शहडोल रेल मंडल में भ्रष्टाचार का 'सेंड-गांठ' खेल,कबाड़ चोरी में आरपीएफ की संदिग्ध भूमिका,असली मुल्जिम फरार, बेकसूर को फंसाने की साजिश

करोड़ों की सरकारी संपत्ति पर 'अपनों' का ही डाका,बिलासपुर से दिल्ली तक के आला अधिकारी मौन,आखिर कब तक शहडोल में जमे रहेंगे दागी थाना प्रभारी?


Junaid Khan - शहडोल। शहडोल रेलवे स्टेशन और इसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले इलाकों में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और जीआरपी (GRP) की नाक के नीचे भ्रष्टाचार और सेंड-गांठ का एक और शर्मनाक अध्याय सामने आया है। सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, रेलवे के ही एक कथित विभागीय कर्मचारी कम ठेकेदार द्वारा सालों से सरकारी लोहे, कॉपर और तांबे के महंगे तारों की चोरी कर कबाड़ियों को बेचने का भंडाफोड़ हुआ है। लेकिन इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब आरपीएफ ने रंगे हाथों माल पकड़ने के बाद मुख्य आरोपी को भगा दिया और एक निर्दोष कबाड़ी को जबरन इस दलदल में घसीटने की साजिश रच डाली। विभाग की इस एकतरफा और संदिग्ध कार्रवाई ने आरपीएफ शहडोल की निष्पक्षता और नीयत पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

ट्रूकॉलर से खुला 'श्याम बाबू' का राज,पीछे छूट गया 'खाकी' का संरक्षण

इस पूरे काले कारोबार का सूत्रधार तथाकथित रेल कर्मचारी सह ठेकेदार 'श्याम बाबू' बताया जा रहा है, जो मूलतः बिहार का निवासी है और वर्तमान में उमरिया व शहडोल के बीच रेल के इलेक्ट्रॉनिक, लोहे और ओवरहेड तारों के रखरखाव का काम देखता है। ट्रूकॉलर और स्थानीय इनपुट के जरिए इस शातिर चेहरे का नकाब उतरा है। यह शख्स अपने ऊपरी खर्चों और ऐश-ओ-आराम के लिए सालों से रेलवे यार्ड और स्टोर से कीमती सरकारी संपत्तियां पार कर कबाड़ियों तक पहुंचा रहा था। हाल ही में इस ठेकेदार ने एक बड़ी खेप खपाने के लिए एक पुराने कबाड़ी से संपर्क किया। जब कबाड़ी ने यह कहते हुए साफ मना कर दिया कि वह अब यह धंधा छोड़ चुका है और खासकर रेलवे का चोरी का माल कभी नहीं लेगा, तो श्याम बाबू ने अपनी ऊंची सेटिंग का धौंस देते हुए कहा"मेरी ऊपर तक पूरी सेटिंग है, तुम माल उठाओ, कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा।

आरपीएफ की कार्रवाई पर सवाल,ऑटो चालक गिरफ्तार, मुख्य सरगना को दी 'वॉकओवर'?

जब कबाड़ी ने साफ इनकार कर दिया, तो श्याम बाबू ने एक अनभिज्ञ ऑटो चालक इरफान को जाल में फंसाया। ऑटो में रेलवे का भारी-भरकम चोरी का लोहा, कॉपर और तांबे के तार लादे गए। आगे-आगे अपनी बाइक से ठेकेदार श्याम बाबू 'पायलटिंग' कर रहा था और पीछे-पीछे कबाड़ से लदा तीन पहिया वाहन चल रहा था। इसी बीच किसी मुखबिर की सूचना पर आरपीएफ ने दबिश दी। लेकिन हैरत की बात देखिए, आरपीएफ ने मौके से ऑटो चालक इरफान को तो माल समेत दबोच लिया, लेकिन मुख्य सरगना और विभाग की नाक के नीचे चोरी करने वाला श्याम बाबू ठेकेदार मौके से आसानी से फरार हो गया या यूं कहें कि उसे भगा दिया गया। अब पुलिस हिरासत में ऑटो चालक ने डर के मारे उस कबाड़ी का नाम ले लिया, जिसने माल लेने से पहले ही मना किया था। अब आरपीएफ और जीआरपी उस कबाड़ी को दिन-रात फोन पर 'घर से उठा लेने' और फर्जी केस में फंसाने की धमकियां दे रही हैं, जबकि मुख्य आरोपी पुलिस की पहुंच से दूर एश कर रहा है।

सोशल मीडिया पर प्रमाण और 'एक्स' (Twitter) पर शिकायत के बाद भी बिलासपुर-दिल्ली मौन 

शहडोल में आरपीएफ और जीआरपी के कारनामे नए नहीं हैं। स्थानीय स्तर पर मीडिया द्वारा समय-समय पर वीडियो प्रमाणों और ठोस दस्तावेजों के साथ खबरें प्रकाशित की जाती रही हैं। इतना ही नहीं, बिलासपुर जोन के डीआरएम, आईजी, जीआरएम और दिल्ली में बैठे रेलवे बोर्ड के आला अधिकारियों को 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर टैग करके भ्रष्टाचार के लाइव सबूत भेजे जा चुके हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि इतने संगीन मामलों और लगातार मिल रही शिकायतों के बावजूद शहडोल में जमे आरपीएफ और जीआरपी के थाना प्रभारियों को अब तक क्यों नहीं बदला गया? आखिर इन दागी प्रभारियों को किसका राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है, जो हर बड़े कांड के बाद भी इनकी कुर्सी टस से मस नहीं होती?

