रसूख के नशे में कुचली गई कानून व्यवस्था,शहडोल में 120 की स्पीड से दौड़ती इनोवा ने ली महिला की जान, गश्त पर उठे गंभीर सवाल

त्यौहार पर भाई के घर आई बहन की हिट एंड रन में दर्दनाक मौत,आरोपी फरार, पुराने मामलों की 'सेटिंग'और पुलिस की लीपापोती की आशंका से जनता में आक्रोश 


Junaid Khan - शहडोल। त्यौहार की खुशियां मातम में बदलीं,एफआईआर की जुबानी दर्दनाक दास्तान। शहडोल। जिला मुख्यालय के हृदय स्थल कोतवाली थाना अंतर्गत कांग्रेस भवन के सामने मुख्य मार्ग पर बीती रात एक रोंगटे खड़े कर देने वाला खूनी हिट एंड रन हादसा सामने आया है। रीवा से त्यौहार मनाने अपने मायके आई 45 वर्षीय बेकसूर महिला सरोज जायसवाल को बेकाबू रफ्तार से भाग रही सफेद रंग की टोयोटा इनोवा (MP18-BB-2683) ने न केवल जोरदार टक्कर मारी, बल्कि कई मीटर तक घसीटते हुए निर्ममता से कुचल डाला। मौके पर ही महिला की तड़प-तड़पकर दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उनका छोटा भाई गंभीर रूप से घायल हो गया।

घटना के संबंध में पीड़ित भाई सौरभ जायसवाल (निवासी कांग्रेस भवन के सामने, विराट क्लीनिक के पास, शहडोल) ने कोतवाली थाने में रोते-बिलखते एफआईआर दर्ज कराई। सौरभ ने बताया कि उनकी बड़ी बहन सरोज जायसवाल (पति राजेंद्र जायसवाल) 17 सितंबर को त्यौहार मनाने रीवा से आई थीं। रात करीब 11:30 बजे रीवा वापसी की ट्रेन का रिजर्वेशन होने के कारण वे अपनी स्कूटी से बहन को शहडोल रेलवे स्टेशन छोड़ने जा रहे थे। जैसे ही वे कांग्रेस भवन के सामने पहुंचे, तभी बुढार चौक की ओर से अत्यधिक तेज रफ्तार, लापरवाही और खतरनाक ढंग से लहराती हुई इनोवा कार ने उनकी स्कूटी में सामने से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि सौरभ दूर जा गिरे और उनकी बहन कार के नीचे फंसकर काफी दूर तक घसीटती चली गईं। सिर व शरीर में गंभीर चोटें आने से मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी चालक कार लेकर फरार हो गया, जबकि दुर्घटनाग्रस्त गाड़ी की नंबर प्लेट मौके पर ही टूटकर गिर गई।

आरटीओ का खुलासा, 120 की स्पीड और फरारी का पूरा घटनाक्रम 

हादसे के बाद परिवहन विभाग (RTO) से मिली प्राथमिक जानकारी के अनुसार दुर्घटनाकारित टोयोटा इनोवा कार (MP18-BB-2683) चंद्र पांडेय (पिता स्वर्गीय कमलेश्वर पांडेय, निवासी वार्ड नंबर 18, शर्मा कॉलोनी, ओल्ड आरटीओ के पास, शहडोल) के नाम पर पंजीकृत है। ऑनलाइन पोर्टल जांच में पाया गया कि इस वाहन के कई चालान पूर्व में भी कट चुके हैं, जिनमें से कई पेंडिंग हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि इस वाहन का बीमा (Insurance) भी वर्तमान में पोर्टल पर अपडेटेड नहीं दिख रहा है। विश्वस्त सूत्रों और चश्मदीदों के मुताबिक, हादसे के वक्त इनोवा कार में लगभग 4 लोग सवार थे जो अत्यधिक नशे की हालत में थे और गाड़ी की रफ्तार 120 किमी/घंटा से अधिक थी। सूत्रों का दावा है कि गाड़ी को शेखर पांडे चला रहा था, जिसे पूर्व में भी कई बार इसी कार को उतावलेपन से चलाते देखा गया है। कार में उसके साथ शुभम पैलेस शुभम और दो अन्य युवक सवार थे (जिनमें से एक उपनाम का युवक इंदौर तथा दूसरा दिल्ली से शहडोल घूमने आया था)। हादसे के बाद आरोपी कार रोकने के बजाय गांधी चौक होते हुए कल्याणपुर-कोलारी रोड की ओर भागे। भागने के दौरान बदहवास चालकों ने रास्ते में कई अन्य वाहनों को भी टक्कर मारी। कुछ स्थानीय युवाओं ने कल्याणपुर कोलारी फाटक तक पीछा कर कार के वीडियो व नंबर प्लेट की फोटो भी बनाई, लेकिन आरोपी ग्रामीण रास्तों का फायदा उठाकर फरार हो गए। सूत्रों के अनुसार, फरार आरोपी वर्तमान में पुलिस की पकड़ से बचने के लिए जबलपुर में शरण लिए हुए हैं।

पुराने क्राइम रिकॉर्ड,पैसे और रसूख के दम पर 'सेटिंग' का पुराना खेल? 

