शहडोल संभाग में चौथे स्तंभ को दबाने और डराने का गंदा खेल; सच उजागर करने वाले वरिष्ठ पत्रकारों पर झूठी शिकायत कर छवि धूमिल करने की प्रशासनिक साजिश के खिलाफ 'भारतीय श्रमजीवी पत्रकार महासंघ' ने खोला मोर्चा, एसपी को सौंपा तीखा ज्ञापन
Junaid Khan - शहडोल। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को अपने निहित स्वार्थों और अवैध कारनामों की ढाल बनाने वाले एक कुटिल सिंडिकेट ने अब निष्पक्ष पत्रकारिता के खिलाफ ही खुला मोर्चा खोल दिया है। शहडोल जिले के ब्यौहारी क्षेत्र से शुरू हुआ यह विवाद अब महज एक आपसी कहासुनी नहीं, बल्कि समूचे संभाग के स्वाभिमानी और ईमानदार कलमकारों के मान-सम्मान पर सीधा प्रहार बन चुका है। अपनी काली करतूतों पर पर्दा डालने और प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने के इरादे से, कतिपय तत्वों द्वारा क्षेत्र के प्रतिष्ठित और निष्पक्ष पत्रकारों के खिलाफ झूठी, भ्रामक और तथ्यहीन शिकायतें दर्ज कराकर उनकी सामाजिक व व्यावसायिक प्रतिष्ठा को मटियामेट करने का एक बेहद खतरनाक और सुनियोजित खेल खेला जा रहा है। इस गहरे प्रशासनिक और सामाजिक षड्यंत्र के खिलाफ 'भारतीय श्रमजीवी पत्रकार महासंघ' (IFWJ) की शहडोल जिला इकाई ने आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है।
साजिश का पर्दाफाश,ऑडियो काट-छांट कर सोशल मीडिया पर फैलाया झूठ का रायता
इस पूरे सुनियोजित खेल की परतों को उघाड़ें तो सच बेहद चौंकाने वाला और गंभीर है। प्राप्त पुख्ता जानकारी के अनुसार, ग्राम साखी के सरपंच श्री हीरालाल साकेत एवं मेट आशीष तिवारी के साथ वरिष्ठ पत्रकार व संभागीय उपाध्यक्ष श्री नीलेश सोनी के कार्यालय में एक बैठक हुई थी। इस दौरान यह सनसनीखेज तथ्य सामने आया कि पत्रकारिता की आड़ में कतिपय गतिविधियों में लिप्त सूर्यभान यादव नामक व्यक्ति द्वारा किसी अज्ञात संगठन के नाम पर ₹5,000/- की अवैध उगाही की जा चुकी थी और लगातार अतिरिक्त मोटी धनराशि ऐंठने के लिए भारी दबाव बनाया जा रहा था। जब इस गंभीर और अनैतिक मामले की सत्यता परखने के लिए वरिष्ठ पत्रकार श्री नीलेश सोनी ने सूर्यभान यादव से दूरभाष पर संपर्क किया, तो सच सामने आने के डर से बौखलाए व्यक्ति ने अभद्र और अमर्यादित भाषा का खुलकर प्रयोग किया। इतना ही नहीं, अपनी अवैध उगाही के धंधे को छुपाने के लिए उसने शातिर दिमाग का इस्तेमाल करते हुए बातचीत के मूल ऑडियो में दुर्भावनापूर्ण तरीके से काट-छांट (एडिटिंग) की और उसे सोशल मीडिया पर इस तरह प्रसारित किया जिससे पत्रकारों की छवि धूमिल हो सके। इसके बाद ब्यौहारी थाने में एक मनगढ़ंत और झूठी लिखित शिकायत दर्ज कराकर मामले को पूरी तरह पलटने का घिनौना प्रयास किया गया।
बिना किसी बातचीत के महासंघ के ब्लॉक महासचिव को भी घसीटा,नीयत पर सवाल
