सहकारिता क्षेत्र में कड़ा प्रहार,वित्तीय अनियमितताओं के आरोपी सहकारी बैंक सीईओ संतोष यादव निलंबित

भोपाल मुख्यालय की त्वरित कार्रवाई से भ्रष्ट तंत्र में हड़कंप,ईओडब्ल्यू कस रहा शिकंजा, 11 बिंदुओं पर जांच जारी,जगदीश चंद्र उईके को मिला अतिरिक्त प्रभार


Junaid Khan - शहडोल। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित शाहडोल में लंबे समय से चल रही वित्तीय मनमानियों, पद के दुरुपयोग और अवैध वसूली के खेल पर आखिरकार प्रशासन ने चाबुक चला ही दिया। म.प्र. राज्य सहकारी बैंक मर्यादित भोपाल ने कड़ा प्रशासनिक रुख अपनाते हुए गंभीर वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों से घिरे मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) संतोष कुमार यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। 21 जुलाई को जारी निलंबन आदेश के तहत उनका मुख्यालय संभागीय शाखा रीवा निर्धारित किया गया है, वहीं व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए कैडर अधिकारी एवं प्रबंधक (प्रशासन) जगदीश चंद्र उईके को सीईओ का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। शीर्ष प्रबंधन की इस त्वरित व कठोर कार्रवाई से बैंक तंत्र में व्यापत भ्रष्टाचार और कर्मचारियों का शोषण करने वाले तत्वों के पसीने छूट गए हैं। यह पूरी कार्रवाई अधिवक्ता कुणाल ठाकुर की शिकायत पर गठित दो सदस्यीय जांच दल की अंतरिम रिपोर्ट के बाद अमल में लाई गई है। प्राथमिक जांच रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया ही संतोष कुमार यादव को धान उपार्जन वर्ष 2023-24 के खरीदी व्यय में शासन द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक राशि दर्शाने तथा कई गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का दोषी पाया गया है। रिपोर्ट में इस सनसनीखेज तथ्य का भी खुलासा हुआ है कि फील्ड कर्मचारियों से फर्जी व खली चुनी के नाम पर जबरन राशि वसूल कर उनके निजी बैंक खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी। इतना ही नहीं, जिला बैंक के नवनियुक्त समिति प्रबंधकों से भी अवैध वसूली के गंभीर आरोप सिद्ध हो रहे हैं। सहकारिता जैसे जनहितकारी क्षेत्र को अपनी निजी संपत्ति मानकर मनमानी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ प्रशासन का यह सख्त एक्शन अत्यंत सराहनीय है, जिससे आम किसानों और खाताधारकों का भरोसा तंत्र पर पुनः बहाल हुआ है। दूसरी ओर, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) रीवा द्वारा भी निलंबित सीईओ के खिलाफ वित्तीय धोखाधड़ी, आपराधिक कदाचार और अवैध वसूली के मामलों की समानांतर गहन जांच की जा रही है। ईओडब्ल्यू की टीम ने मामले की गहराई तक पहुँचने के लिए 11 मुख्य बिंदुओं पर प्रमाणित दस्तावेज एवं अभिलेख तलब किए हैं। इनमें सोसाइटी प्रबंधकों से कथित वसूली, नौरोजाबाद शाखा में गबन, बुढ़ार व केशवाही समितियों में वित्तीय अनियमितता तथा राजेंद्रग्राम से जुड़े गंभीर मामलों के दस्तावेज शामिल हैं। जिस तरह से किसानों व संस्थाओं के पैसे में हेराफेरी करने का संगठित खेल चलाया जा रहा था, उस पर प्रशासनिक हथौड़ा चलना बेहद जरूरी था। ईओडब्ल्यू और विभागीय जांच पूरी होने के साथ ही इस पूरे भ्रष्टाचार सिंडिकेट में शामिल अन्य चेहरों पर भी एफआईआर और कठोर दंडात्मक कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।

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