भू-माफिया का नंगा नाच,प्रशासन व पुलिस मौन तहसीलदार के स्थगन आदेश के बावजूद दबंग बेखौफ, पुलिस ने पीड़ित महिला को थाने से भगाया

भू-माफिया का नंगा नाच,प्रशासन व पुलिस मौन तहसीलदार के स्थगन आदेश के बावजूद दबंग बेखौफ, पुलिस ने पीड़ित महिला को थाने से भगाया


Junaid Khan - शहडोल। जिले में प्रशासनिक सुस्ती और पुलिस महकमे की संवेदनहीनता के चलते भू-माफियाओं और दबंगों के हौसले पूरी तरह से बुलंद हो चुके हैं। आम नागरिकों की जमीनों पर खुलेआम कब्जे की कोशिशें हो रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजी आदेश जारी कर अपनी जिम्मेदारियों से इतिश्री कर रहे हैं। ताजा मामला तहसील सोहागपुर अंतर्गत ग्राम मतनी स्थित बेशकीमती जमीन से सामने आया है, जहाँ पीड़िता अल्किया खान (पति अमजद खान, निवासी रेलवे कॉलोनी शहडोल) की क्रयशुदा व अनुबंधित आराजी खसरा नंबर 1/2 (रकबा 0.054 हैक्टेयर में से 25x52=1300 वर्गफिट भूमि) पर अनावेदक अख्तरी बेगम और दादूराम कोरी द्वारा अवैध रूप से कब्जा करने की नीयत से बड़े पैमाने पर निर्माण सामग्री गिराकर काम चालू करवा दिया गया। पीड़िता का आरोप है कि दबंगों द्वारा गुंडागर्दी के बल पर महिला को डराया-धमकाया जा रहा है और गाली-गलौज की जा रही है, परंतु जब पीड़िता न्याय की उम्मीद लेकर शहडोल कोतवाली थाना पहुँची, तो पुलिस ने शिकायत दर्ज करने से साफ इंकार कर दिया। कानून-व्यवस्था की इस लचर स्थिति ने यह साबित कर दिया है कि जिले में भू-माफिया को पुलिस प्रशासन का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संरक्षण हासिल है।

अदालत का स्टे ऑर्डर भी बेअसर,क्या केवल कागजों तक सीमित है राजस्व प्रशासन?

मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार सोहागपुर के न्यायालय (प्रकरण क्रमांक /अ-70/2026-27/483, दिनांक 25/09/2026) द्वारा म.प्र. भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 250 एवं 250(3) के तहत सख्त स्थगन आदेश जारी किया गया है। न्यायालय ने अनावेदकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे मौके पर तत्काल प्रभाव से यथास्थिति बनाए रखें और किसी भी प्रकार का परिवर्तन न करें। साथ ही थाना प्रभारी कोतवाली शहडोल को आदेश का कड़ाई से पालन करवाकर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने तथा पटवारी हल्का शहडोल को मौका जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। आगामी पेशी की तिथि 09/10/2026 तय की गई है। इसके बावजूद सवाल उठता है कि जब तहसील न्यायालय स्पष्ट रूप से मान रहा है कि अनावेदकों का उक्त भूमि से कोई दूर-दूर तक संबंध नहीं है और वे अवैध दबंगई कर रहे हैं, तो फिर जमीनी स्तर पर काम रोकने में प्रशासनिक अमला नाकाम क्यों साबित हो रहा है? क्या तहसीलदार का आदेश सिर्फ एक कागजी टुकड़ा बनकर रह जाएगा?

जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल,क्या होगी सख्त कार्रवाई? 

इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश सरकार के 'सुशासन' और 'माफिया-मुक्त प्रदेश' के दावों की हवा निकाल कर रख दी है। स्थानीय प्रशासन, एसडीएम और पुलिस विभाग की इस सुस्त कार्यप्रणाली पर क्षेत्र में भारी जनाक्रोश पनप रहा है। यदि तहसीलदार के स्थगन आदेश के बाद भी दबंगों द्वारा अवैध निर्माण जारी रहता है, तो इसका सीधा अर्थ है कि जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों को कानून का कोई खौफ नहीं रह गया है। पीड़िता ने चेतावनी दी है कि यदि उसे समय रहते न्याय नहीं मिला और उसकी संपत्ति पर जबरन कब्जा हो गया, तो इसकी पूरी जवाबदेही सोहागपुर तहसील प्रशासन, स्थानीय पटवारी और शहडोल पुलिस महकमे की होगी। अब देखना यह होगा कि शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर आरोपी दबंगों और लापरवाह पुलिसकर्मियों पर क्या दंडात्मक कार्रवाई करते हैं या फिर पीड़िता को इंसाफ के लिए दर-दर की ठोकरें ही खानी पड़ेंगी।

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