मुस्तैद पुलिस प्रशासन की त्वरित सूझबूझ से नाकाम हुआ डिजिटल ठगी का जाल,ग्रामीण की गाढ़ी कमाई सुरक्षित

साइबर अपराधियों के मंसूबों पर बुढ़ार पुलिस का करारा प्रहार; पुलिस अधीक्षक के कड़े निर्देशों और थाना प्रभारी की मुस्तैदी से बची खून-पसीने की कमाई 


Junaid Khan - शहडोल। डिजिटल कार्ड के झांसे में फंसा पीड़ित, हैक हुआ मोबाइल। डिजिटल इंडिया के दौर में जहाँ तकनीक सहूलियत ला रही है, वहीं साइबर अपराधी आम जनता को निशाना बनाने के नए-नए जाल बुन रहे हैं। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला सामने आया जहाँ बुढ़ार थाना क्षेत्र के ग्राम खमरौध निवासी सुनील कुमार पाठक के दूरभाष पर अज्ञात जालसाजों ने विवाह का डिजिटल निमंत्रण पत्र बताकर एक संदिग्ध डिजिटल ऐप (फाइल) भेजी। पीड़ित ने जैसे ही उसे आमंत्रण पत्र समझकर क्लिक किया, उनका पूरा मोबाइल फोन हैक हो गया और उनके बैंक खाते में जमा गाढ़ी कमाई पर वित्तीय संकट मंडराने लगा। किसी अनहोनी और ठगी की आशंका से घबराए पीड़ित ने बिना समय गंवाए तत्काल बुढ़ार थाने पहुंचकर पुलिस की शरण ली और पूरी आपबीती सुनाई। थाना प्रभारी की त्वरित कार्रवाई और उच्च अधिकारियों का कुशल मार्गदर्शन मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार और जिला पुलिस अधीक्षक के ‘अपराध मुक्त एवं सुरक्षित समाज’ के संकल्पों के तहत, बुढ़ार थाना प्रभारी संजय जायसवाल ने बिना एक पल गंवाए मोर्चा संभाला। थाना प्रभारी ने अदम्य सूझबूझ का परिचय देते हुए तत्काल पीड़ित के मोबाइल से सिम कार्ड निकलवाया और उसे दूसरे सुरक्षित फोन में डलवाकर संबंधित बैंक प्रबंधकों से संपर्क साधा। पुलिस की त्वरित मुस्तैदी से पीड़ित के वित्तीय खाते को पूरी तरह फ्रीज एवं सुरक्षित कराया गया, जिससे जालसाज खाते से एक भी रुपया उड़ाने में नाकाम रहे। जिला पुलिस कप्तान के कुशल मार्गदर्शन में की गई इस त्वरित कार्रवाई ने साइबर ठगों के मंसूबों पर पानी फेर दिया और ग्रामीण की खून-पसीने की कमाई सुरक्षित बच गई। प्रशासन की अपील: जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव इस सफल कार्रवाई के बाद पुलिस प्रशासन की ओर से आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। थाना प्रभारी संजय जायसवाल ने क्षेत्रवासियों से अपील करते हुए कहा कि दूरभाष पर आने वाले किसी भी अनजान लिंक, संदिग्ध फाइल या डिजिटल इनविटेशन ऐप को बिना जांचे-परखे बिल्कुल न खोलें। साइबर अपराधियों के जाल से बचने के लिए सतर्कता और जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। यदि किसी नागरिक को किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी या संदेहास्पद गतिविधि की आशंका हो, तो घबराने के बजाय तत्काल अपने बैंक तथा नजदीकी थाना या साइबर हेल्पलाइन को सूचित करें, ताकि समय रहते साइबर अपराधों को रोका जा सके।

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