नेताओं की शह, पुलिस और जिम्मेदार अफसरों की चुप्पी पर उठीं उंगलियां, बेबस नागरिक मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसने को मजबूर
Junaid Khan - शहडोल। जिला मुख्यालय और उसके आसपास के क्षेत्रों में अवैध प्लॉटिंग का काला कारोबार जिस तेजी से पैर पसार रहा है, उसने प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर से सटे विशिष्ट ग्राम जमुई में ढाबा के पीछे अवैध प्लॉटिंग के लिए सीमेंट के खंभे गाड़ दिए गए हैं, जो जिला मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित भू-माफियाओं की खुलेआम मनमानी और दुस्साहस की गवाही दे रहे हैं। स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों, नेताओं, विधायकों, सांसदों और पुलिस-प्रशासनिक मशीनरी की संदिग्ध चुप्पी के चलते भू-माफिया पूरी तरह बेखौफ होकर यह धंधा चला रहे हैं। आम जनता अपनी गाढ़ी कमाई और जीवनभर की संचित पूंजी लगाकर आशियाने का सपना तो देख लेती है, लेकिन बाद में सड़क, बिजली, पानी, पार्क और सामुदायिक भवन जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में दर-दर भटकने को मजबूर होती है। इसके बावजूद, अपने हक के लिए आवाज उठाने वाली जागरूक जनता के इस संघर्ष को दरकिनार कर अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
सोहागपुर एसडीएम कार्यालय का रवैया इस पूरे मामले में सबसे अधिक ढुलमुल और लचर दिखाई दे रहा है। वर्तमान में अवैध प्लॉटिंग से जुड़े किसी भी नए मामले में कोई प्रभावी कार्रवाई प्रक्रियाधीन नहीं है। आश्चर्य की बात यह है कि जब हाल ही में इस संबंध में जानकारी मांगी गई, तो अधिकारियों ने वही पुराना डेटा थमा दिया जो तत्कालीन एसडीएम अरविंद शाह के कार्यकाल के दौरान पंजीकृत हुआ था। पंचगांव रोड पर दर्ज प्रकरणों में आज तक कोई ठोस दंडात्मक कदम नहीं उठाया गया है। यही स्थिति कमिश्नर के निर्देशों पर बरुका में हुई अवैध प्लॉटिंग की भी है, जहाँ जांच की फाइलें केवल नोटिस जारी करने और जवाब मंगाने की कागजी खानापूर्ति तक सिमट कर रह गई हैं। हाल ही में सोहागपुर जनपद के उपाध्यक्ष शक्ति सिंह चंदेल द्वारा कोटमा में अवैध प्लॉटिंग को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिससे स्पष्ट होता है कि नियमों को ताक पर रखकर यह खेल लगातार जारी है। इसके बावजूद शासन-प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की बुलडोजर या सख्त वैधानिक कार्रवाई का न होना इस बात की ओर इशारा करता है कि भू-माफिया को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। यदि समय रहते इस गठजोड़ पर अंकुश नहीं लगाया गया और जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय नहीं की गई, तो धोखाधड़ी का शिकार हो रही आम जनता का सब्र जल्द ही उग्र आंदोलन का रूप ले सकता है।
