यम्मी स्पाइसी होटल में मामूली विवाद बना बवाल, CCTV खंगालने के बजाय पक्षपात का आरोप,घायलों की हालत गंभीर

सोहागपुर में देर रात खूनी संघर्ष से हड़कंप 

आधी रात पहुंचे कलेक्टर SP नागरिकों की अपील, 'CCTV देखकर हो कार्रवाई, बेगुनाहों को न घसीटे पुलिस' 





​Junaid Khan - शहडोल। सोहागपुर स्थित 'यम्मी स्पाइसी' होटल में रविवार देर रात भोजन का पैकेट लेने पहुँचे युवाओं के बीच हुआ मामूली विवाद देखते ही देखते एक भीषण खूनी संघर्ष और सांप्रदायिक तनाव में तब्दील हो गया। घटना की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आधी रात को ही कलेक्टर डॉ. केदार सिंह, पुलिस अधीक्षक संजय अग्रवाल, एसडीएम अमृता गर्ग, नगर पालिका सीएमओ निशांत ठाकुर और जिला पंचायत सीईओ सहित चार थानों का भारी पुलिस बल मौके पर तैनात करना पड़ा। इस खूनी भिड़ंत में दोनों पक्षों के कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें आनन-फानन में जिला चिकित्सालय और श्रीराम अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ कुछ घायलों की हालत अत्यंत नाजुक और चिंताजनक बनी हुई है। पूरे घटनाक्रम ने जिले में प्रशासनिक सतर्कता, नियम-कानून के राज और देर रात तक संचालित होने वाले प्रतिष्ठानों पर पुलिस की ढिलाई को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। ​घटना के पहले पक्ष में दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) के अनुसार, विवेक नगर निवासी शिकायतकर्ता आकाश पाठक (28 वर्ष) अपने दोस्तों वतन सिंह चौहान और अमन सिंह के साथ रात करीब 10:30 बजे होटल में खाना पैक कराने गए थे। आरोप है कि उसी दौरान वहां मौजूद नदीम, नियाजी, तनवीर खान, नावेद, गोलू खान, यसीन खान, मोसीन खान, विक्की खान, रजनी, लाला, लल्लू तथा अन्य लोगों ने अकारण गाली-गलौज करते हुए उन पर लाठी, डंडों और लोहे की रॉड से हमला बोल दिया। इस हमले में आकाश पाठक, उनके साथी अंकुर सिंह गहरवार और वतन सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना की जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंचे आकाश के माता-पिता मनीषा पाठक, पिता प्रवीण पाठक, मामा राजेश पाठक और भाई आयुष पाठक के साथ भी मारपीट की गई तथा उनकी महिंद्रा कार (MP 13 AG 4553) में तोड़फोड़ कर कांच फोड़ दिए गए। सोहागपुर पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191(2), 296(b), 115(2) और 351(3) के तहत मामला पंजीकृत किया है। ​दूसरी ओर, घटना के दूसरे पक्ष चनानिया (उमरिया) निवासी निज़ामुल्लाह ख़ान पिता वलीउल्लाह ख़ान ने पुलिस प्रशासन की एकतरफा कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए थाने में शिकायत दर्ज कराई है। निज़ामुल्लाह ख़ान का कहना है कि वे रात 10 बजे होटल में केवल बिरयानी का पैकेट लेने गए थे। होटल के भीतर भारी भीड़ थी और वे वहां से बाहर निकल ही रहे थे कि मनीषा पाठक ने अचानक 'मेरे बच्चे को किसने मारा' कहते हुए उन्हें कई थप्पड़ जड़ दिए। जब उन्होंने विरोध किया तो उनके साथ मौजूद आकाश पाठक, उज्ज्वल सिंह, करण प्रताप सिंह, शेखर पांडे, निशांत सिंह, शेरार सिंह समेत अन्य 10-12 लोगों ने उन्हें जमीन पर पटककर लात-घूंसों से बेरहमी से पीटा, जिससे उनके दोनों हाथों, सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि वे रात 12 बजे से सुबह 4-5 बजे तक सोहागपुर थाने में न्याय की आस में बैठे रहे, लेकिन पुलिस ने उनकी शिकायत पर कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की और केवल एक ही पक्ष की सह पर कार्रवाई करती नजर आई। ​प्रशासन और स्थानीय पुलिस की इस पक्षपातपूर्ण कार्यशैली से सोहागपुर की जनता में भारी रोष व्याप्त है। स्थानीय नागरिकों और बुद्धिजीवियों का स्पष्ट कहना है कि यदि पुलिस बिना किसी राजनीतिक या सांप्रदायिक दबाव में आए होटल के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज की निष्पक्ष जांच करती, तो सच और झूठ का दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता। लेकिन पुलिस ने जमीनी हकीकत और वीडियो साक्ष्यों को खंगालने के बजाय कथित रूप से एकतरफा पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर मुकदमे थोप दिए। निष्पक्ष नागरिकों का कहना है कि जो भी दोषी हो चाहे वह किसी भी पक्ष का हो उस पर कठोरतम कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए और उसे जेल भेजा जाना चाहिए, लेकिन केवल धर्म या चेहरे देखकर किसी बेगुनाह को घसीटना सरासर अन्याय है। शांतिप्रिय जनता ने सोशल मीडिया पर भ्रामक और नफरत फैलाने वाली खबरों से दूर रहने और शहर के आपसी सौहार्द को बनाए रखने की अपील की है। ​इस पूरी खूनी वारदात ने जिला प्रशासन और आबकारी व पुलिस महकमे के उन खोखले दावों की पोल खोल कर रख दी है, जो रात में नियम-कानूनों की दुहाई देते थकते नहीं। जिला प्रशासन द्वारा तय समय-सीमा के बावजूद शहर में देर रात तक होटल, रेस्टोरेंट और नशे के अड्डे बेधड़क खुले रहते हैं। रात के अंधेरे में परोसे जा रहे नशे और पुलिस की गश्त व्यवस्था की नाकामी के कारण ही ऐसी घातक घटनाएं जन्म ले रही हैं। यदि प्रशासन कागजी नियमों से बाहर निकलकर समय पर दुकानें बंद कराता, शराबियों और उपद्रवियों पर सख्त चेकिंग अभियान चलाता, तो सोहागपुर की सड़कों पर यह तांडव न होता। सवाल यह भी उठ रहा है कि गांधी चौक पर हुई भीषण घटना से भी सबक क्यों नहीं लिया गया? यदि प्रशासनिक अमला इसी तरह आंखें मूंदे बैठा रहा, तो आने वाले दिनों में किसी बड़ी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता। 

