सरकारी दावों की हवा निकालता जिला अस्पताल का जन औषधि केंद्र,जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही से योजना पर लग रहा ग्रहण रोज खाली हाथ लौट रहे मरीज
Junaid Khan - शहडोल। आम जनता को सस्ती और सुलभ दवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई 'प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र' योजना शहडोल जिले में जिम्मेदार अधिकारियों की घोर उपेक्षा और प्रशासनिक सुस्ती की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। जिला अस्पताल परिसर में संचालित जन औषधि केंद्र में बीते कई दिनों से अति-आवश्यक दवाओं का टोटा बना हुआ है, जिसके कारण दूर-दराज के ग्रामीण अंचलों से इलाज कराने आने वाले असहाय मरीज व उनके परिजन रोजाना दर-दर भटकने को मजबूर हैं। प्रतिदिन दर्जनों मरीज दवाओं की आस में केंद्र पहुंचते हैं, लेकिन स्टॉक खत्म होने के कारण उन्हें खाली हाथ या महंगे मेडिकल स्टोरों का रुख करना पड़ रहा है। स्थानीय जनमानस और प्रबुद्ध नागरिकों ने जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के इस ढुलमुल रवैये पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है, वहीं आम जनता के अधिकारों के लिए उठ रही आवाजों को क्षेत्र में काफी सराहा जा रहा है।
साहब के हस्ताक्षर का इंतजार और इंदौर में अटकी सप्लाई,बीएमओ, सीएमएचओ व रेडक्रॉस प्रबंधन की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि केंद्र का संचालन भारतीय रेडक्रॉस सोसाइटी द्वारा किए जाने के बावजूद व्यवस्थाएं पूरी तरह पटरी से उतर चुकी हैं। बताया जा रहा है कि इंदौर से दवाओं का नया स्टॉक मंगवाने के लिए डिमांड चालान तैयार पड़ा है, लेकिन जिम्मेदार आला अधिकारी के हस्ताक्षर बीते एक सप्ताह से नहीं होने के कारण इस मांग पत्र को इंदौर सेंटर तक भेजा ही नहीं जा सका है। यह स्थिति स्वास्थ्य विभाग, ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सीधे प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। जब इस अव्यवस्था पर सवाल पूछे गए तो जिम्मेदारों ने अपनी प्रशासनिक चूक स्वीकार करने के बजाय मामले से अनभिज्ञता जताते हुए अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश की। सतत् प्रक्रिया होने के बावजूद समय पर चालान स्वीकृत न करना साफ दर्शाता है कि आम गरीब मरीजों की सहूलियत से स्वास्थ्य महकमे के नुमाइंदों को कोई सरोकार नहीं रह गया है।
गलत चयन से छुपाया गया केंद्र,इमरजेंसी में मरीज परेशान,क्या संज्ञान लेगा शासन व जिला प्रशासन?
दवाओं के अभाव के साथ-साथ जन औषधि केंद्रों के स्थान चयन को लेकर भी गंभीर प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है। जिला अस्पताल में इस केंद्र को सीएमएचओ कार्यालय जाने वाले मार्ग पर पीछे की तरफ खोल दिया गया है, जहाँ आम मरीजों की नजर तक नहीं पड़ती। ठीक ऐसे ही हालात मेडिकल कॉलेज में हैं, जहाँ इसे मुख्य परिसर के बजाय इमरजेंसी वार्ड के भीतर बना दिया गया है। केंद्रों को सामने और सुलभ स्थान पर संचालित न किए जाने से प्रधानमंत्री की इस महत्वाकांक्षी योजना का सीधा लाभ जनता तक नहीं पहुँच पा रहा है। जागरूक नागरिकों का कहना है कि जहां एक तरफ शासन स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, वहीं शहडोल में स्थानीय स्वास्थ्य अमले और जिला प्रशासन की सुस्ती के कारण गरीबों की जेब पर डाका डाला जा रहा है। अब देखना यह होगा कि इस जनहित के मुद्दे के उजागर होने के बाद शासन-प्रशासन हरकत में आता है या फिर जिम्मेदार अधिकारी इसी तरह अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते रहेंगे।
