जयसिंहनगर परिषद में चोरी की वारदात दोबारा,भीतरखाने मिलीभगत के संकेत
Junaid khan - शहडोल। भ्रष्टाचार पर रोक के दावों के बीच शासकीय तंत्र की लापरवाही और आंतरिक मिलीभगत के आरोप एक बार फिर उजागर हुए हैं। नगर परिषद जयसिंहनगर में हुई चोरी ने न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, बल्कि कर्मचारियों की संलिप्तता की आशंका को भी मजबूत किया है। जानकारी के अनुसार, भंडार शाखा प्रभारी सुनीता बैगा 02 दिसंबर को पाइपलाइन सुधार कार्य हेतु सामग्री लेने भंडार कक्ष पहुंचीं। वहां उन्होंने देखा कि जलप्रदाय शाखा के कक्ष का दरवाजा टूटा पड़ा है और सामग्री गायब है। उन्होंने तत्काल इसकी सूचना मुख्य नगरपालिका अधिकारी को दी।
सीएमओ ने पुलिस से की शिकायत
घटना को गंभीर मानते हुए सीएमओ ने जयसिंहनगर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में अज्ञात चोरों के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई की मांग की गई है। नगर परिषद कार्यालय में हुई यह चोरी न केवल सरकारी संपत्ति की सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि तंत्र के भीतर कहीं न कहीं लापरवाही या मिलीभगत की संभावना मौजूद है। स्थानीय नागरिकों ने भी चिंता जताते हुए कहा कि जब सरकारी कार्यालय ही सुरक्षित नहीं, तो आम जनता की संपत्ति की सुरक्षा की क्या गारंटी है। पुलिस जांच में जुट गई है।
छुट्टी के दिन हुई वारदात
छुट्टी के दिन अज्ञात चोरों ने नगर परिषद में चोरी को अंजाम दिया। घटना उस समय हुई, जब कार्यालय बंद थे और आवाजाही भी कम थी। सुबह पहुंचे कर्मचारियों ने कक्ष का टूटा ताला और गायब सामान देखकर तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों व पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके का निरीक्षण कर मामला दर्ज किया। प्रारंभिक जांच में अंदरूनी लापरवाही की आशंका भी उभरकर सामने आई है। छुट्टी के दिन हुई इस वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
चोरी का माल कहाँ हो रहा सप्लाई
चोरी के बाद यह बड़ा सवाल है कि चोरी हुआ सामान आखिर खपाया कहाँ जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, अज्ञात चोर लंबे समय से परिषद के पाइप व अन्य सामग्री चोरी कर स्थानीय बाजार की एक दुकान में बेचने की कोशिश में लगे थे। शक है कि चोरी का माल इसी दुकान के माध्यम से आगे सप्लाई किया जाता रहा है। मामले की गंभीरता देखते हुए पुलिस ने जांच तेज कर दी है। अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों का मानना है कि यदि यह नेटवर्क उजागर हुआ तो चोरी और अंदरूनी मिलीभगत की बड़ी परतें सामने आ सकती हैं।
पांच माह पहले भी रंगे हाथों पकड़े गए थे कर्मचारी
नगर परिषद जयसिंहनगर में चोरी की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। पांच माह पहले जुलाई में भी दैनिक वेतनभोगी दो कर्मचारियों ने छुट्टी के दिन हैंडपंप में उपयोग होने वाली लिंक रॉड चोरी कर ऑटो में लोड करने की कोशिश की थी। सतर्क कर्मचारी की सूचना पर दोनों रंगे हाथों पकड़ लिए गए थे, परंतु पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। बताया गया कि कार्रवाई न होने के पीछे स्थानीय नेताओं का दबाव कारण बना। इसी का परिणाम है कि पांच माह बाद एक और चोरी हो गई। लगातार घटनाओं ने सुरक्षा और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर सवाल और गहरा दिए हैं।
जांच में राजनीतिक दखल का संकेत
लगातार हो रही चोरी की घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि असली मास्टरमाइंड कौन है। जानकारों का कहना है कि दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की इतनी क्षमता नहीं कि वे बिना संरक्षण परिषद का सामान चोरी कर सकें। इससे संदेह है कि इनके पीछे कोई प्रभावशाली व्यक्ति खड़ा है। सूत्र बताते हैं कि पिछले मामले में कर्मचारियों ने थाना प्रभारी के सामने एक पार्षद का नाम लिया था, जिससे उनकी भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। हालांकि आरोप जांचाधीन हैं, लेकिन लगातार चोरी और कार्रवाई के अभाव ने परिषद की पारदर्शिता व राजनीतिक दखल पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। अब जिम्मेदारी पुलिस व प्रशासन की है कि निष्पक्ष जांच कर वास्तविक मास्टरमाइंड को उजागर किया जाए।

