चार बार चेतावनी के बाद भी नहीं चेता ठेकेदार, शहर की स्वच्छता पर मंडराया संकट
Junaid Khan - शहडोल। नगर की साफ-सफाई व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिला मुख्यालय से लगे जमुई स्थित नगर पालिका के अस्थाई ट्रेंचिंग ग्राउंड में पुराने वेस्ट मैटेरियल का निपटान लंबे समय से अधर में लटका हुआ है। हालात यह हैं कि कचरे के ढेर अब शहर की बदहाल व्यवस्था की कहानी खुद बयां कर रहे हैं। नगर पालिका द्वारा वेस्ट मैटेरियल के निस्तारण और डंप साइट रेमेडिएशन का ठेका देने के बावजूद ठेकेदार की लापरवाही सामने आई है। तय समय सीमा में काम पूरा न होने के कारण न सिर्फ प्रक्रिया अटक गई है, बल्कि ट्रेंचिंग ग्राउंड पर लगातार बढ़ते कचरे ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। चार बार नोटिस, फिर भी नहीं सुधरा ठेकेदार। 201.84 लाख के ठेके पर 36,883 टन कचरे का निस्तारण अधूरा। नगर पालिका ने ब्लैकलिस्ट की प्रक्रिया शुरू की जानकारी के अनुसार, इस कार्य के लिए लगभग 201.84 लाख रुपये का ठेका दिया गया था, जिसके तहत 36,883 टन कचरे का निपटान किया जाना था। लेकिन ठेकेदार ने न तो तय समय में काम पूरा किया और न ही मशीनों को मौके पर बनाए रखा। इससे साफ है कि काम के प्रति गंभीरता का अभाव रहा। नगर पालिका ने इस मामले में चार से अधिक बार पत्राचार कर कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए, लेकिन हर बार अनदेखी ही सामने आई। परिणामस्वरूप अब प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी शुरू कर दी है। बढ़ती समस्या, बिगड़ती व्यवस्था। पुराने कचरे का निस्तारण न होने और लगातार नए वेस्ट मैटेरियल के डंप होने से जमुई ट्रेंचिंग ग्राउंड पर हालात नियंत्रण से बाहर होते जा रहे हैं। बदबू, प्रदूषण और अव्यवस्था ने आसपास के क्षेत्र को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। यह स्थिति न सिर्फ स्वच्छता अभियान को झटका दे रही है, बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बनती जा रही है। ट्रेंचिंग ग्राउंड बना समस्या का अड्डा। स्वच्छता मिशन पर उठे सवाल। नगर पालिका इस पूरे मामले में सख्त रुख अपनाते हुए अब हर पहलू पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि शहर की स्वच्छता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। अधिकारियों का बयान: नगर पालिका के मुख्य अधिकारी आशा जीतेंद्र भंडारी के अनुसार, ठेकेदार को कई बार चेतावनी दी गई, लेकिन उसने कार्य में रुचि नहीं दिखाई। अब उसे ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोहराई न जा सके। निष्कर्ष: शहर की साफ-सफाई केवल योजनाओं और बजट से नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और समय पर काम से तय होती है। अगर ठेकेदार अपनी जवाबदेही नहीं निभाते, तो उसका खामियाजा पूरे शहर को भुगतना पड़ता है। अब देखना होगा कि प्रशासन की यह सख्ती व्यवस्था में कितना सुधार ला पाती है।
