भगवान भरोसे जिला अस्पताल की सुरक्षा,रात होते ही दरी बिछाकर सो जाते हैं रक्षक, महिला स्टाफ और मरीज राम भरोसे

प्रशासनिक अंधेरगर्दी,कुल 24 गार्डों के दावों के बीच रात में सिर्फ 08 के जिम्मे पूरा परिसर, अचानक निरीक्षण में गायब मिलते हैं सूरमा,सिर्फ एक गनमैन के सहारे कट रही काली रातें।


Junaid Khan - शहडोल। स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर करोड़ों का बजट डकारने वाला शहडोल जिला अस्पताल इस समय गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा के बड़े खिलवाड़ का अड्डा बन चुका है। अस्पताल प्रबंधन और जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं, जबकि परिसर में तैनात सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। वर्तमान में अस्पताल की सुरक्षा के नाम पर दिन और रात मिलाकर कुल 24 सुरक्षा गार्डों की कागजी तैनाती की गई है, जिसमें से दिन में 16 और रात में महज 8 गार्डों को ड्यूटी पर लगाने का दावा किया जाता है। लेकिन जमीनी हकीकत इतनी खौफनाक है कि रात ढलते ही ये सुरक्षाकर्मी ड्यूटी देने के बजाय अस्पताल के वार्डों से पूरी तरह नदारद हो जाते हैं और कहीं भी दरी बिछाकर चैन की नींद सोते नजर आते हैं। औचक निरीक्षण के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है, क्योंकि यदि रात के वक्त कोई जिम्मेदार अधिकारी औचक रूप से धरातल पर उतरे, तो उसे ये कथित रक्षक अपनी जगह से पूरी तरह गायब मिलेंगे।

अस्पताल प्रबंधन को खुली चुनौती,महिला स्टाफ की गरिमा दांव पर, क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है प्रशासन?

सुरक्षा के इस खोखले तंत्र के बीच रात के सन्नाटे में अस्पताल के भीतर महिला स्टाफ, नर्सों और मरीजों के साथ अभद्रता, गाली-गलौज और बदसलूकी की कई घटनाएं आम हो चुकी हैं, जिनकी भनक सुबह होने के बाद ही प्रबंधन को लगती है। पूरे अस्पताल परिसर की सुरक्षा को रात के समय सिर्फ एक अकेले गनमैन के सहारे छोड़ दिया गया है। अब सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि यदि रात में किसी वार्ड के भीतर महिला स्टाफ या मरीज के साथ कोई गंभीर या अप्रिय घटना घटित हो जाए, तो क्या मुख्य गेट पर तैनात वह अकेला गनमैन अपना मोर्चा छोड़कर वार्ड की तरफ भागेगा? और अगर वह गेट छोड़ता है, तो मुख्य द्वार की सुरक्षा का क्या होगा? और जब तक वह अंदर पहुंचेगा, तब तक तो अपराधी वारदात को अंजाम देकर रफूचक्कर हो चुका होगा। अस्पताल प्रबंधन की यह घोर लापरवाही साफ तौर पर किसी बड़ी अनहोनी को खुला आमंत्रण दे रही है। अस्पताल की सुरक्षा को चाक-चौबंद बनाने और महिला स्टाफ को भयमुक्त वातावरण देने के बजाय प्रशासन शुतुरमुर्ग की तरह आंखें मूंदे बैठा है। यदि जल्द ही 10 अतिरिक्त सुरक्षा गार्डों की मांग पूरी कर इस ढर्रे को नहीं सुधारा गया, तो किसी भी अप्रिय स्थिति की पूरी जिम्मेदारी यहां के निकम्मे प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन की होगी।

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