खबर का असर-शहडोल में गौवंश के साथ बर्बरता पर जागा प्रशासन,सीएमओ ने उपयंत्री को थमाया नोटिस

जमुई में कचरा गाड़ी से बेजुबान शव फेंकने का वीडियो वायरल होने पर मंचा था हड़कंप,खबर के बाद हरकत में आई नगर पालिका, 24 घंटे में मांगा जवाब 


Junaid Khan - शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में बेजुबान मवेशियों के शवों के साथ हुई प्रशासनिक बर्बरता और घोर लापरवाही के मामले में जनआक्रोश के बाद आखिरकार जिला प्रशासन और नगर पालिका परिषद की नींद टूट गई है। 8 सितंबर 2026 को जमुई स्थित बघेल ढाबे के समीप कचरा डंपिंग क्षेत्र से एक शर्मनाक तस्वीर सामने आई थी, जहां नगर पालिका की मैजिक कचरा गाड़ी द्वारा मृत गौवंश और नवजात बच्चे के शव को शहर की नालियों से निकले सड़े-गले कचरे की तरह सड़क पर पलट दिया गया था। इस अमानवीय कृत्य का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हुआ और डिजिटल मीडिया पोर्टल 'JK न्यूज़' तथा प्रमुख हिंदी दैनिक 'प्रदेश सत्ता' में खबर प्रमुखता से प्रकाशित की गई। मीडिया में खबर के आते ही आम जनता,धर्मप्रेमियों और प्रबुद्ध नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा, जिसके बाद बैकफुट पर आए प्रशासनिक महकमे में अफरा-तफरी मच गई और जिम्मेदार अधिकारियों को अपनी सोती हुई नींद से जागना पड़ा। नगर पालिका शहडोल के स्वच्छता तंत्र की इस पोल खोलती रिपोर्ट के बाद मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) श्रीमती आशा जितेंद्र भंडारी ने जमुई स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि कचरा लेकर आने वाले वाहनों द्वारा व्यवस्थित निस्तारण के बजाय ट्रेंचिंग ग्राउंड की सड़क पर ही खुलेआम कचरा और गंदगी उकेली जा रही थी, जिससे रास्ते अवरुद्ध हो रहे थे और पूरे क्षेत्र में संवेदनहीनता का माहौल बना हुआ था। मामले की गंभीरता, मीडिया में आई खबरों और उठते जनाक्रोश को देखते हुए सीएमओ ने तत्काल कड़ा रुख अपनाया और नगर पालिका परिषद के संबंधित उपयंत्री (सब-इंजीनियर) श्री पुनित त्रिपाठी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। उपयंत्री को 24 घंटे के भीतर लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं तथा स्पष्ट किया गया है कि दायित्वों के निर्वहन में पाई गई इस गंभीर लापरवाही पर व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करते हुए सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह पूरी कार्रवाई मीडिया की सजगता का ही परिणाम है कि जिसने तंत्र की संवेदनहीनता को कटघरे में खड़ा किया। हालांकि, स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सिर्फ कारण बताओ नोटिस जारी कर देना ही इस जघन्य कृत्य का न्याय नहीं है। जिस प्रकार भगवान तुल्य माने जाने वाले बेजुबान जीवों के शवों को कचरे की तरह पटका गया और दूसरी ओर जीवित बेसहारा मवेशी नालों का जहरीला और पॉलिथीन युक्त कचरा खाने को मजबूर दिखे, वह नगर पालिका के करोड़ों के स्वच्छता बजट और दावों पर सीधा सवाल उठाता है। लाखों रुपये के संसाधन, आधुनिक जेसीबी मशीनें और विशाल स्टाफ होने के बावजूद मृत गौवंश का सम्मानजनक तरीके से गड्ढा खुदवाकर अंतिम संस्कार न कराना अक्षम्य अपराध की श्रेणी में आता है। सीएमओ द्वारा की गई इस त्वरित जांच और नोटिस की कार्रवाई से यह संदेश जरूर गया है कि लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं होगी, लेकिन जनता अभी भी मामले में शामिल मैजिक वाहन चालक, सफाई ठेकेदार, स्वच्छता निरीक्षक और लापरवाह सुपरवाइजरों पर पशु क्रूरता अधिनियम के तहत कठोरतम दंडात्मक कदम की उम्मीद कर रही है। प्रशासन की इस हलचल से यह साफ हो गया है कि यदि मीडिया का दबाव और जनता की आवाज बुलंद रहे तो जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते। नगर पालिका सीएमओ द्वारा किए गए इस त्वरित निरीक्षण और सख्त रवैये का स्वागत करते हुए क्षेत्रवासियों ने उम्मीद जताई है कि अब ट्रेंचिंग ग्राउंड से लेकर शहर के हर वार्ड में मृत मवेशियों के निस्तारण की एक पारदर्शी और सम्मानजनक व्यवस्था लागू होगी। शासन-प्रशासन के इस कदम से व्यवस्था में सुधार की आस तो जगी है, परंतु देखना यह होगा कि 24 घंटे के स्पष्टीकरण के बाद नगर पालिका तंत्र दोषियों पर क्या नजीर पेश करने वाली कार्रवाई करता है या मामला केवल कागजी औपचारिकताओं में सिमट कर रह जाता है।

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