचायत कोठी से गुजरने वाली मुख्य बिजली लाइन के लगभग 20 खंभों (पोल) से बेखौफ चोरों ने भारी मात्रा में एल्युमिनियम/तांबे के विद्युत तार पार कर दिए। इस दुस्साहसिक वारदात को बीते एक महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन बिजली विभाग से लेकर स्थानीय पुलिस प्रशासन तक कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं। बिजली के अभाव में आसपास के पाँचों गाँवों का जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया है। एक तरफ जहां ग्रामीण बत्ती गुल होने से अंधेरे में जीने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी तरफ सवाल यह खड़ा हो रहा है कि 20 पोल से क्विंटल के हिसाब से तार चोरी होकर चले गए और स्थानीय पुलिस को भनक तक नहीं लगी? आखिर जिले में पनप रहे कबाड़ माफिया और अवैध कबाड़ की दुकानों पर पुलिस की नकेल क्यों नहीं कस पा रही? क्या यह पूरी कार्रवाई पुलिस और कबाड़ियों की सांठगांठ की ओर इशारा नहीं करती? विभाग और स्थानीय प्रशासन के चक्कर काटकर थक चुके ग्रामीणों का धैर्य आखिरकार जवाब दे गया। इंसाफ और न्याय की आस में सैकड़ों ग्रामीणों ने कड़कड़ाती धूप और बारिश की परवाह किए बिना करीब 80 किलोमीटर का लंबा सफर तय किया और सीधे कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव करने पहुंचे। अधिकारियों को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने अपना दर्द बयां करते हुए साफ शब्दों में कहा कि खेत-खलिहानों में सिंचाई का काम ठप पड़ा है, मोटर पंप शो-पीस बन चुके हैं। बरसात के इस खौफनाक मौसम में बच्चे स्कूल से लौटकर अंधेरे में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। रात होते ही जहरीले सांप, बिच्छू और अन्य जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। इसके अलावा मोबाइल चार्जिंग, पीने के पानी की व्यवस्था (पेयजल) और रोजमर्रा के सारे जरूरी काम पूरी तरह ठप हो चुके हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द तार बहाल नहीं किए गए और चोरों सहित कबाड़ियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज कर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन और चक्काजाम के लिए बाध्य होंगे। इस पूरे घटनाक्रम ने जिले की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली की पोल खोलकर रख दी है। इतने बड़े पैमाने पर 20 पोलों से तार काटकर ले जाना किसी एक-दो आम चोरों का काम नहीं हो सकता। इसके पीछे एक संगठित गिरोह काम कर रहा है जो चोरी का तार सीधे जिले में चल रही अवैध कबाड़ की दुकानों पर खपाता है। इसके बावजूद, पुलिस प्रशासन न तो कबाड़खानों पर छापेमारी कर रहा है और न ही मुख्य गिरोह तक पहुँच पा रहा है। आखिर कबाड़ियों की दुकानों की जांच से पुलिस क्यों कतरा रही है? क्या पुलिस की शह पर ही यह कबाड़ का काला कारोबार फल-फूल रहा है? ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारी केवल आश्वासन का झुनझुना थमा रहे हैं। यदि समय रहते कबाड़ माफिया पर नकेल कसते हुए चोरी गए तारों को बदलकर विद्युत आपूर्ति बहाल नहीं की गई, तो उठने वाली जनाक्रोश की ज्वाला को शांत करना प्रशासन के लिए नामुमकिन साबित होगा।
