सोहागपुर बवाल,निष्पक्ष जांच से टला बड़ा सांप्रदायिक तनाव,पुलिस की सूझबूझ से बची शहर की फिजा

यम्मी स्पाइसी होटल विवाद में दोनों पक्षों पर काउंटर केस दर्ज,एसपी संजय कुमार अग्रवाल की मुस्तैदी से शांत हुआ मामला 


Junaid Khan - शहडोल। शहडोल जिले के सोहागपुर थाना अंतर्गत 'यम्मी स्पाइसी' होटल में रविवार की रात हुआ मामूली विवाद देखते ही देखते खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया था, जिससे शहर में तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए नवागत पुलिस अधीक्षक (SP) संजय कुमार अग्रवाल ने तत्परता दिखाई और बिना किसी दबाव या एकतरफा कार्रवाई के दोनों पक्षों की बात पूरी गंभीरता से सुनी। एसपी की इसी पेशेवर सूझबूझ और निष्पक्ष कार्यशैली के चलते माहौल बिगड़ने से पूरी तरह बच गया और किसी भी प्रकार की सांप्रदायिक या जातिवादी अफवाहों को परवान चढ़ने का मौका नहीं मिला। घटना के बाद से ही कलेक्टर, एसपी, एसडीएम, नगर पालिका सीएमओ समेत प्रशासनिक अमला और चार थानों का पुलिस बल रातभर अस्पताल से लेकर घटनास्थल तक मुस्तैद रहा, जिसके लिए शहर की शांतिप्रिय जनता ने जिला व पुलिस प्रशासन का आभार व्यक्त किया है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने शहर में देर रात तक संचालित होने वाले होटलों, अवैध नशाखोरी और पुलिस गश्त की पोल खोलकर रख दी है, जिस पर अब कड़े कदम उठाने की मांग उठ रही है। प्रकरण के संबंध में प्राप्त पुलिस दस्तावेजों (FIR) के अनुसार, दोनों पक्षों की ओर से गंभीर धाराओं में मामले दर्ज किए गए हैं। एक पक्ष से आकाश पाठक की शिकायत पर सोहागपुर थाने में अपराध क्रमांक 0300/2026 दर्ज किया गया है, जिसमें BNS की धारा 191(2), 296(b), 115(2) और 351(3) के तहत नदीम, नियाजी, तनवीर खान, नावेद, गोलू खान, यसीन खान, मोसीन खान, विक्की खान, रजनी, लाला और लल्लू को आरोपी बनाया गया है। वहीं, दूसरी ओर से दूसरे पक्ष के नियाजउल्ला खान पिता वलीउल्ला खान की शिकायत पर भी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अपराध क्रमांक 0303/2026 पंजीबद्ध किया है। इस दूसरी FIR में मनीषा पाठक, आकाश पाठक, उज्ज्वल सिंह, वतन प्रताप सिंह, शेखर पांडेय, निशांत सिंह और शेरार सिंह को आरोपी बनाया गया है तथा इसमें BNS की धारा 296(b), 115(2), 324(3), 351(3) और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर जांच हेड कांस्टेबल संतोष परिहार को सौंपी गई है। दोनों पक्षों के आमने-सामने आने और घायलों की गंभीर हालत के बीच पुलिस ने जिस तरह बिना किसी बाहरी दबाव के दोनों पक्षों के कानूनी पहलुओं को जांचा, वह सराहनीय है। इस पूरी घटना के बाद जनता और बुद्धिजीवियों के बीच यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर संभागीय मुख्यालय होने के बावजूद शहडोल और सोहागपुर में रात के वक्त नियम-कानूनों की धज्जियां क्यों उड़ाई जा रही हैं? कुछ दिन पूर्व बुढ़ार चौक पर हुए विवाद और हाल ही में 26 जुलाई की शाम गांधी चौक पर दो गुटों के बीच एक बड़ी घटना टलने की चर्चाओं ने यह साबित कर दिया है कि शहर में असमाजिक तत्वों और शराबियों का बोलबाला बढ़ रहा है। यदि पुलिस रात के वक्त होटलों और दुकानों के खुलने के तय समय का सख्ती से पालन कराए, ब्रेथ एनालाइजर से सघन चेकिंग हो, चौतरफा पुलिस गश्त बढ़ाई जाए और बंद पड़े सीसीटीवी कैमरों को तुरंत चालू करवाया जाए, तो ऐसे उपद्रवियों के हौसले खुद-ब-खुद पस्त हो जाएंगे। जनता की यह भी पुरजोर मांग है कि पुलिस और प्रशासन केवल कागजी अभियानों तक सीमित न रहे, बल्कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर सूक्ष्मता से जांच करे ताकि किसी भी ऐसे निर्दोष युवा का भविष्य और नाम खराब न हो जो मौके पर मौजूद ही नहीं था या जिसका इस विवाद से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं था। जो वास्तविक दोषी हैं, चाहे वे किसी भी पक्ष के हों, उन पर कानून का शिकंजा कसा जाए और उन्हें जेल भेजा जाए। साथ ही, शहर के आपसी भाईचारे और सौहार्द को बिगाड़ने वाले सोशल मीडिया के अफवाह तंत्र पर पुलिस का कड़ा पहरा रहना चाहिए। जनता को उम्मीद है कि नवागत एसपी संजय कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में पुलिस महकमा अब शहर में नशाखोरी और देर रात तक नियमों को ताक पर रखने वालों के खिलाफ एक निर्णायक और स्थाई अभियान चलाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की खूनी वारदातों की पुनरावृत्ति न हो सके। यम्मी स्पाइसी होटल मामले को देखकर अब शहर के प्रबुद्ध नागरिकों का यही कहना है कि यदि मौके पर कैमरे और तकनीकी साक्ष्य न होते, तो शायद पुलिस एकतरफा दबाव में आकर किसी निर्दोष का भविष्य तबाह कर देती। इसलिए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग का यह दायित्व है कि वह किसी के भी मौखिक बहकावे या बाहरी दबाव में आए बिना, केवल और केवल ठोस सबूतों और वीडियो फुटेज के आधार पर ही वैधानिक कार्रवाई को आगे बढ़ाए। भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि आबकारी और पुलिस विभाग मिलकर शहर के सभी संदिग्ध ठिकानों और अवैध मयखानों पर ताबड़तोड़ छापे मारे। रात के समय निकलने वाले प्रत्येक संदिग्ध वाहन और व्यक्ति की सघन पूछताछ हो, ताकि असामाजिक तत्वों के दिलों में कानून का खौफ फिर से कायम हो सके और शहडोल की शांत आबोहवा को सुरक्षित रखा जा सके।

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