जनहित से खिलवाड़ का आरोप, प्रशासन से सख्त कार्रवाई की गुहार
Junaid Khan - शहडोल। शहर के सिंधी धर्मशाला के सामने श्रीपंचलाल करौंधन चैरिटेबल ट्रस्ट धर्मशाला को लेकर गंभीर अनियमितताओं और कब्जे की शिकायत सामने आई है। इस मामले ने अब तूल पकड़ लिया है और स्थानीय लोगों में नाराजगी भी बढ़ती जा रही है।
इस संबंध में संभाग आयुक्त और कलेक्टर को दिए गए शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि धर्मशाला का उपयोग नियमों के विपरीत निजी कार्यों में किया जा रहा है, जिससे आमजन के हित प्रभावित हो रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह धर्मशाला मूल रूप से सामाजिक और जनसेवा के उद्देश्य से बनाई गई थी, लेकिन वर्तमान में इसका स्वरूप पूरी तरह बदल दिया गया है। पंचलाल चैरिटेबल धर्मशाला बचाव समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश गुप्ता, ज्ञानचंद्र गुप्ता, व रामशरण गुप्ता ने लिखित शिकायत करते हुए बताया कि वर्ष 1981 में शासन द्वारा धर्मशाला निर्माण हेतु भूमि 30 वर्ष की लीज पर दी गई थी, जिसका बाद में नवीनीकरण भी हुआ, लेकिन वर्तमान में ट्रस्ट के अधिकांश सदस्य स्वर्गवासी हो चुके हैं और संचालन नियमों के अनुसार नहीं हो रहा है। आरोप है कि एक व्यक्ति ने पिछले करीब 10 वर्षों से धर्मशाला पर ताला लगाकर स्वयं कब्जा कर लिया गया है और निजी उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा धर्मशाला के अंदर दीवार तोड़कर गोदाम बना लेने और आय-व्यय का कोई हिसाब-किताब न रखने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि ट्रस्ट से संबंधित रजिस्टर, बैंक खाता और बैठक विवरण नियमों के अनुसार संधारित नहीं किए जा रहे हैं। इससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं और पूरे प्रबंधन की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में है। शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर नियमों के अनुसार समिति का पुनर्गठन किया जाए तथा धर्मशाला को कब्जे से मुक्त कराकर जनहित में उपयोग सुनिश्चित किया जाए। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले में कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में अन्य सार्वजनिक संपत्तियों पर भी इसी तरह के कब्जे और अनियमितताओं को बढ़ावा मिल सकता है। विशेष बात यह है कि यह मामला सिर्फ एक धर्मशाला तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक निगरानी और ट्रस्ट प्रबंधन की पारदर्शिता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है और क्या धर्मशाला को पुनः जनसेवा के उद्देश्य से मुक्त कराया जा सकेगा या नहीं।
