बिहार के भारत भूषण तिवारी मामले में शहडोल में फूटा आक्रोश,महामहिम के नाम ज्ञापन सौंप स्वतंत्र व उच्चस्तरीय जांच की उग्र मांग, चेताया- 'दोषी बचे तो आंदोलन'
Junaid Khan - शहडोल। कानून व्यवस्था के नाम पर वर्दी की आड़ में हो रहे कथित 'खेल' और संदिग्ध पुलिस मुठभेड़ों ने एक बार फिर पूरे प्रशासनिक अमले को कटघरे में खड़ा कर दिया है। बिहार में हुए बहुचर्चित भारत भूषण तिवारी मामले की गूँज अब मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में भी पुरजोर तरीके से सुनाई देने लगी है। कथित पुलिस मुठभेड़ में हुई इस संदेहास्पद मौत को लेकर न्याय की मांग अब एक बड़ा जनाक्रोश बनती जा रही है। इस मामले में अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद की शहडोल जिला इकाई ने सीधे महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक सख्त ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारी को सौंपकर व्यवस्था की नीयत पर गंभीर सवाल दागे हैं। संगठन ने दोटूक लहजे में इस पूरे घटनाक्रम को 'एनकाउंटर के नाम पर सीधी हत्या' करार देते हुए मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है, जिसने सीधे तौर पर लापरवाही बरतने वाले और सच को दबाने वाले सिस्टम को खुली चुनौती दे दी है।
न्याय व्यवस्था से उठ जाएगा भरोसा, किसी एक परिवार का नहीं बल्कि हर नागरिक का सवाल
इस पूरे मामले में प्रशासनिक उदासीनता और लीपापोती की कोशिशों को आड़े हाथों लेते हुए संगठन का कहना है कि यह केवल किसी एक व्यक्ति या पीड़ित परिवार की लड़ाई नहीं है। अगर किसी निर्दोष की जान इस तरह वर्दी की धौंस या प्रशासनिक लापरवाही की वजह से जाती है, तो यह देश की पूरी न्याय व्यवस्था पर भरोसा रखने वाले हर एक आम नागरिक की सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान है। यह खबर उन आला अफसरों की कार्यप्रणाली को सीधी चुनौती देती है जो बंद कमरों में बैठकर ऐसी घटनाओं पर पर्दा डालने का प्रयास करते हैं। परिषद ने साफ किया है कि इस संदिग्ध मुठभेड़ के पीछे छिपी पूरी सच्चाई को बेनकाब करना और दोषियों पर बिना किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के तत्काल कड़ी कानूनी कार्रवाई करना बेहद जरूरी हो चुका है, अन्यथा जनता का कानून से विश्वास उठना तय है।
जनाक्रोश की राह पर संगठन, दिग्गज पदाधिकारियों ने संभाला मोर्चा, प्रशासन के फूले हाथ-पांव
महामहिम के नाम ज्ञापन सौंपने के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में गहमा-गहमी का माहौल रहा, जहाँ संगठन के तेवरों को देखकर प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ-पांव फूलते नजर आए। इस दौरान व्यवस्था को चुनौती देने और पीड़ित को न्याय दिलाने के संकल्प के साथ जिला अध्यक्ष पंडित बद्री प्रसाद तिवारी, जिला संयोजक पंडित अनिल शुक्ला, और उप प्रांता अध्यक्ष पंडित दया शंकर शुक्ला ने मोर्चे की अगुवाई की। इसके साथ ही युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष पंडित लखन अवस्थी, संभागीय अध्यक्ष पंडित त्रिलोकी नाथ गर्ग, संरक्षक पंडित भागवत शर्मा, पंडित निखिल त्रिपाठी तथा पंडित राकेश तिवारी सहित संगठन के कई अन्य प्रमुख पदाधिकारी और सक्रिय सदस्य भारी संख्या में मौजूद रहे। संगठन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में जल्द ही कोई ठोस और पारदर्शी कदम नहीं उठाया गया, तो यह शांतिपूर्ण विरोध एक उग्र राष्ट्रव्यापी आंदोलन का रूप ले सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी लापरवाह प्रशासन की होगी।
