फर्जीवाड़े पर कसता शिकंजा,फर्जी जाति प्रमाणपत्र के सहारे वर्षों से नौकरी का खेल,उच्च स्तरीय छानबीन समिति भोपाल करेगी जांच

फर्जीवाड़े पर कसता शिकंजा,फर्जी जाति प्रमाणपत्र के सहारे वर्षों से नौकरी का खेल,उच्च स्तरीय छानबीन समिति भोपाल करेगी जांच


Junaid Khan - शहडोल। शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग में साठगांठ व घोर लापरवाही के बल पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी नौकरियां हथियाने वाले गिरोह और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर अब गाज गिरना तय माना जा रहा है। संकुल अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय केलमनिया में पदस्थ उच्च माध्यमिक शिक्षक जागेश्वर संत के जाति प्रमाण पत्र के संदिग्ध एवं फर्जी होने का मामला अब गरमा गया है। व्हिसल ब्लोअर व आर.टी.आई. कार्यकर्ता नरेंद्र सिंह गहरवार (निवासी वार्ड नं. 04, बुढ़ार) द्वारा प्रस्तुत शपथ पत्र एवं साक्ष्यों के साथ दर्ज कराई गई शिकायत को गंभीरता से लेते हुए शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पचगांव के प्राचार्य ने कड़ी पत्राचार कार्रवाई की है। प्राचार्य कार्यालय के क्रमांक/शिकायत/2026–27/124 (दिनांक 22.07.2026) के माध्यम से सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग शाहडोल को पूरा प्रकरण मय दस्तावेजों के अग्रिम कार्रवाई हेतु प्रेषित कर दिया गया है। वर्षों से चल रहे इस फर्जीवाड़े में अब म.प्र. उच्च स्तरीय छानबीन समिति भोपाल से जांच कराने की अनुशंसा की गई है, जिससे संबंधित शिक्षक सहित पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है। प्रशासनिक लापरवाही और विभागीय शह का आलम यह है कि इतने गंभरी मामलों में शिकायतें केवल फाइलों और सी.एम. हेल्पलाइन के चक्कर काटती रहती हैं। व्हिसल ब्लोअर नरेंद्र सिंह गहरवार द्वारा 15 जुलाई 2026 को प्रस्तुत शिकायती पत्र में स्टाम्प ड्यूटी, शपथ पत्र, स्थानीय निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, नियुक्ति आदेश, कक्षा 10वीं व 12वीं की अंकसूची के साथ-साथ वर्ष 2014-15 की स्थिति में धारित अचल संपत्ति का विशेष विवरण सार्वजनिक कर सनसनी फैला दी गई थी। शिकायतकर्ता द्वारा लगातार आर.टी.आई. आवेदनों और सी.एम. हेल्पलाइन के जरिए विभागीय तंत्र को कटघरे में खड़ा किया जा रहा था। आखिरकार पचगांव प्राचार्य द्वारा इस संवेदनशील मामले में पत्राचार कर म.प्र. उच्च स्तरीय छानबीन समिति भोपाल को जांच सौंपने की सिफारिश किए जाने से अब फर्जी दस्तावेजों के दम पर मलाई काट रहे तत्वों की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। विभागीय उदासीनता और मिलीभगत पर सवाल उठाते हुए बुद्धिजीवियों का कहना है कि यदि शुरुआती दौर में ही दस्तावेजों की गहन पड़ताल की जाती, तो वर्षों तक किसी अयोग्य व्यक्ति को शासकीय सुविधाओं और पद का लाभ नहीं मिलता। पचगांव प्राचार्य द्वारा जारी पत्र (क्र./शिकायत/2026-27/124) के जनजातीय कार्य विभाग शाहडोल कलेक्ट्रेट पहुँचते ही प्रशासनिक महकमे की नींद उड़ गई है। अब गेंद भोपाल स्थित उच्च स्तरीय छानबीन समिति के पाले में है। देखने वाली बात यह होगी कि लगातार उठ रहे आर.टी.आई. आवेदनों और जन-शिकायतों पर पर्दा डालने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है, या फिर हर बार की तरह केवल जांच-जांच का खेल खेला जाता है। बहरहाल, साक्ष्यों के साथ हुए इस खुलासे के बाद आरोपी शिक्षक जागेश्वर संत की शासकीय सेवा पर बर्खास्तगी और कानूनी कार्रवाई की तलवार लटक गई है।

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