अवैध कब्जों से लेकर बिजली-मुआवजे की मखमली फाइलों पर 'कड़ा प्रहार',अब तो सुधर जाओ साहब
Junaid Khan - शहडोल। जिले में कुंडली मारकर बैठे भ्रष्ट तंत्र, अकर्मण्य बिजली कंपनी के सिपहसालारों और जमीनों पर गिद्ध दृष्टि गड़ाए भू-माफियाओं के खिलाफ जनता ने अब सीधे शीर्ष दफ्तरों की घेराबंदी शुरू कर दी है। हमारे अखबार द्वारा लगातार जनहित के मुद्दों को पूरी प्रखरता से उठाए जाने का ही यह व्यापक असर है कि प्रशासनिक महकमे में मचे हड़कंप के बीच मंगलवार को कमिश्नर और कलेक्टर कार्यालय में न्याय की आस लिए पीड़ितों का रेला उमड़ पड़ा। लो-वोल्टेज और फुके हुए ट्रांसफार्मर की अंतहीन प्रताड़ना से त्रस्त दुलादर गांव के जागरूक उपभोक्ता रामप्रकाश शुक्ला ने जब कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर विद्युत विभाग की तानाशाही की कलई खोली, तो संभागायुक्त सुरभि गुप्ता ने बिजली कंपनी के लापरवाह अमले को आड़े हाथों लेते हुए त्वरित सुधार के सख्त निर्देश जारी किए। वहीं दूसरी ओर, ग्राम बंधवारखुर्द में धड़ल्ले से चल रहे अवैध भूमि के खेल और भू-माफियाओं की साठगांठ की जांच करवाने पहुंची धनपुरी निवासी रश्मि नामदेव के आवेदन ने राजस्व अमले की कार्यप्रणाली को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया, जिस पर कमिश्नर ने तत्काल निष्पक्ष और कड़ी जांच के आदेश देकर यह साफ कर दिया कि भू-माफियाओं के दिन अब लद चुके हैं। जनता के इस आक्रोश और हमारे समाचार पत्र की धारदार खबरों के दबाव का असर कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में भी साफ देखने को मिला, जहां कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने एक-एक कर दूरस्थ क्षेत्रों से आए ग्रामीणों की शिकायतों को पूरी संजीदगी से सुना और ढीले पड़ चुके तंत्र को कसने के लिए अधिकारियों को ऑन-स्पॉट अल्टीमेटम दिया। अनुकंपा नियुक्ति की आस में भटक रही बुढ़ार निवासी निर्मला चर्मकार को रोजगार दिलाने, ग्राम बरदौहा के गरीब घनश्याम बैगा को पीएम आवास की अटकी हुई राशि अविलंब जारी कराने, और ग्राम जैतपुर निवासी ओमप्रकाश मिश्रा की रीढ़विहीन सीमांकन की कार्रवाई को निरस्त कराने जैसे मामलों पर प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा। यही नहीं, ग्राम कुदरी के पीड़ित प्रशांत सिंह ने जब अधिग्रहीत भूमि का मुआवजा राशि न मिलने का दर्द बयां किया, तो कलेक्टर ने संबंधित विभागों की फाइलों में दबे भ्रष्टाचार को खंगालने के निर्देश दिए। इसके साथ ही शहडोल के बईलू पनिका का आधार कार्ड बनवाने, धनपुरी की रूबी सिंह को धनपुरी अस्पताल में अति-आवश्यक डायलिसिस की सुविधा सुनिश्चित कराने, तथा ग्राम खांड निवासी संपत चर्मकार के घर नया विद्युत कनेक्शन देने के आवेदनों पर त्वरित मुहर लगाकर कलेक्टर ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि अब फाइलों को दबाने वाले बख्शे नहीं जाएंगे। बहरहाल, प्रशासनिक अधिकारियों के ये कड़े तेवर यदि धरातल पर तब्दील नहीं हुए, तो यह आक्रोश आने वाले दिनों में और उग्र रूप अख्तियार करेगा।
खोखली व्यवस्था को आईना,कब तक आश्वासनों के 'लॉलीपॉप' पर जिएगी जनता?
जनसुनवाई में उमड़ने वाली यह भीड़ इस बात का सरेआम प्रमाण है कि मैदानी स्तर पर बैठे बाबू और मैदानी अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को पूरी तरह भूल चुके हैं। अगर दुलादर में लो-वोल्टेज की समस्या और बंधवारखुर्द में अवैध भूमि की शिकायत के लिए जनता को कमिश्नर-कलेक्टर तक दौड़ लगानी पड़ रही है, तो निचले स्तर पर बैठे जिम्मेदार अधिकारी दफ्तरों में बैठकर क्या कर रहे हैं? यह सीधे तौर पर उन सफेदपोशों और भ्रष्ट तत्वों को खुली चुनौती है जो जनता के हक पर डाका डाल रहे हैं। हमारे अखबार की पैनी नजर प्रशासन की हर कछुआ चाल और इन अवैध काम करने वालों के गठजोड़ पर बनी रहेगी।