यह साजिश कितनी गहरी और दुर्भावना से प्रेरित है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस पूरे प्रकरण में महासंघ के वरिष्ठ पत्रकार साथी एवं ब्यौहारी ब्लॉक महासचिव श्री रामराज गुप्ता को भी घसीट लिया गया। हैरान करने वाली बात यह है कि श्री रामराज गुप्ता द्वारा न तो किसी प्रकार की कोई धमकी दी गई और न ही उनकी तरफ से कोई अनैतिक बातचीत हुई थी। इसके बावजूद, केवल और केवल महासंघ की रीढ़ को तोड़ने और ब्यौहारी क्षेत्र में सच की आवाज बुलंद करने वाले मुखर पत्रकारों का मुंह बंद करने के उद्देश्य से उनके विरुद्ध भी द्वेषपूर्ण भावना के तहत शिकायत दर्ज करा दी गई। इस हरकत ने साफ कर दिया है कि यह किसी एक व्यक्ति की तात्कालिक नाराजगी नहीं, बल्कि शहडोल जिले में निष्पक्ष पत्रकारिता को डराने, धमकाने और उन्हें प्रशासनिक उलझनों में फंसाकर अपने अवैध धंधों को बेखौफ चलाने का एक संगठित सिंडिकेट काम कर रहा है।
पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली को खुली चुनौती, दांव पर खाकी की निष्पक्षता
इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ी चुनौती शहडोल पुलिस प्रशासन और स्थानीय ब्यौहारी थाना पुलिस के सामने खड़ी है। महासंघ ने सीधे तौर पर खाकी की निष्पक्षता को चुनौती देते हुए सवाल उठाया है कि क्या पुलिस बिना किसी तकनीकी और फॉरेंसिक जांच के, महज एकतरफा और एडिटेड ऑडियो के आधार पर लोकतंत्र के प्रहरियों को प्रताड़ित करने की खुली छूट देगी? 17 जून 2026 को महासंघ की ब्लॉक इकाई ब्यौहारी द्वारा थाना प्रभारी को सौंपे गए शुरुआती ज्ञापन के बाद भी जब स्थानीय स्तर पर कोई ठोस और निष्पक्ष कदम नहीं उठाया गया, तो इससे यह साफ संदेश गया कि कहीं न कहीं प्रशासनिक शिथिलता के कारण ब्लैकमेलिंग और झूठी शिकायतें करने वाले तत्वों के हौसले बुलंद हो रहे हैं। यह स्थिति न केवल क्षेत्र की कानून व्यवस्था बल्कि पुलिस की साख पर भी एक बड़ा सवालिया निशान खड़ी करती है।
शहडोल एसपी के दरबार में गर्जना,फॉरेंसिक जांच और कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग
स्थानीय स्तर पर उचित सुनवाई न होने और लगातार बढ़ रहे मानसिक उत्पीड़न से आक्रोशित होकर 'भारतीय श्रमजीवी पत्रकार महासंघ' (नई दिल्ली) की शहडोल जिला इकाई ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) महोदय, शहडोल के समक्ष उपस्थित होकर एक बेहद कड़ा और विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। महासंघ ने स्पष्ट और कड़े शब्दों में मांग की है कि सोशल मीडिया पर वायरल किए गए तथाकथित ऑडियो की तत्काल उच्च स्तरीय तकनीकी एवं फॉरेंसिक जांच कराई जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी अलग हो सके। महासंघ का साफ कहना है कि यदि जांच में यह शिकायत पूरी तरह मिथ्या, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण पाई जाती है—जिसके प्रथम दृष्टया पूरे पुख्ता प्रमाण हैं। तो शिकायतकर्ता सूर्यभान यादव के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) एवं अन्य प्रासंगिक विधिक प्रावधानों के तहत कड़ी से कड़ी दंडात्मक और वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में कोई भी पत्रकारिता और कानून का ऐसा दुरुपयोग करने का दुस्साहस न कर सके।