इस लोमहर्षक हादसे ने रसूखदारों के पुराने कारनामों की फाइलें भी खोल दी हैं। सूत्रों का सनसनीखेज दावा है कि आरोपी शुभम पहले भी इसी तरह की जानलेवा सड़क दुर्घटना में शामिल रह चुका है। पूर्व में अमिलिहा गांव के पास हाईवे रोड पर एक महिला को कार से कुचलकर मार डालने का मामला सामने आया था। आरोप हैं कि उस समय सांठगांठ, पैसों के लेन-देन और भारी दबाव के बल पर असली आरोपी शुभम जसमणी को बचा लिया गया और एफआईआर में किसी निर्दोष ड्राइवर का नाम दर्ज करवाकर पूरे मामले की 'लीपापोती' कर दी गई थी। वहीं, इनोवा चला रहे शेखर पांडे के खिलाफ भी पूर्व के कई विवाद दर्ज हैं। हाल ही में सोहागपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत संचालित 'यम्मी स्पाइसी' नॉनवेज रेस्टोरेंट में हुए भीषण मारपीट और उपद्रव के मामले में भी शेखर पांडे का नाम आया था। उस विवाद में दोनों पक्षों पर मामले दर्ज हुए थे, लेकिन रसूख के कारण शेखर पांडे पर मामूली धाराएं लगाई गईं, जबकि दूसरे पक्ष पर गंभीर धाराएं बनी थीं। यह मामला इतना तूल पकड़ा था कि माननीय उच्च न्यायालय (High Court) ने संज्ञान लेते हुए पुलिस अधीक्षक शहडोल को 45 दिनों के भीतर निष्पक्ष जांच के आदेश दिए थे। रात-रात भर शराब के नशे में धुत होकर हुड़दंग मचाना और बेकाबू गाड़ियां दौड़ाना इन रसूखदारों का शगल बन चुका है।

प्रशासनिक विफलता,समयसीमा के बाद भी खुल रहे मयखाने और पंगु गश्त व्यवस्था 

यह दर्दनाक हादसा केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं है, बल्कि शहडोल पुलिस प्रशासन और यातायात विभाग की लचर कार्यशैली का सीधा प्रमाण है। शहर के प्रबुद्ध नागरिकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जब शराब दुकानों के बंद होने का समय सरकारी नियमों में तय है, तो आधी रात 12:00 से 1:00 बजे तक अवैध रूप से शराब की बिक्री कैसे हो रही है? बुढार चौक से लेकर जयस्तंभ चौक और लल्लू सिंह चौक तक देर रात तक सजी चौपाटियों और अवैध ठेलों पर असामाजिक तत्वों व नशेडियों का जमावड़ा लगा रहता है। कोतवाली पुलिस और पुलिस यातायात थाना प्रभारी की रात्रि गश्त (Night Patrol) दावों तक ही सीमित नजर आ रही है। यदि पुलिस की पीसीआर वैन और चीता मोबाइल सड़कों पर मुस्तैद रहतीं, तो 120 की स्पीड से मुख्य सड़क पर दौड़ती यमराज रूपी कार को पहले ही रोका जा सकता था। क्या पुलिस प्रशासन केवल दुर्घटनाओं के बाद मर्ग कायम करने और कागजी खानापूर्ति करने के लिए ही रह गया है? कानून-व्यवस्था की यह बदहाली शहरवासियों की सुरक्षा पर बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लगा रही है।

जनता की मांग,नवागत एसपी संजय कुमार अग्रवाल करें निष्पक्ष जांच, न हो लीपापोती

शहडोल की जनता और पीड़ित परिवार की आंखें अब न्याय की उम्मीद में नवागत पुलिस अधीक्षक श्री संजय कुमार अग्रवाल की ओर टिकी हुई हैं। एक हंसता-खेलता परिवार, जो त्यौहार मनाने एकत्रित हुआ था, आज प्रशासनिक लापरवाही और अमीरी के नशे में अंधे युवकों की वजह से ताउम्र न भूलने वाले सदमे में है। किसी की अमूल्य जान की कीमत को पैसों से नहीं तौला जा सकता। शहरवासियों और मीडिया जगत ने पुरजोर मांग की है कि इस मामले में रसूखदारों के दबाव में आकर किसी भी प्रकार की लीपापोती न की जाए। पुलिस प्रशासन निष्पक्षता से जांच करते हुए सीसीटीवी फुटेज, वाहन की तकनीकी जांच और मोबाइल लोकेशंस के ठोस प्रमाण जनता के सामने रखे। जनता की मुख्य मांगें हैं।

वायरल हो रहे नामजद आरोपियों (शेखर पांडे, शुभम व अन्य) की तत्काल गिरफ्तारी की जाए

किसी फर्जी ड्राइवर को खड़ा करके केस रफा-दफा करने की साजिश को नाकाम किया जाए। 

देर रात तक अवैध रूप से शराब परोसने वाले अहातों/दुकानों और निष्क्रिय गश्त वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।





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