शिकायत पत्र, वीडियो और सोशल मीडिया के माध्यम से Twitter (X) पर देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi, मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री सहित भोपाल के वरिष्ठ अधिकारियों को टैग कर शिकायत भेजी गई है।
अब देखना होगा कि क्या उच्च स्तर पर इस मामले को संज्ञान में लेकर संबंधित भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई होती है या नहीं
Junaid Khan - शहडोल। जिले के शासकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के दौरान कथित लापरवाही का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। शिव यादव पिता हीरालाल यादव निवासी कमल बाबू कॉलोनी शहडोल द्वारा दी गई लिखित शिकायत ने न सिर्फ डॉक्टरों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था, पुलिस की मौजूदगी और साफ-सफाई जैसे गंभीर मुद्दों को भी उजागर कर दिया है। पीड़ित ने अस्पताल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों को आवेदन सौंपते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। शिकायत के अनुसार, शिव यादव पिता हीरालाल यादव निवासी कमल बाबू कॉलोनी शहडोल इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज शहडोल पहुंचे थे, जहां डॉक्टरों और स्टाफ की लापरवाही के चलते उनकी हालत बिगड़ गई। उन्होंने अपने आवेदन में बताया कि दिनांक 19/04/2026 की रात करीब 11:55 बजे उनकी तबीयत अचानक ज्यादा खराब हो गई, लेकिन ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों ने समय रहते उचित उपचार नहीं किया। बार-बार आग्रह करने के बावजूद उनकी समस्या को नजरअंदाज किया गया, जिससे उनकी स्थिति और गंभीर होती चली गई। पीड़ित का आरोप है कि अस्पताल के कुछ डॉक्टर मरीजों के प्रति असंवेदनशील रवैया अपनाते हैं और शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेते। उनका कहना है कि यदि समय पर सही इलाज मिलता, तो उन्हें इतनी तकलीफ नहीं झेलनी पड़ती। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मजबूरी में उन्हें बाहर से इलाज कराने की सलाह दी गई, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ा।
सूत्रों के मुताबिक यह कोई पहला मामला नहीं है
मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पहले भी कई बार ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जहां इलाज में लापरवाही और अव्यवस्था की शिकायतें उठती रही हैं। सबसे बड़ा सवाल अस्पताल परिसर में बनी पुलिस चौकी पर उठ रहा है। बताया जा रहा है कि अक्सर विवाद या मारपीट जैसी घटनाओं के समय पुलिस मौके पर मौजूद नहीं रहती, जबकि चौकी का उद्देश्य ही ऐसी स्थितियों में त्वरित कार्रवाई करना है। स्थानीय लोगों और सूत्रों का कहना है कि अस्पताल में तैनात सुरक्षा गार्ड भी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन ठीक से नहीं करते। आरोप है कि जब तक कोई बड़ा अधिकारी या कार्यक्रम नहीं होता, तब तक व्यवस्था कुछ हद तक ठीक रहती है, लेकिन उसके बाद हालात फिर पुराने ढर्रे पर लौट आते हैं। गार्डों पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि वे मरीजों और परिजनों की सुरक्षा करने के बजाय कई बार खुद ही दबंगई दिखाने लगते हैं। सूत्रों के अनुसार, अस्पताल परिसर में गंदगी का भी अंबार लगा रहता है, जिससे मरीजों को संक्रमण का खतरा बना रहता है। वहीं, गार्डों के व्यवहार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि जिन पर सुरक्षा की जिम्मेदारी है, वही कई बार अनुशासनहीनता करते नजर आते हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने बढ़ाई गंभीरता
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें कथित तौर पर गार्ड और स्टाफ मरीज व उसके परिजनों के साथ अभद्र व्यवहार करते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। लोगों का कहना है कि यदि वीडियो की निष्पक्ष जांच की जाए, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।
जांच और कार्रवाई की मांग तेज
पीड़ित शिव यादव पिता हीरालाल यादव निवासी कमल बाबू कॉलोनी शहडोल सहित स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि डॉक्टरों के साथ-साथ सुरक्षा गार्डों और गार्ड इंचार्ज की भी जांच की जाए। साथ ही, अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी तय करते हुए उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। लोगों का कहना है कि आखिर गार्डों को सुरक्षा के लिए रखा गया है या दबंगई दिखाने के लिए यह स्पष्ट होना चाहिए।
बड़े आंदोलन की चेतावनी
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो इस मुद्दे को लेकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर यह मामला भोपाल से लेकर दिल्ली तक उठाया जाएगा और विधानसभा से लेकर संसद तक इसकी गूंज सुनाई दे सकती है। गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेज शहडोल पूरे संभाग के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र है, जहां दूर-दराज से मरीज इलाज के लिए आते हैं। ऐसे में यहां की व्यवस्थाओं पर उठ रहे सवाल न केवल चिंताजनक हैं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत भी उजागर करते हैं। अब निगाहें प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन पर टिकी हैं कि वे इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाते हैं। क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
