सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक जहर घोलने वालों को कब दबोचेगी पुलिस? पैगंबर साहब पर अभद्र टिप्पणी के खिलाफ भड़का आक्रोश,सोहागपुर थाने में शिकायत दर्ज

इंटरनेट पर 'रील और पॉडकास्ट' के नाम पर धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने का खेल, AIMIM नेता मोहम्मद यासीन खान ने साक्ष्यों के साथ की तत्काल FIR और गिरफ्तारी की मांग, प्रशासन की सुस्ती पर उठे सवाल 



Junaid Khan - शहडोल। डिजिटल दुनिया में 'क्रिएटर' और 'एंकर' का चोला ओढ़कर अभिव्यक्ति की आजादी का दुरुपयोग करने और दो समुदायों के बीच नफरत की खाई को गहरा करने का एक और घिनौना मामला सामने आया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक सोची-समझी साजिश के तहत पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब और उम्मुल मोमिनीन हजरत आयशा सिद्दीका के खिलाफ घोर अपमानजनक, अमर्यादित और भड़काऊ वक्तव्य प्रसारित किया गया है। इस आपत्तिजनक रील और पॉडकास्ट के वायरल होते ही जिले के अल्पसंख्यक समुदाय में गहरा आक्रोश व्याप्त हो गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के शहडोल सदस्यता प्रभारी मोहम्मद यासीन खान ने सोहागपुर थाना प्रभारी को एक लिखित शिकायती पत्र सौंपकर दोषियों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने शिकायत तो प्राप्त कर ली है, लेकिन ऐसे संवेदनशील मामलों में त्वरित कानूनी एक्शन न होना स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यशैली और उसकी मुस्तैदी पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है।

अवैध मानसिकता और नफरत के सौदागरों को खुली चुनौती 

अखबार के हाथ लगे दस्तावेजों और शिकायत के अनुसार, इंस्टाग्राम पर खुद को 'रील क्रिएटर' और 'एंकर' बताने वाली दिव्या सिंह (अकाउंट @divyasingh4043) द्वारा संचालित एक पॉडकास्ट/रील में नाजिया इलाही खान (Nazia Ilahi Khan) नाम की महिला द्वारा अत्यंत आपत्तिजनक और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली बातें कही गईं। यह विवादित वीडियो बीते 11 जून 2026 से ही इंटरनेट पर खुलेआम तैर रहा है। डिजिटल माध्यमों का सहारा लेकर इस प्रकार का जहर उगलना सीधे तौर पर सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने की अवैध और आपराधिक कोशिश है। अपनी सस्ती लोकप्रियता और व्यूज बटोरने के चक्कर में बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक समाज के बीच वैमनस्य पैदा करने वाले इन स्वघोषित सोशल मीडिया तत्वों को कानून का कोई खौफ नजर नहीं आ रहा है। यह सीधे तौर पर उन तत्वों को चुनौती है जो सोचते हैं कि बंद कमरों में बैठकर माइक के सामने किसी भी धर्म की पूजनीय हस्तियों पर कीचड़ उछालकर वे बच निकलेंगे।

प्रशासन की ढिलाई और कानून-व्यवस्था पर बड़ा खतरा 

यह पूरा मामला महज एक व्यक्तिगत टिप्पणी या सामान्य विवाद का नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक शांति,कानून-व्यवस्था और मध्य प्रदेश की गंगा-जमुनी तहजीब को सीधे तौर पर प्रभावित करने का एक गंभीर प्रशासनिक मुद्दा है। जब यह सामग्री डिजिटल स्पेस में व्यापक रूप से प्रसारित होकर मुस्लिम समुदाय की धार्मिक आस्था पर आघात कर रही है, तो स्थानीय खुफिया तंत्र और साइबर सेल अब तक गहरी नींद में क्यों सोए हुए थे? पुलिस प्रशासन की यह सुस्ती किसी बड़े सामाजिक तनाव को आमंत्रण दे सकती है। शिकायतकर्ता मोहम्मद यासीन खान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वीडियो के निर्माण, रिकॉर्डिंग, संपादन, प्रकाशन और इसे बढ़ावा देने में शामिल सभी जिम्मेदार चेहरों को बेनकाब कर सलाखों के पीछे भेजा जाए। अब देखना यह है कि शहडोल पुलिस इस सांप्रदायिक आग को भड़काने वाले डिजिटल अपराधियों पर त्वरित और कठोर चाबुक चलाती है, या फिर कागजी खानापूर्ति में ही वक्त जाया करती है।

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