समूचे संभाग के पत्रकारों में भारी असंतोष, दमनकारी नीतियों के खिलाफ एकजुट हुआ संगठन
इस घिनौने षड्यंत्र के सामने आने के बाद से न केवल शहडोल जिला बल्कि समूचे संभाग के पत्रकारों में गहरा रोष, तीव्र असंतोष और आक्रोश व्याप्त है। महासंघ के प्रांतीय और जिला नेतृत्व ने दोटूक लहजे में चेतावनी दी है कि पत्रकारों की सामाजिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठा के साथ खिलवाड़ करने वाले तत्वों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की गरिमा को तार-तार करने वाले इस दमनकारी कृत्य के खिलाफ आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा रही है। पत्रकारों ने एकजुट होकर यह साफ कर दिया है कि यदि पुलिस प्रशासन ने इस मामले में निष्पक्षता, पारदर्शिता और कानून के अनुरूप त्वरित न्यायोचित कार्रवाई नहीं की, तो समूचा पत्रकार समाज सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
इस महा-संग्राम में शामिल पत्रकार एवं महासंघ के प्रमुख पदाधिकारी (जिन्होंने इस निष्पक्षता की लड़ाई में अपने हस्ताक्षर से चुनौती दी है।
राष्ट्रीय एवं प्रांतीय नेतृत्व:
अवधेश भार्गव - राष्ट्रीय अध्यक्ष।
उपेन्द्र गौतम - प्रांतीय अध्यक्ष।
अनिल द्विवेदी - नेशनल काउंसिलर।
मनोज सिंह - नेशनल काउंसिलर।
गोपालदास बंसल - नेशनल काउंसिलर।
कमलेश श्रीवास्तव - नेशनल काउंसिलर।
लुकमान अली - नेशनल काउंसिलर।
राहुल सिंह राणा - संगठन प्रभारी प्रमुख, मध्य प्रदेश।
अरविंद द्विवेदी - कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष, मध्य प्रदेश।
जुनेद खान - प्रदेश सचिव, मध्य प्रदेश।
शहडोल जिला इकाई पदाधिकारी (मुख्य संघर्षकर्ता)
शैलेन्द्र तिवारी - जिला अध्यक्ष, शहडोल।
अजय पाल - जिला महासचिव, शहडोल इकाई।
अखिलेश मिश्रा - संभागीय महासचिव, शहडोल।
विजय उमलिया - संभागीय अध्यक्ष, शहडोल संभाग।
शहडोल जिला इकाई कार्यकारिणी के सदस्य (जो पूरी ताकत से साथ खड़े हैं।
विजय गुप्ता (ब्यौहारी), शमीम खान (धनपुरी), अनिल तिवारी (शहडोल), अजय केवट (शहडोल), अजय सिंह (गोहरू), सुनील द्विवेदी (जयसिंहनगर), सतीश तिवारी (ब्यौहारी), आशीष नामदेव (बुढ़ार), समश खान (जैतपुर), राजू अग्रवाल (धनपुरी), नीलेश गुप्ता (शहडोल), निर्मल जायसवाल (बुढ़ार), सुमित सिंह चंदेल (गोहरू), संदीप गुप्ता (बाणसागर), प्रदीप रंजन वर्मा (शहडोल), रोहित शर्मा (जैतपुर), शेख समीर (शहडोल), संतोष रैकवार (शहडोल), चंद्रकांत श्रीवास्तव (शहडोल), अजय मोटवानी (शहडोल), रोहित वर्मा (बुढ़ार), अजय गुप्ता (शहडोल), अरुण तिवारी (ब्यौहारी), जमाल खान (जयसिंहनगर), शीतल टेकाम (शहडोल), शकील खान (शहडोल), लक्ष्मण सिंह (शहडोल), अभिषेक आइजक (शहडोल), विकास शर्मा (ब्यौहारी), एस.पी. सिंह (धनपुरी), पुष्पेन्द्र मिश्रा (शहडोल), स्वप्निल जैन (शहडोल), मो. सफीक खान (धनपुरी), सतेन्द्र सोनी (शहडोल), विवेक चतुर्वेदी (ब्यौहारी), नदीम खान (धनपुरी), भानु प्रताप नापित (शहडोल), रामगोपाल सोनी (गोहरू), आशीष सिंह (शहडोल), सागर वर्मा (खन्नौधी)।
