शहडोल बीएमजीएमसी में 'ओआरएस सप्ताह,दस्त नियंत्रण व बाल स्वास्थ्य सुरक्षा में बनी मिसाल

जन-स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता और चिकित्सकीय दक्षता का उत्कृष्ट उदाहरण


Junaid Khan - शहडोल। बिरसा मुंडा शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय (बीएमजीएमसी) शहडोल के शिशु रोग विभाग द्वारा राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत आयोजित ‘ओआरएस सप्ताह’ न केवल एक जागरूकता अभियान सिद्ध हुआ, बल्कि इसने क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं में संवेदनशीलता और प्रशासनिक प्रतिबद्धता की एक नई मिसाल पेश की है। दस्त (डायरिया) से होने वाली बाल मृत्यु दर पर अंकुश लगाने और कुपोषण की रोकथाम के उद्देश्य से शुरू किया गया यह अभियान चिकित्सा महाविद्यालय के कुशल नेतृत्व, समर्पित डॉक्टरों और उत्साही स्टाफ के अथक प्रयासों का प्रत्यक्ष प्रमाण है। दूरदराज के अंचलों से आने वाले आमजन को स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए बीएमजीएमसी प्रबंधन द्वारा किया गया यह प्रयास अत्यंत सराहनीय और अनुकरणीय है। कार्यक्रम का गरिमामय शुभारंभ महाविद्यालय के अधिष्ठाता (डीन) डॉ. गिरीश रामटेके की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। अपने दूरदर्शी संबोधन में डॉ. रामटेके ने कहा कि दस्त के दौरान शरीर में पानी और आवश्यक लवणों की कमी को दूर करने में ओआरएस (ORS) सबसे सुलभ, सस्ता और प्रभावी जीवनरक्षक उपाय है। उन्होंने आम जनमानस और अभिभावकों से अपील की कि वे अपने घरों में ओआरएस का स्टॉक हमेशा सुरक्षित रखें और आपात स्थिति में बिना विलंब इसका उपयोग प्रारंभ करें। डीन के कुशल मार्गदर्शन में संस्थान जिस तरह से जन-स्वास्थ्य की प्राथमिकताओं को जमीनी स्तर पर उतार रहा है, वह क्षेत्र के लिए अत्यंत गर्व का विषय है।

चिकित्सा महाविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्थाओं और जन-सेवा को नई दिशा दे रहे अस्पताल अधीक्षक डॉ. नरेंद्र सिंह ने ओआरएस की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह संजीवनी घोल केवल बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि वयस्कों एवं बुजुर्गों के लिए भी समान रूप से जीवनरक्षक साबित होता है। जन-जागरूकता को रुचिकर और प्रभावी बनाने के लिए एमबीबीएस छात्र-छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक, आकर्षक पोस्टरों और रचनात्मक गतिविधियों के जरिए दस्त से बचाव व ओआरएस के सही उपयोग का जीवंत संदेश दिया। भावी डॉक्टरों की यह सक्रियता और उनका सामाजिक सरोकार अस्पताल उप अधीक्षक डॉ. विक्रांत कबीरपंथी एवं पूरी विशेषज्ञ टीम के कुशल संयोजन को दर्शाती है। कार्यक्रम के दौरान शिशु रोग विशेषज्ञों द्वारा ओआरएस घोल तैयार करने तथा उसे पिलाने का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया, जिससे आमजनों की भ्रांतियां दूर हुईं। साथ ही, उपस्थित नागरिकों को नि:शुल्क ओआरएस पैकेट एवं जिंक की गोलियों का वितरण भी किया गया। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि दस्त की स्थिति में पर्याप्त मात्रा में ओआरएस घोल, जिंक की खुराक, निरंतर स्तनपान और स्वच्छ पेयजल अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ ही, व्यक्तिगत स्वच्छता, नियमित रूप से हाथ धोने की आदत और सुरक्षित भोजन को अपनाकर इस बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सकता है।

चिकित्सकों ने अभिभावकों को सतर्क करते हुए अपील की कि यदि बच्चों में बार-बार दस्त, लगातार उल्टी अथवा निर्जलीकरण (पानी की कमी) के लक्षण दिखें, तो बिना समय गंवाए तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या बीएमजीएमसी शहडोल के शिशु रोग विभाग में संपर्क करें। अस्पताल उप अधीक्षक डॉ. विक्रांत कबीरपंथी सहित समस्त चिकित्सकों, रेजिडेंट डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की अनुशासित मौजूदगी और निस्वार्थ सेवा भावना ने यह साबित कर दिया है कि बीएमजीएमसी शहडोल संभाग में उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं का एक सशक्त स्तंभ बनकर उभर रहा है।

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