न्याय की बड़ी जीत,दोहरे हत्याकांड के आरोपियों को अंतिम सांस तक उम्रकैद

पुलिस,अभियोजन और मुस्तैद जनता के प्रयास से कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला, आरोपियों को 10-10 हजार का जुर्माना


Junaid Khan - शहडोल। मध्य प्रदेश में कानून व्यवस्था की साख और जनता का अदालत पर विश्वास उस वक्त और मजबूत हो गया, जब माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, शहडोल के न्यायालय ने एक संवेदनशील और सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड में सख्त रुख अपनाते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अगस्त 2026 में जिले के इस चिन्हित जघन्य प्रकरण में त्वरित सुनवाई करते हुए न्यायालय ने दोनों मुख्य आरोपियों को भादंसं की धारा 302/34 के तहत दोषी पाया और उन्हें आजीवन कारावास तथा 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा से दंडित किया। मध्य प्रदेश सरकार की अपराधों के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' नीति, पुलिस प्रशासन की साक्ष्य-आधारित मुस्तैद विवेचना और अभियोजन पक्ष की दमदार पैरवी के संयुक्त प्रयासों का ही नतीजा है कि जघन्य वारदात को अंजाम देने वाले शातिर अपराधी अब सलाखों के पीछे अपनी जिंदगी काटेंगे।

रंजिश,खूनी हमला और मुस्तैद गवाह,जानिए क्या था पूरा मामला

घटना की जड़ें 12 नवंबर 2023 की खौफनाक रात से जुड़ी हैं। रात करीब 11:00 बजे आरोपी सचिन मोझरकर का विवाद मृतक सीनू और मृतक रिजवान के साथ हुआ था। उस समय फरियादी सीबू लक्ष्मणन और अन्य सतर्क नागरिकों ने सूझबूझ दिखाते हुए बीच-बचाव कर मामले को शांत करा दिया था। लेकिन आपराधिक मानसिकता से ग्रसित आरोपी सचिन ने कुछ ही देर बाद रिजवान को फोन पर गाली-गलौज कर जान से मारने की धमकी दी और चांदनी चौक पहुंचने की चुनौती दी। जैसे ही फरियादी को इस बात की भनक लगी, वह अपने दोस्तों और मृतक के भाई के साथ मौके पर पहुंचा। वहां आरोपी सचिन मोझरकर और चंद्रशेखर मोझरकर (पिता प्रफुल्ल राय मोझरकर, निवासी वार्ड नं. 23/30 मतनी टोला) मृतकों से उलझ रहे थे। देखते ही देखते शेखर घर के भीतर से धारदार चाकू और सचिन खंडहर से लोहे का भारी एंगल निकाल लाया। चंद्रशेखर ने सीनू पर चाकू से सीने व पीठ पर ताबड़तोड़ वार किए, जबकि सचिन और शेखर ने रिजवान के सिर व गर्दन पर लोहे के एंगल व चाकू से प्राणघातक हमला कर दिया। इस नृशंस हमले में रिजवान ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि सीनू को अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

पुलिस-अभियोजन का कसता शिकंजा और जागरूक जनता का सहयोग 

इस खौफनाक दोहरे हत्याकांड के बाद शहडोल पुलिस प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे तत्काल सनसनीखेज एवं जघन्य अपराधों की श्रेणी में चिन्हित किया। थाना कोतवाली पुलिस (अपराध क्रमांक 776/23) ने वैज्ञानिक साक्ष्यों को जुटाते हुए केस की ऐसी मजबूत केस डायरी तैयार की कि आरोपियों के बचने का कोई रास्ता नहीं बचा। इसमें स्थानीय जनता और प्रत्यक्षदर्शियों का योगदान अनुकरणीय रहा, जिन्होंने बिना डरे और बिना दबाव में आए न्यायालय के समक्ष सच का साथ दिया। न्याय की इस लड़ाई में अभियोजन पक्ष का समर्पण भी मिसाल बना। विशेष लोक अभियोजक श्रीमती कविता कैथवास ने पूरी निष्ठा से प्रत्येक अभियोजन साक्षी का परीक्षण कराया, वहीं उप निदेशक अभियोजन श्री कैलाश पटेल ने अंतिम तर्कों के दौरान कानून की ऐसी मजबूत दीवार खड़ी कर दी कि बचाव पक्ष के तमाम दावे ध्वस्त हो गए।

न्यायालय का कड़ा संदेश,समाज में न्याय का परचम बुलंद

माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने प्रकरण की गंभीरता, पुलिस की पुख्ता विवेचना, अभियोजन की अचूक दलीलों और जनता की गवाही को आधार बनाते हुए दोनों आरोपियों—सचिन मोझरकर और चंद्रशेखर मोझरकर—को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट के इस फैसले ने साबित कर दिया है कि मध्य प्रदेश में कानून का राज सर्वोपरि है। चाहे अपराधी कितना भी बेखौफ क्यों न हो, पुलिस की त्वरित जांच, अभियोजन की सटीक पैरवी और न्यायपालिका के निष्पक्ष निर्णय के आगे उसकी हर चालाकी नाकाम हो जाती है। शहडोल के इस ऐतिहासिक निर्णय की सराहना पूरे जिले में हो रही है, जिसने आमजन में सुरक्षा का भाव मजबूत किया है और अपराधियों के दिलों में कानून का खौफ पैदा कर दिया है।

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