बिना सुनवाई वेतन कटौती और एकतरफा निलंबन से उपजा रोष,एडीएम के आश्वासन दरकिनार,अब संभाग आयुक्त को घेरने की तैयारी
Junaid Khan - शहडोल। जिले भर में राजस्व प्रशासन की रीढ़ कहे जाने वाले पटवारियों के खिलाफ मैदानी अधिकारियों की एकतरफा व उत्पीड़नकारी कार्रवाई ने पूरे जिले की व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। खराब मौसम, भारी बारिश, नेटवर्क की विषमताओं और सीमित संसाधनों के बावजूद दिन-रात निष्ठापूर्वक शासकीय दायित्वों, फार्मर रजिस्ट्री और सीएम हेल्पलाइन का काम निपटाने वाले पटवारियों को प्रशासनिक अफसरशाही का कोपभाजन बनना पड़ रहा है। सोहागपुर, गोहपारू, ब्यौहारी और जयसिंहनगर में अनुविभागीय अधिकारियों (SDM) व तहसीलदारों द्वारा बिना किसी सुनवाई या पक्ष रखने का अवसर दिए मनमाने ढंग से पटवारियों के वेतन काटने, अवैतनिक करने और निलंबित करने का तानाशाही रवैया अपनाया गया है। इस उत्पीड़न के विरोध में मध्य प्रदेश पटवारी संघ (जिला इकाई शहडोल) के आह्वान पर जिले भर के पटवारी 21 सितंबर से अनिर्चितकालीन ‘कलम बंद हड़ताल’ पर चले गए हैं, जिससे पूरा राजस्व तंत्र ठप पड़ गया है। प्रशासनिक हठधर्मिता और अधिकारियों के अड़ियल रवैये का आलम यह है कि जायज मांगों को लेकर जब पटवारी ज्ञापन देने पहुंचे, तो ज्ञापन तक स्वीकार नहीं किए गए और उन्हें घंटों इंतजार कराकर अपमानित किया गया। गोहपारू तहसील में तो पूरी निष्ठा से काम करने के बाद भी अगस्त माह का वेतन रोक दिया गया और वीसी (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) में मात्र 10 सेकेंड की देरी होने पर पूरे दिन का वेतन काटकर अवैतनिक कर दिया गया। इसी तरह सोहागपुर एसडीएम अमृता गर्ग द्वारा 17 पटवारियों का वेतन काटा गया और पटवारी दीपू चंद सिंह को एकतरफा निलंबित कर दिया गया। ब्यौहारी में कार्यस्थल पर उपस्थित रहने के बाद भी 13 पटवारियों का वेतन काटा गया और हलका बैरिहाई के पटवारी आनंद तिवारी को कार्य करने के बावजूद निलंबित कर दिया गया। जयसिंहनगर में एसडीएम काजोल सिंह द्वारा 06 पटवारियों का मई माह का रोका गया वेतन और 09 पटवारियों का अगस्त माह का वेतन बिना लिखित आदेश के काटा गया, जबकि नेटवर्क विहीन क्षेत्र जमुड़ी गढ़ में बिना साधन मोबाइल नेटवर्क के काम न होने पर भारत सिंह सरैया को एकतरफा निलंबित कर दिया गया। प्रशासनिक अधिकारियों के इस तुगलकी फरमान और मानसिक प्रताड़ना के खिलाफ संघ के जिलाध्यक्ष सत्यनारायण मिश्रा के नेतृत्व में अपर कलेक्टर (ADM) सरोधन सिंह को 230 पृष्ठों का विस्तृत दस्तावेज व शिकायत पत्र सौंपा गया। संघ ने स्पष्ट किया कि जिले में लगभग 205 पटवारियों के न्यायसंगत कार्य अकारण रोककर रखे गए हैं, जिससे मैदानी अमला भारी मानसिक दबाव और आर्थिक क्षति झेलने को मजबूर है। हालांकि एडीएम द्वारा नियमानुकूल त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है, लेकिन पटवारी संघ ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि खोखले आश्वासनों से हड़ताल समाप्त नहीं होगी। जब तक तानाशाही रवैया अपनाने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती और सभी लंबित न्यायसंगत मांगों का ठोस निराकरण नहीं किया जाता, तब तक ‘कलम बंद हड़ताल’ निरंतर जारी रहेग। अधिकारियों के तानाशाही पूर्ण रवैये और प्रताड़ना के विरोध में आंदोलन को और उग्र रूप देते हुए पटवारी संघ ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। 28 सितंबर को जिले के समस्त पटवारी एकजुट होकर रीवा/शहडोल संभाग के आयुक्त (कमिश्नर) को ज्ञापन सौंपेंगे और प्रशासन की दमनकारी नीतियों के खिलाफ शंखनाद करेंगे। संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि गोहपारू तहसीलदार दिव्या सिंह सहित तानाशाही रवैया अपनाने वाले अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से हटाकर पटवारियों का काटा गया वेतन बहाल नहीं किया गया और निलंबन वापस नहीं लिया गया, तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।


