ब्यूरोक्रेसी की बेलगाम तानाशाही,जिला पंचायत सीईओ के 'अहंकार' के खिलाफ भड़का सरपंचों का आक्रोश,आंदोलन की चेतावनी
Junaid Khan - शहडोल। लोकतंत्र में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच समन्वय से विकास की पटकथा लिखी जाती है, लेकिन जब अधिकारी ही मर्यादा की सीमाएं लांघने लगें, तो व्यवस्था का चरमराना तय है। शहडोल जिला मुख्यालय में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां नौकरशाही के कथित अहंकार और तानाशाही पूर्ण रवैये के खिलाफ पूरे जिले का सरपंच संघ लामबंद हो गया है। जनपद पंचायत सोहागपुर के ग्राम पंचायत बोडरी की एक आदिवासी महिला सरपंच गणेशिया बाई के साथ जिला पंचायत सीईओ द्वारा की गई अभद्रता और अपशब्दों के इस्तेमाल के गंभीर आरोपों ने अब एक बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक गतिरोध का रूप ले लिया है। शुक्रवार को आक्रोशित सरपंच संघ ने कलेक्ट्रेट परिसर का घेराव कर जमकर नारेबाजी की और प्रशासनिक व्यवस्था को खुली चुनौती देते हुए साफ कर दिया कि यदि एक सप्ताह के भीतर दोषी अधिकारी का स्थानांतरण नहीं किया गया, तो पूरे जिले में विकास कार्य ठप कर जिला पंचायत कार्यालय के सामने उग्र धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
चार महीने से ठप विकास की गुहार लगाने गई महिला सरपंच को मिला 'अपमान'
पूरे मामले की जड़ में प्रशासनिक लापरवाही और जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनहीनता साफ नजर आती है। ग्राम पंचायत बोडरी में पिछले करीब चार महीनों से सचिव का पद रिक्त पड़ा हुआ है, जिसके कारण पंचायत के तमाम विकास कार्य, महत्वपूर्ण दस्तावेजी प्रक्रियाएं और ग्रामीणों से जुड़े जरूरी काम पूरी तरह से ठप पड़े हैं। इसी गंभीर समस्या के निराकरण के लिए जब आदिवासी महिला सरपंच गणेशिया बाई बीती 6 जुलाई को जिला पंचायत सीईओ शिवम प्रजापति से मिलने उनके कार्यालय पहुंची थीं, तो समस्या सुलझाने और सांत्वना देने के बजाय अधिकारी ने प्रशासनिक मर्यादाओं को ताक पर रख दिया। सरपंच संघ का आरोप है कि सीईओ ने निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि की बात सुनने के बजाय उनके साथ न सिर्फ अभद्र भाषा का प्रयोग किया, बल्कि अपशब्द कहते हुए उन्हें चेंबर से बाहर जाने को कह दिया। इस घटना से आहत महिला सरपंच ने जब अपनी पीड़ा जिले के अन्य सरपंचों से साझा की, तो ब्यूरोक्रेसी के इस रवैये के खिलाफ पूरे जिले में आक्रोश की चिंगारी भड़क उठी।
सरपंच संघ की दोटूक,कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं
कलेक्ट्रेट में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए जिला सरपंच संघ के अध्यक्ष शिवेंद्र सिंह शिवम ने सीधे तौर पर प्रशासन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि, और वह भी एक आदिवासी महिला के साथ ऐसा व्यवहार प्रशासनिक सेवा की गरिमा के खिलाफ है। ज्ञापन में यह संगीन आरोप भी लगाया गया है कि जिला पंचायत सीईओ का यह अड़ियल और अभद्र व्यवहार सिर्फ सरपंचों के साथ ही नहीं, बल्कि विभाग के अधीनस्थ कर्मचारियों के प्रति भी अक्सर देखने को मिलता है। सरपंचों का कहना है कि एक तरफ सरकार ग्रामीण विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर काम करने वाले जनप्रतिनिधियों को अधिकारियों के चैंबरों में अपमानित होना पड़ता है। संघ ने चेतावनी दी है कि यह लड़ाई अब आत्मसम्मान की बन चुकी है और जब तक इस तानाशाही रवैये पर लगाम नहीं लगती, आंदोलन पीछे नहीं हटेगा।
वर्जन-दूसरी तरफ से सफाई का दांव
इस पूरे मामले में जिला पंचायत सीईओ शिवम प्रजापति का कहना है कि महिला सरपंच को आगे करके कुछ 'ठेकेदार टाइप' के लोग अपने निजी स्वार्थों और बचाव के लिए ऐसा माहौल तैयार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि महिला सरपंच को केवल यह समझाया गया था कि वे ऐसे तत्वों को साथ लेकर न आएं जो अनाप-सनाप कार्यों में लिप्त रहते हैं और जिनके खिलाफ जांच चल रही है। अधिकारी के मुताबिक, ये तत्व केवल महिला सरपंच का इस्तेमाल कर अपना पक्ष मजबूत करना चाहते हैं।
