हत्या के प्रयास के तीन आरोपी गिरफ्तार,पर वीडियो में पुलिसकर्मी के 'एक्शन' बोलते ही आरोपी ने दिखाई दबंगई,जनता में आक्रोश, सस्पेंशन और सख्त जांच की उठी मांग
Junaid Khan - शहडोल। जिले के अमलाई थाना क्षेत्र अंतर्गत 14 सितंबर को आलमगंज चीफ हाउस के सामने मोहम्मद आशिक (40) पर हुए जानलेवा हमले (अपराध क्रमांक 277/2026, बीएनएस धारा 109(1), 351(3), 3(5)) के मामले में पुलिस ने 15 सितंबर को तीन नामजद आरोपियों—अरसद अंसारी, भक्ती कोल और योगेन्द्र उर्फ छोटू—को गिरफ्तार कर न्यायालय पेश कर दिया। पुलिस अपनी इस त्वरित कार्रवाई का श्रेय ले ही रही थी कि अमलाई थाने से निकला एक ऐसा वायरल वीडियो सामने आया, जिसने कानून-व्यवस्था के इकबाल को पूरी तरह तार-तार कर दिया है। हत्या के प्रयास जैसे जघन्य अपराध के आरोपियों का खौफ खत्म करने का दावा करने वाली पुलिस खुद उनके लिए 'रील मेकर' की भूमिका में नजर आ रही है।
रील के चक्कर में खोया कानून का खौफ,'एक्शन' सुनते ही तनी आरोपी की छाती
वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जब तीनों आरोपियों को हथकड़ी लगाकर थाने के अंदर से पुलिस वाहन की ओर ले जाया जा रहा था, तब शासकीय वाहन के पास खड़ा एक पुलिसकर्मी अपने मोबाइल से उनका वीडियो बना रहा था। हद तो तब हो गई जब वीडियो रिकॉर्ड करते समय पुलिसकर्मी ने किसी फिल्मी निर्देशक की तरह बाकायदा "एक्शन!" बोला। इस आवाज के सुनते ही चेक शर्ट पहना एक आरोपी किसी नायक की तरह सीना तानकर, हंसते हुए और दबंगई भरे अंदाज में गाड़ी की तरफ बढ़ा। यह दृश्य देखकर ऐसा लगा मानो पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म की शूटिंग चल रही हो।
कप्तान की सख्त छवि पर मातहतों ने फेरा पानी,उठे कई गंभीर सवाल
शहडोल जिले में जब से कड़क और सख्त तेवरों वाले पुलिस अधीक्षक ने कमान संभाली है, तब से अपराधियों पर ताबड़तोड़ कार्रवाइयां जारी हैं। लेकिन अमलाई थाने के कर्मियों की इस 'सस्ती लोकप्रियता' और गैर-जिम्मेदाराना हरकत ने जिले के कप्तान की मेहनत और पुलिस विभाग की साख पर गहरा धब्बा लगा दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि जिस खाकी के नाम से अवैध कारोबारियों, गुंडों और मवालियों के पसीने छूटने चाहिए, उसी खाकी के साय में आरोपी हंसते हुए गाड़ियों में बैठ रहे हैं। अगर थानों से ऐसी गैर-जिम्मेदाराना रील निकलेंगी, तो समाज के अपराधियों में कानून का डर कैसे कायम रहेगा?
थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल, जनता ने की सस्पेंशन की मांग
एसपी द्वारा थानों की कमान थाना प्रभारियों को इसलिए सौंपी जाती है ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में अनुशासन और कानून का राज कायम रख सकें। लेकिन अमलाई थाने की इस शर्मनाक हरकत ने थाना प्रभारी की निगरानी और कमान पर भी बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। किसके इशारे पर आरोपियों की ऐसी रील्स बनाई जा रही थीं? क्या थाने के भीतर अनुशासन नाम की कोई चीज नहीं बची है? इस घटना के बाद से आम जनता और बुद्धिजीवी वर्ग में भारी आक्रोश है। स्थानीय नागरिकों की स्पष्ट मांग है कि वीडियो बनाने वाले संबंधित पुलिसकर्मी को तत्काल सस्पेंड किया जाए और जिम्मेदार थाना प्रभारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर निलंबन की कार्रवाई की जाए।
युवाओं पर पड़ेगा गलत असर,क्या संज्ञान लेंगे जिम्मेदार अधिकारी?
यदि पुलिस खुद अपराधियों को इस तरह 'हीरो' की तरह प्रस्तुत करेगी और रील्स बनाकर वायरल करेगी, तो इससे समाज की नई दिशा भटक सकती है और अपराध की दुनिया की तरफ युवा आकर्षित होंगे। अब पूरा शहडोल जिला इस बात पर नजर गड़ाए बैठा है कि इस पूरे मामले को शहडोल पुलिस अधीक्षक और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी कितनी गंभीरता से लेते हैं। क्या रील बनाने वाले पुलिसकर्मी और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर निलंबन की गाज गिरेगी या फिर इस मामले को भी विभागीय जांच के कागजों में दबा दिया जाएगा? जनता अब निष्पक्ष और कड़ी कार्रवाई का इंतजार कर रही है।
