प्रबंधन की घोर लापरवाही, विचारपुर ज्ञानोदय आवासीय विद्यालय में एक साथ 17 छात्र बीमार,मौसमी बीमारी' का बहाना बनाकर सच छिपाने में जुटा प्रशासन

प्रबंधन की घोर लापरवाही, विचारपुर ज्ञानोदय आवासीय विद्यालय में एक साथ 17 छात्र बीमार,मौसमी बीमारी' का बहाना बनाकर सच छिपाने में जुटा प्रशासन 


Junaid Khan - शहडोल। जिले के विचारपुर स्थित शासकीय आवासीय ज्ञानोदय विद्यालय में सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के दावों की उस वक्त हवा निकल गई, जब एक साथ 17 छात्र गंभीर रूप से बीमार हो गए। विद्यालय परिसर में अचानक कई छात्रों को तेज बुखार, उल्टी और भारी कमजोरी की शिकायत होने के बाद पूरे महकमे में हड़कंप मच गया। इस पूरे मामले में सबसे शर्मनाक और चौंकाने वाली बात यह रही कि जब मासूम बच्चे दर्द और तड़प से बेहाल थे, तब हॉस्टल प्रबंधन या कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर सुध लेने वाला नहीं था। शुक्रवार की सुबह विद्यालय के एक सजग चौकीदार ने तत्परता दिखाते हुए आनन-फानन में वाहन की व्यवस्था की और सभी बीमार छात्रों को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों की टीम ने उनका आपातकालीन उपचार शुरू किया। हालांकि, डॉक्टर सभी छात्रों की स्थिति खतरे से बाहर बता रहे हैं, लेकिन एक साथ इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार होने ने आवासीय विद्यालयों की आंतरिक व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

मौसमी बीमारी' का रटा-रटाया बहाना या सच को दबाने की बड़ी साजिश?

हर प्रशासनिक नाकामी की तरह इस बार भी जिम्मेदार अधिकारी पूरी घटना को मौसम परिवर्तन और वायरल का नाम देकर अपना पल्ला झाड़ने में जुट गए हैं। लेकिन वरिष्ठ प्रशासनिक हलकों और सजग समाज में यह सवाल तेजी से गूंज रहा है कि अगर यह सिर्फ सामान्य मौसमी बीमारी है, तो एक साथ 17 बच्चों को ही उल्टी और कमजोरी की शिकायत क्यों हुई? क्या हॉस्टल के मेस में परोसा जा रहा भोजन दूषित था या फिर पीने के पानी में कोई गंभीर संक्रमण था? सूत्रों की मानें तो हॉस्टल में साफ-सफाई और खान-पान की स्थिति लंबे समय से लचर बनी हुई थी, जिसकी अनदेखी का खामियाजा इन मासूमों को भुगतना पड़ा। डॉक्टरों द्वारा भले ही इसे प्रारंभिक जांच में वायरल बताया जा रहा हो, लेकिन एक ही परिसर में एक साथ इतने बच्चों का इस कदर प्रभावित होना प्रबंधन की आंतरिक लापरवाही की तरफ सीधा इशारा करता है।

दाल में कुछ काला है,स्वास्थ्य विभाग की आनन-फानन में दौड़ और जांच के नाम पर खानापूर्ति

मामले की गंभीरता और मीडिया के तीखे रुख को भांपते हुए स्वास्थ्य विभाग और विद्यालय प्रबंधन के आला अधिकारियों के हाथ-पैर फूल गए। आनन-फानन में स्वास्थ्य विभाग की एक विशेष टीम ने ज्ञानोदय विद्यालय परिसर का रुख किया और वहां पेयजल, साफ-सफाई तथा भोजन की गुणवत्ता के सैंपल लिए। हॉस्टल प्रबंधन अब आनन-फानन में रहने और खाने-पीने की व्यवस्थाओं की समीक्षा करने का ढोंग रच रहा है ताकि ऊपरी गाज से बचा जा सके। एहतियात के तौर पर अन्य छात्रों के स्वास्थ्य की भी जांच की जा रही है, जो खुद इस बात का प्रमाण है कि भीतर संक्रमण का खतरा कितना बड़ा है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर लापरवाही पर पर्दा डालने वाले गैर-जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई करता है या फिर हमेशा की तरह फाइल को 'मौसमी बीमारी' के डिब्बे में बंद कर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

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