खाकी की लापरवाही से बेगुनाह ने काटे 11 दिन जेल,अदालत से मिली जमानत तो खुला खाकी का फर्जीवाड़ा

जनसुनवाई से एसपी दफ्तर तक भटकती रही लाचार पत्नी, सोशल मीडिया पर फूटा जनता का गुस्सा

यम्मी स्पाइसी होटल विवाद मामला,कोरे कागज पर दस्तखत कराकर गरीब चरवाहे को बना दिया मुजरिम,पीड़ित परिवार ने दी चेतावनी 

हाईकोर्ट तक लड़ेंगे सम्मान की लड़ाई,खाकी को भरना होगा पाई-पाई का हर्जाना 


Junaid Khan - शहडोल। जिले के सोहागपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत पाली रोड स्थित 'यम्मी स्पाइसी होटल' के पास बीते दिनों हुए विवाद में पुलिसिया कार्यप्रणाली और प्रशासनिक घोर लापरवाही का एक ऐसा संवेदनहीन चेहरा उजागर हुआ है, जिसने कानून व्यवस्था, स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महज 'लल्लू' नाम के असमंजस का फायदा उठाकर सोहागपुर पुलिस ने पठानी बस्ती (वार्ड क्रमांक 03) के एक अत्यंत गरीब, सीधे-सादे एवं बेगुनाह व्यक्ति हामिद खान उर्फ लल्लू पिता स्व. बरकत खान को जबरन सलाखों के पीछे धकेल दिया। पीड़ित हामिद, जो बकरा-बकरी पालकर और चारा चराकर किसी तरह अपने परिवार का गुजर-बसर करता है, उसे 11 दिनों तक बिना किसी ठोस सबूत के जेल की नारकीय यातनाएं झेलनी पड़ीं। आखिरकार सिविल कोर्ट से मिली जमानत ने पुलिस के फर्जीवाड़े की पोल खोलकर रख दी है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद जहां एक ओर जनता का गुस्सा सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक खाकी और सरकार के खिलाफ खुलकर फूट रहा है, वहीं दूसरी ओर निष्पक्ष न्यायपालिका (न्यायालय) के इस फैसले की हर तरफ जमकर सराहना हो रही है। इस पूरे मामले में प्रशासनिक उदासीनता और जनप्रतिनिधियों की नाकामी की इंतहा तब देखने को मिली जब पीड़ित की पत्नी परवीन बेगम अपने बेगुनाह पति को बचाने के लिए दर-दर की ठोकरें खाती रही। परवीन बेगम ने दिनांक 10 अगस्त 2026 को पुलिस महानिरीक्षक (IG) शहडोल और पुलिस अधीक्षक (SP) शहडोल को व्यक्तिगत रूप से शिकायत पत्र सौंपा। इसके बाद 11 अगस्त 2026 को कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई' में भी उपस्थित होकर न्याय की गुहार लगाई। लिखित आवेदनों में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि घटना के दिन यानी 26 जुलाई 2026 की शाम 7 बजे से हामिद खान घर पर ही थे और सो रहे थे। लेकिन सोहागपुर पुलिस ने 28 जुलाई को उन्हें सिर्फ 'कथन लेख' कराने के नाम पर थाने बुलवाया और धोखे से कोरे कागजों पर दस्तखत करवा लिए। आश्वासन दिया गया कि "आप घटनास्थल पर नहीं थे, लल्लू कोई और व्यक्ति है, आपके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी"। परंतु, जिम्मेदार अधिकारियों और नेताओं के संरक्षण में पनप रही इस लचर व्यवस्था ने फरियाद सुनना तो दूर, निष्पक्ष जांच तक कराना मुनासिब नहीं समझा। नतीजा यह हुआ कि एक निर्दोष नागरिक को जेल भेज दिया गया। न्यायालय से जमानत मिलने के बाद पीड़ित परिवार के तेवर अब और उग्र हो चुके हैं। हामिद खान की पत्नी परवीन बेगम ने पुलिस प्रशासन और नेताओं को सीधे आड़े हाथों लेते हुए खुला चैलेंज दिया है। परवीन बेगम का साफ तौर पर कहना है कि, "अगर मेरे पति वाकई में उस झगड़े में शामिल थे, तो पुलिस के पास जो घटनास्थल और आसपास के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज जब्त हैं, उनमें सबूत दिखाए! घटना वाले दिन तो छोड़िए, अगर घटना के दो दिन पहले भी मेरे पति वहां आसपास सीसीटीवी में दिख जाएं, तो बोलिएगा। यदि वे वास्तव में उस झगड़े में शामिल निकलें, तो मैं खुद कहती हूँ कि न्यायालय और पुलिस उन्हें फांसी की सजा दे दे! लेकिन अगर वे बेगुनाह हैं—जो कि वे हैं—तो मैं इस लड़ाई को हाईकोर्ट तक लेकर जाऊंगी। मेरे पति की सामाजिक प्रतिष्ठा, इज्जत और जेल में काटे गए 11 दिनों के मानसिक व शारीरिक जुल्म का हर्जाना पुलिस को भरना पड़ेगा। जिस तरह हमें सिविल कोर्ट से जमानत और न्याय मिला है, उसी तरह हाईकोर्ट से भी पूरा न्याय मिलेगा। मैं किसी भी दोषी अधिकारी को छोड़ने वाली नहीं हूँ!" इस खौफनाक और संवेदनहीन पुलिसिया कार्रवाई ने आम जनता के दिल में भारी आक्रोश भर दिया है। सोशल मीडिया पर आम नागरिकों, युवाओं और प्रबुद्ध वर्ग ने पुलिस प्रशासन, स्थानीय विधायक, सांसद और सरकार के मंत्रियों के खिलाफ तीखे सवाल दागे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि जब शहर में अपराध और असली मुजरिम बेखौफ घूम रहे हैं, तब पुलिस केवल अपनी केस डायरी भरने और वाहवाही लूटने के लिए किसी गरीब बकरा-बकरी पालने वाले बेगुनाह को कैसे बलि का बकरा बना सकती है? जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी अपनी जनसुनवाई का ढिंढोरा तो पीटते हैं, लेकिन जब धरातल पर न्याय देने की बात आती है तो उनके कान पर जूं तक नहीं रेंगती। जनता का कहना है कि अगर देश में न्यायालय और संविधान की चौखट न होती, तो ऐसे तानाशाह पुलिसकर्मी किसी भी गरीब का जीवन तबाह कर देते। फिलहाल, न्यायालय के इस फैसले ने आम जनता का न्यायपालिका के प्रति विश्वास और अटूट कर दिया है, जबकि पुलिस प्रशासन और शासन-सत्ता के लिए यह मामला एक करारा तमाचा साबित हो रहा है।

फर्जीवाड़े का घटनाक्रम 

26 जुलाई 2026,यम्मी स्पाइसी होटल के पास विवाद, 11 नामजद लोगों में अस्पष्ट 'लल्लू' नाम शामिल।

28 जुलाई 2026,सोहागपुर थाने में कोरे कागज पर दस्तखत कराकर दिया गया झूठा आश्वासन। 

 10 अगस्त 2026,आईजी (IG) एवं एसपी (SP) शहडोल कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज।

11 अगस्त 2026,कलेक्टर कार्यालय जनसुनवाई में पावती (रसीद) के साथ गुहार, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

11 दिन बाद,सिविल कोर्ट से जमानत मिलने पर उजागर हुआ पुलिसिया फर्जीवाड़ा, अब हाईकोर्ट जाने की तैयारी।

Previous Post Next Post