मोबाइल चोरी से लेकर कैंटीन संचालक से लूट तक,जीआरपी की लापरवाही की लंबी फेहरिस्त

कुछ ही दिनों पहले शहडोल स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर स्थित कैंटीन संचालक के साथ बेरहमी से लूटपाट और मारपीट की घटना हुई थी। पीड़ित गंभीर हालत में अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा था, लेकिन जीआरपी पुलिस ने इस मामले में भारी लापरवाही बरतते हुए सेंड-गांठ कर ली और आरोपियों को मामूली धाराओं का लाभ देकर छोड़ दिया। बाद में जब समाचार पत्रों में इस अंधेरगर्दी के खिलाफ तीखी खबरें प्रकाशित हुईं, तब जाकर जीआरपी ने दबाव में आकर आरोपियों पर सही धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। इसी तरह स्टेशन से आए दिन यात्रियों के मोबाइल और कीमती सामान चोरी हो रहे हैं, जिनका आज तक कोई सुराग नहीं मिला। जब आम जनता की सुरक्षा की बात आती है तो पुलिस सोती रहती है, और जब कबाड़ की सेटिंग करनी हो तो पूरी टीम सक्रिय हो जाती है।

ट्रेनों में अवैध वेंडिंग, गांजा-शराब की तस्करी और 'एक लाइसेंस पर दस का खेल' 

शहडोल रेल खंड अब अवैध गतिविधियों का सबसे सुरक्षित कॉरिडोअर बन चुका है। आरपीएफ और जीआरपी की कथित सरपरस्ती में ट्रेनों के भीतर धड़ल्ले से गांजा, नशीली दवाएं और अवैध शराब की तस्करी की जा रही है। रेलवे स्टेशन के चप्पे-चप्पे पर बिना वैध पास के ऑटो वाले और अवैध वेंडर घूम रहे हैं। सबसे बड़ा घोटाला आईआरसीटीसी (IRCTC) के नियमों को ठेंगा दिखाकर चल रहा है, जहां वेंडरों द्वारा महज एक ट्रेन में खाना सप्लाई करने का लाइसेंस लिया जाता है और उसी एक पर्चे की आड़ में दस-दस ट्रेनों में अवैध रूप से खान-पान की सामग्री बेची जा रही है। पार्किंग एरिया से लेकर प्लेटफॉर्म तक नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और इस पूरे सिंडिकेट से होने वाली काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा ऊपर तक पहुंचने की चर्चाएं आम हैं।

रेलवे के वीरान खंडहर बने नशेड़ियों और अपराधियों के 'सेफ हाउस', युवा पीढ़ी तबाह 

रेलवे प्रशासन की एक और बड़ी लापरवाही यह है कि शहडोल रेल परिक्षेत्र में बने रेलवे के दर्जनों पुराने और जर्जर खंडहर मकानों की कोई सुध लेने वाला नहीं है। ये वीरान खंडहर अब अपराधियों और नशेड़ियों के गढ़ बन चुके हैं। इन मकानों के भीतर लाखों की तादाद में प्रतिबंधित नशीले इंजेक्शन, सीरिंज, और नशीली दवाइयों के रैपर बिखरे पड़े हैं। स्थानीय युवा पीढ़ी इस दलदल में फंसकर बर्बाद हो रही है, जिससे शहर में चोरी और छिनैती की वारदातें बढ़ रही हैं। आरपीएफ इन खंडहरों में कभी कोई सर्चिंग अभियान नहीं चलाती, क्योंकि उनका ध्यान सिर्फ उन जगहों पर होता है जहां से मोटी 'मासिक बंधी' या कबाड़ की डीलिंग तय होती है।

जनता की रेल प्रशासन से गुहार,सीसीटीवी फुटेज खंगालें,भ्रष्ट अधिकारियों पर बैठाएं जांच

शहडोल की जागरूक जनता और भुक्तभोगियों ने अब सीधे रेल मंत्रालय और रेलवे सुरक्षा बल के महानिदेशक से गुहार लगाई है। जनता का साफ कहना है कि यदि रेल प्रशासन वास्तव में ईमानदार है, तो शहडोल थाने के पिछले कुछ महीनों के सीसीटीवी फुटेज, आरपीएफ अधिकारियों के कॉल डिटेल्स (CDR) और इस कबाड़ कांड के समय उनकी लोकेशन की निष्पक्ष जांच कराई जाए। एक निर्दोष कबाड़ी को मोहरा बनाकर असली गुनहगार रेल कर्मचारी श्याम बाबू को बचाने के खेल का पर्दाफाश होना बेहद जरूरी है। यदि आला अधिकारी अब भी मौन रहते हैं, तो आम जनता यही मानने को मजबूर होगी कि नीचे से लेकर ऊपर बिलासपुर और दिल्ली तक भ्रष्टाचार की यह गंगा बराबर बह रही है और लंबी 'मोटी गाड़ी' के दम पर ही शहडोल में इन भ्रष्ट प्रभारियों का साम्राज्य कायम है।

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