सियासी रसूखदारों के 'अवैध किलों' पर चला प्रशासन का बुलडोजर, खुद के आशियाने जद में आए, तो सीमांकन की मांग करने वाले 'बैकफुट' पर लौटे

सियासी रसूखदारों के 'अवैध किलों' पर चला प्रशासन का बुलडोजर, खुद के आशियाने जद में आए, तो सीमांकन की मांग करने वाले 'बैकफुट' पर लौटे


Junaid Khan - शहडोल। शहर के सुनियोजित विकास और यातायात को सुगम बनाने के लिए इंदिरा चौक से बस स्टैंड के बीच बनने वाली 17 मीटर चौड़ी 'मॉडल रोड' के निर्माण ने अब एक नया प्रशासनिक और सियासी मोड़ ले लिया है। जनहित के कामों में अड़ंगा लगाने और 'सीमांकन' के नाम पर राजनीति की रोटियां सेंकने वाले कुछ तथाकथित रसूखदार और सत्ताधारी दल के पूर्व पदाधिकारी अब पूरी तरह बैकफुट पर आ गए हैं। दरअसल, प्रशासन को चुनौती देने की मंशा से जिन चेहरों ने 29 जून को सड़क निर्माण के चिन्हांकन पर सवाल खड़े किए थे और बड़ी-बड़ी मांगें की थीं, मंगलवार को कलेक्टर डॉ. केदार सिंह के एक कड़े और निष्पक्ष फैसले ने उनकी हवा निकाल दी। कलेक्टर के निर्देश पर जब प्रशासन ने पूरी पारदर्शिता के साथ सीमांकन शुरू किया, तो विरोध करने वाले नेताओं के ही अपने घर, आलीशान दुकानें और रसूख के दम पर कब्जाई गई सरकारी जमीनें सड़क के दायरे में आती दिखने लगीं। इसके बाद 'चोर की दाढ़ी में तिनका' वाली कहावत चरितार्थ हो गई और जनहित का विरोध करने वाले कथित नेता बुधवार को दुबक कर तमाशा देखने को मजबूर हो गए।

नगरपालिका की दृढ़ता को सलाम,मलबे के साथ हटा विकास का अवरोध, नपाध्यक्ष बोले,भेदभाव रहित होगी कार्रवाई

इस पूरे घटनाक्रम में स्थानीय नगरपालिका प्रशासन की भूमिका बेहद सराहनीय और अनुकरणीय रही। दबाव और धमकियों की परवाह न करते हुए नगरपालिका अमले ने बुधवार को पूरी मुस्तैदी के साथ सड़क से मलबा हटाने का काम युद्धस्तर पर जारी रखा। 28 जून को हुई शुरुआती कार्रवाई के बाद उपजा कृत्रिम विरोध अब पूरी तरह शांत हो चुका है क्योंकि जनता भी समझ चुकी है कि विरोध जनहित में नहीं, बल्कि निजी स्वार्थों को बचाने के लिए था। मामले की गंभीरता और प्रशासनिक निष्पक्षता को स्पष्ट करते हुए नगरपालिका अध्यक्ष घनश्याम जायसवाल ने दोटूक शब्दों में कहा कि, "मॉडल रोड के 17 मीटर के दायरे में आने वाले सभी अवैध निर्माणों को ढहाया जा रहा है। कई जागरूक नागरिकों ने खुद आगे आकर अपने अवैध निर्माण तोड़ने शुरू कर दिए हैं, वहीं कुछ ने पत्र सौंपकर स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने की मौहलत मांगी है। निर्धारित समय सीमा के भीतर जो भी निर्माण नहीं हटाए जाएंगे, उन्हें प्रशासन पूरी कड़ाई से जमींदोज करेगा, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो।

लापरवाहों और अतिक्रमणकारियों को खुली चुनौती,कब तक जनहित की बलि चढ़ाएंगे रसूखदार? 

यह कार्रवाई उन तमाम भू-माफियाओं और लापरवाह तत्वों के लिए एक खुली चुनौती है जो सालों से सरकारी जमीनों को अपनी बपौती समझकर बैठे हैं और शहर के विकास में सबसे बड़ा रोड़ा बने हुए हैं। जब तक कार्रवाई छोटे दुकानदारों पर होती है, तब तक ये रसूखदार खामोश रहते हैं, लेकिन जैसे ही कानून का शिकंजा इनके खुद के अवैध आशियानों पर कसता है, ये नियमों और सीमाओं की दुहाई देने लगते हैं। लेकिन इस बार प्रशासन के सख्त इरादों ने यह साफ कर दिया है कि विकास की राह में आने वाले हर एक अवैध पत्थर को हटाया जाएगा। अब समय आ गया है कि शहर की जनता भी इन स्वार्थी चेहरों को पहचाने जो खुद के अवैध निर्माणों को बचाने के लिए पूरे शहर के विकास को दांव पर लगाने से भी गुरेज नहीं करते।

मानवीय संवेदना की मिसाल, घायल सीताराम की मदद के लिए आगे आया जिला व्यापारी संघ

प्रशासनिक कड़ाई के बीच शहर में मानवीय संवेदना की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर भी सामने आई है। बीते रविवार को नगरपालिका की कार्रवाई के दौरान दुर्घटनावश घायल हुए स्थानीय नागरिक सीताराम गुप्ता का इलाज इस वक्त रायपुर के उच्च स्तरीय अस्पताल में चल रहा है। आर्थिक रूप से बेहद कमजोर सीताराम के इलाज में लाखों रुपए का भारी-भरकम खर्च आ रहा है। इस संकट की घड़ी में अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए जिला व्यापारी संघ के पदाधिकारी पूरी मजबूती के साथ आगे आए हैं। व्यापारी संघ ने न सिर्फ पीड़ित परिवार को आर्थिक संबल देने का बीड़ा उठाया है, बल्कि नगरपालिका प्रशासन सहित शहर के तमाम संभ्रांत और संवेदनशील नागरिकों से भी अपील की है कि वे इस संकट की घड़ी में स्वेच्छा से आगे आएं और पीड़ित सीताराम के जीवन की रक्षा के लिए यथासंभव आर्थिक मदद सुनिश्चित करें।

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