गांधी चौक से बुढ़ार चौक तक विवादों का साया,नशा और देर रात तक खुलती दुकानें बनीं फसाद की जड़ 

सोशल मीडिया के अफवाह तंत्र को प्रशासन ने किया ध्वस्त, जनता ने जताया आभार,लेकिन बुनियादी समस्याओं पर सख्त कार्रवाई की दरकार

शहर में लगातार बढ़ रही मारपीट, गुंडागर्दी और विवादों की घटनाओं की तह में अगर कोई सबसे बड़ी वजह सामने आ रही है, तो वह है। अवैध नशाखोरी' और 'नियम-कायदों को ठेंगा दिखाकर देर रात तक खुलने वाली दुकानें'। सूत्रों से मिल रही जानकारी और सोशल मीडिया पर वायरल चर्चाओं के अनुसार, दिनांक 26 जुलाई 2026 की शाम करीब 6:00 से 7:00 बजे के बीच शहर के हृदय स्थल गांधी चौक पर भी दो गुटों के बीच एक बड़ी अनहोनी और खूनी भिड़ंत होते-होते बची। हालांकि, किस बात को लेकर तनाव पनपा था, इसकी आधिकारिक और सटीक वजह सामने नहीं आ सकी है और पुलिस-प्रशासनिक तंत्र पूरे मामले की बारीकी से जांच में जुटा हुआ है। इससे कुछ ही दिनों पूर्व बुढ़ार चौक पर भी सरेराह हुई मारपीट और उपद्रव का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था। इन लगातार होती घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक शहर में रात-दिन नशा करके घूमने वाले असमाजिक तत्वों और देर रात तक खुले रहने वाले होटलों-दुकानों पर स्थाई नकेल नहीं कसी जाएगी, तब तक शांति व्यवस्था पर खतरा मंडराता रहेगा। ​सवाल यह भी उठ रहा है कि जिस संभागीय मुख्यालय में आईजी, कमिश्नर, कलेक्टर और एसपी जैसे शीर्ष अधिकारी खुद मौजूद हों, वहां देर रात तक नियमों की धज्जियां उड़ाकर दुकानें कैसे संचालित हो रही हैं? अगर रात के समय पुलिस गश्त सख्त हो, हर संदिग्ध से पूछताछ हो और ब्रेथ एनालाइजर से नशाखोरी की जांच की जाए, तो अपराधी कभी सड़कों पर तांडव मचाने की हिम्मत नहीं जुटा पाएंगे। सरकार के 'बुलडोजर एक्शन' और सख्त हिदायतों के बावजूद अगर फिर से चोरी, मारपीट और अपराध का माहौल पनप रहा है, तो यह जिला प्रशासन और पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। ​अफ़वाहों पर पुलिस का कड़ा पहरा, जनता ने जताया आभार हालांकि, सोहागपुर कांड के बाद जिस तरह से सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक और जातिवादी जहर घोलने वाले व्हाट्सएप मैसेज तैरने लगे थे, उस पर जिला प्रशासन और पुलिस अमले ने तत्परता दिखाते हुए पानी फेर दिया। रविवार रात से लेकर सोमवार सुबह तक अस्पताल परिसर से लेकर यम्मी स्पाइसी होटल और शहर के संवेदनशील चौराहों पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। खुद वरिष्ठ अधिकारियों ने मोर्चे पर रहकर शहर की फिज़ा को बिगड़ने से बचाया और किसी भी प्रकार के उपद्रव को पनपने नहीं दिया। इसके लिए जिले की शांतिप्रिय जनता ने जिला प्रशासन और पुलिस महकमे की सजगता का सहर्ष धन्यवाद और आभार व्यक्त किया है। साथ ही, जनता ने पुलिस कप्तान और कलेक्टर से यह पुरजोर उम्मीद जताई है कि कागजी अभियानों से इतर जमीनी स्तर पर नशाखोरी के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की जाए और तय समय-सीमा के भीतर शहर की सभी दुकानों को अनिवार्य रूप से बंद कराया जाए, ताकि भविष्य में कोई बड़ी वारदात न घट सके।

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