नगरपालिका में 'अविनाश एजेंसी' का महाघोटाला

दो महीने काम कराकर डकारी जा रही सफाईकर्मियों की पगार,भ्रष्टाचार पर प्रशासनिक मौन को खुली चुनौती


Junaid Khan - शहडोल। संभागीय मुख्यालय की नगरपालिका परिषद में आउटसोर्सिंग के नाम पर गरीब सफाई कामगारों के शोषण और आर्थिक दमन का एक ऐसा घिनौना खेल सामने आया है, जिसने समूचे प्रशासनिक महकमे की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर पालिका में सफाई व्यवस्था का जिम्मा संभाल रही निजी आउटसोर्सिंग कंपनी 'अविनाश एजेंसी' पर कर्मचारियों के खून-पसीने की कमाई को डकारने और तमाम श्रम नियमों को ताक पर रखकर तानाशाही रवैया अपनाने के बेहद संगीन आरोप लगे हैं। इस बड़े फर्जीवाड़े के खिलाफ अब भारतीय सफाई मजदूर संघ ने सीधे तौर पर मोर्चा खोलते हुए संभागीय आयुक्त से लेकर मुख्य नगर पालिका अधिकारी तक लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सितंबर 2025 से इस भ्रष्ट एजेंसी के माध्यम से सफाईकर्मी अपनी सेवाएँ दे रहे हैं, लेकिन संघ के पत्र क्रमांक 20 में लगाए गए आरोपों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ठेकेदार द्वारा नियम-कायदों की धज्जियाँ उड़ाते हुए कड़ाके की धूप और विपरीत परिस्थितियों में भूखे-प्यासे काम करने वाले मजदूरों का हक मारा जा रहा है। फर्जीवाड़े और तानाशाही की परतें यहीं नहीं सुलगतीं, बल्कि हद तो तब हो जाती है जब मजदूरों से लगातार दो-दो महीने तक रात-दिन काम कराने के बाद उन्हें बकौल भीख महज एक महीने का वेतन थमा दिया जाता है। इस निरंकुश एजेंसी ने मार्च 2026 और अप्रैल 2026 का पूरा वेतन साफ तौर पर डकार लिया है, और जब ये बेबस श्रमिक अपने जायज हक का पैसा मांगते हैं, तो उन्हें केवल झूठे आश्वासनों का झुनझुना थमाकर भगा दिया जाता है। तानाशाही का आलम यह है कि कई ईमानदार कर्मचारियों की बायोमेट्रिक उपस्थिति (हाजिरी) को तकनीकी खामियों का बहाना बनाकर जबरन बंद कर दिया गया है। हाजिरी बंद कर उनसे बेगारी तो कराई जा रही है, लेकिन वेतन भुगतान की सूची से उनका नाम ही गायब कर दिया जाता है। इतना ही नहीं, कर्मचारियों के भविष्य निधि (पीएफ) खातों में भी मनमाने ढंग से पैसों की भारी हेराफेरी की जा रही है, जो कि सीधे तौर पर फौजदारी अपराध की श्रेणी में आता है।

प्रशासनिक संरक्षण पर तीखे सवाल,आखिर कटनी में भुगतान तो शहडोल में मेहरबानी क्यों?

संघ के नगर मंत्री पवन मोगरे ने तीखे लहजे में प्रशासनिक तंत्र को घेरा है कि जब पड़ोसी जिले कटनी नगर निगम और अन्य स्थानीय निकायों द्वारा श्रमिकों के वर्षों पुराने साप्ताहिक मास्टर एवं अतिरिक्त आउटसोर्स एरियर का पूरा भुगतान किया जा चुका है, तो आखिर शहडोल नगर पालिका प्रशासन इस दागी और शोषक एजेंसी पर इतना मेहरबान क्यों है? क्या इस 'अविनाश गंगा' में ऊपर से नीचे तक सबने डुबकी लगा रखी है? इस खुली लूट और प्रशासनिक शिथिलता को चुनौती देते हुए भारतीय सफाई मजदूर संघ के कद्दावर पदाधिकारी वाल्मीक कुण्डे सहित अन्य शीर्ष नेताओं ने शासन-प्रशासन को अंतिम और स्पष्ट अल्टीमेटम जारी कर दिया है। संघ ने साफ किया है कि यदि आगामी 3 दिनों के भीतर इस शोषक 'अविनाश एजेंसी' को तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट कर बाहर का रास्ता नहीं दिखाया गया और पीड़ित श्रमिकों को कलेक्टर दर पर सीधा वैधानिक भुगतान सुनिश्चित नहीं किया गया, तो पूरे शहडोल शहर की सफाई व्यवस्था ठप कर दी जाएगी। इसके साथ ही बेमियादी कामबंद हड़ताल और उग्र धरना-प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन की होगी। इस संवेदनशील मामले की प्रतिलिपि राष्ट्रीय स्तर पर केंद्रीय आयोग की माननीय श्रीमती सुमित्रा वाल्मीक जी के कार्यालय से लेकर राज्य मंत्रालय, जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक (SP) और स्थानीय कोतवाली थाना प्रभारी तक को भेजी जा चुकी है। अब देखना यह है कि शहडोल का यह भारी-भरकम प्रशासनिक अमला इन बेसहारा सफाईकर्मियों को न्याय दिलाकर अपनी कर्तव्यनिष्ठा साबित करता है या फिर भ्रष्टाचार के इस खेल में मूकदर्शक बनकर अपनी सहभागिता पर मोहर लगाता है।

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