गांधी चौक में दबंगई से लगा जाम,पुलिस और यातायात प्रबंधन लाचार

मुख्य चौराहे पर आधे घंटे तक सड़क पर गुंडागर्दी, CCTV चालू या बंद? प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल 


Junaid Khan - शहडोल। शहर के सबसे व्यस्त और हृदय स्थल कहे जाने वाले गांधी चौक पर रविवार की रात कानून-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन के दावों की हवा निकल गई। चौराहे के बीचों-बीच एक मनबढ़ कार सवार युवक ने लगभग आधे घंटे तक जमकर तांडव मचाया, सड़क पर आड़ी कार खड़ी कर ट्रैफिक चक्काजाम कर दिया और राहगीरों के साथ अभद्रता की। लेकिन सबसे बड़ा और यक्ष प्रश्न यह खड़ा होता है कि जिस चौराहे से पूरे शहर की सुरक्षा और ट्रैफिक की निगरानी का ढोल पीटा जाता है, उस वक्त खाकी कहाँ सो रही थी? शहर के इतने महत्वपूर्ण और संवेदनशील चौराहे पर न तो कोई यातायात पुलिसकर्मी तैनात दिखा और न ही गश्त कर रही पुलिस की कोई गाड़ी नजर आई। इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि सुरक्षा और चौकसी के तमाम दावे महज कागजी साबित हो रहे हैं। मामला रविवार की रात करीब 9 बजे का है, जब गांधी चौक से गुजर रही एक कार की मामूली टक्कर स्कूटी से हो गई। बस फिर क्या था, कार सवार युवक अपना आपा खो बैठा और उसने गुंडागर्दी का नंगा नाच शुरू कर दिया। दबंग युवक ने न सिर्फ अपनी कार को बीच सड़क पर आड़ी खड़ी कर रास्ता बंद कर दिया, बल्कि स्कूटी सवार के साथ गाली-गलौज और अभद्रता करते हुए जमकर हंगामा काटा। इस अराजकता के कारण देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं और भीषण ट्रैफिक जाम लग गया। एम्बुलेंस से लेकर परिवार के साथ निकले आम राहगीर करीब आधे घंटे तक इस गदर में फंसे रहे, जबकि चौराहे पर मौजूद आम जनता बेबस होकर तमाशा देखती रही। हैरत की बात तो यह है कि शहर के इस मुख्य चौराहे पर लाखों की लागत से अत्याधुनिक CCTV कैमरे लगाए गए हैं, ताकि कंट्रोल रूम से पल-पल की गतिविधि पर नजर रखी जा सके। तो क्या उस वक्त CCTV कैमरे बंद पड़े थे या फिर मॉनिटरिंग रूम में बैठे जिम्मेदार आँखें मूंदकर सो रहे थे? यदि कैमरे चालू थे, तो आधे घंटे तक चले इस भारी ड्रामे और ट्रैफिक जाम पर पुलिस का तत्काल ध्यान क्यों नहीं गया? जब स्थिति बेकाबू हो गई और स्थानीय लोगों ने खुद कोतवाली पुलिस व यातायात विभाग को फोन कर सूचना दी, तब कहीं जाकर पुलिस बल मौके पर पहुँचा और कार हटवाकर मामला शांत कराया। सवाल यह भी उठता है कि बीच सड़क पर शहर को बंधक बनाने वाले ऐसे उपद्रवी और अराजक तत्वों पर केवल गाड़ी हटवाकर मामला रफा-दफा क्यों कर दिया गया? क्या ऐसे दबंगों पर कठोर दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए? पुलिस और यातायात विभाग की इस सुस्ती व अनदेखी से आम जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।

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