सड़क निर्माण में भेदभाव और मनमानी,17 मीटर चौड़ाई के नियम कागजों में सिमटे

जनप्रतिनिधियों की खामोशी और नगरपालिका की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, व्यापारियों में आक्रोश


Junaid Khan - शहडोल। शहडोल के बुढ़ार चौक से बस स्टैंड के बीच निर्माणाधीन 17 मीटर चौड़ी सड़क का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। 28 जून को नगरपालिका द्वारा अतिक्रमण हटाने के नाम पर की गई तोड़फोड़ की कार्रवाई में 85 से अधिक निर्माण ढहाए गए थे, जिनमें मेडिकल स्टोर संचालक राकेश पयासी सहित कई अन्य छोटे-बड़े व्यापारियों की दुकानें भी शामिल थीं। इस कार्रवाई के बाद से जहां कई दिनों तक लोगों का कारोबार पूरी तरह ठप रहा, वहीं अब हफ्तों बीत जाने के बाद भी सड़क का निर्माण कार्य पूरा न होने से व्यापारी और आम नागरिक धूल, कीचड़ और अव्यवस्था के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं। स्थानीय जनता का आरोप है कि प्रशासन, क्षेत्रीय विधायकों, सांसदों और नगर पालिका के जनप्रतिनिधियों (अध्यक्ष व उपाध्यक्ष) की अनदेखी के कारण निर्माण कार्य कछुआ गति से चल रहा है, जिससे पूरा व्यापारिक क्षेत्र चौपट हो गया है। नियमों की धज्जियां उड़ाने और चहेतों को फायदा पहुंचाने का बड़ा आरोप सामने आ रहा है। सड़क के मध्य बिंदु (सेंटर) से दोनों ओर साढे़ 8-साढ़े 8 मीटर (कुल 17 मीटर) जगह छोड़ी जानी तय हुई थी, लेकिन मौके पर महज 8 मीटर जगह ही छोड़ी जा रही है। व्यापारियों का सीधा आरोप है कि अशोक कुमार जेठानी द्वारा स्वयं तोड़े गए निर्माण में निर्धारित चौड़ाई के मानकों का पालन नहीं किया गया और प्रशासनिक रसूख के बल पर नाप-जोख में हेरफेर की गई है। नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी, सीएमओ आशा भंडारी और मैदानी कर्मचारी निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय केवल जांच कर आवश्यक कार्रवाई करेंगे" का रटा-रटाया बयान देकर पल्ला झाड़ रहे हैं। निर्मित स्थिति से व्यथित होकर अब व्यापारी वर्ग और स्थानीय नागरिकों में नगर पालिका प्रशासन, स्थानीय निकायों व शासन-प्रशासन की मिलीभगत के खिलाफ गहरा आक्रोश पनप रहा है। व्यापारियों का कहना है कि एक तरफ बुलडोजर चलाकर आम जनता के रोजगार पर लात मारी गई, तो दूसरी तरफ रसूखदारों को संरक्षण देकर असमान कार्रवाई की गई। सवाल यह खड़ा होता है कि जनता से वोट मांगकर कुर्सियों पर बैठे जनप्रतिनिधि और जनता के टैक्स पर पलने वाले जिम्मेदार अधिकारी इस दोहरे रवैये पर चुप क्यों हैं? अगर जल्द ही सड़क निर्माण में समान मानकों का पालन नहीं हुआ और जांच कर गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

Previous Post Next Post