नपा अध्यक्ष जायसवाल ने संभाला मोर्चा, कहा- पूरा शहर मेरा परिवार, हर कदम पर साथ खड़ा हूँ,
अतिक्रमण मुहिम के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर उठे गंभीर सवाल, मलबे की चपेट में आने से दुकानदार सीताराम और रवि गुप्ता गंभीर रूप से घायल, मेडिकल कॉलेज में इलाज जारी
Junaid Khan - शहडोल। जिला मुख्यालय में प्रशासनिक अमले द्वारा चलाई जा रही अतिक्रमण विरोधी मुहिम उस समय विवादों और गंभीर सवालों के घेरे में आ गई, जब बिना पुख्ता सुरक्षा इंतजामों के की जा रही तोड़फोड़ के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया। इस कार्रवाई के दौरान मलबे की चपेट में आने से शहर के प्रतिष्ठित और सीधे-सादे दुकानदार भाई, सीताराम गुप्ता और रवि गुप्ता गंभीर रूप से घायल हो गए। इस हादसे ने प्रशासन की कार्यशैली और जल्दबाजी में की जाने वाली कार्रवाइयों के दौरान आमजन की सुरक्षा की घोर अनदेखी को सीधे तौर पर चुनौती दे दी है। गनीमत रही कि समय रहते दोनों को मलबे से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इस घटना ने पूरे शहर के व्यापारी वर्ग और आम नागरिकों में आक्रोश और भय का माहौल पैदा कर दिया है। सवाल यह उठता है कि क्या जनहित और व्यवस्था के नाम पर की जाने वाली ऐसी कार्रवाइयों में किसी निर्दोष की जान की कीमत पर 'अच्छा काम' साबित करने की कोशिश की जा रही है?
संकट की घड़ी में पहुंचे नपा अध्यक्ष, पीड़ितों के घावों पर लगाया मरहम, कहा- 'हर परिस्थिति में खड़ा हूँ साथ'
इस दर्दनाक हादसे की सूचना मिलते ही नगर पालिका अध्यक्ष घनश्याम जायसवाल ने संवेदनशीलता की एक मिसाल पेश करते हुए तुरंत मोर्चा संभाला। उन्होंने अविलंब मेडिकल कॉलेज पहुंचकर वहाँ तैनात विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम से दोनों घायल भाइयों की स्थिति के संदर्भ में विस्तृत चर्चा की और उनके सर्वोच्च इलाज के निर्देश दिए। पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाते हुए और व्यवस्थापकों को कड़ा संदेश देते हुए नपा अध्यक्ष घनश्याम जायसवाल ने भावुक और दृढ़ शब्दों में आश्वासन दिया कि "हर परिस्थिति में नगर पालिका इस पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है।" उन्होंने ईश्वर से दोनों भाइयों की जल्द सेहतयाबी की कामना करते हुए कहा, "आगे बेहतर इलाज के लिए हमें जो भी कदम उठाने पड़ेंगे, हम उठाएंगे। पूरा शहर मेरा परिवार है, और अपने इस परिवार के सुख-दुख में मैं सदैव खड़ा था, खड़ा हूँ और आगे भी रहूंगा।" नपा अध्यक्ष के इस रुख ने जहाँ एक ओर पीड़ित परिवार को संबल दिया है, वहीं दूसरी ओर जनता के बीच उनकी जन-हितैषी छवि को और मजबूत किया है। कलेक्टर की संवेदनशीलता और पुलिस की तत्परता ने संभाली स्थिति, लेकिन व्यवस्था को बदलने की है बड़ी चुनौती। हालांकि, इस हादसे के बाद जिला प्रशासन और पुलिस महकमे ने भी स्थिति की गंभीरता को समझा और संवेदनशीलता दिखाई। विशेष तौर से कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने घटना के तुरंत बाद गहरी संवेदनशीलता का परिचय देते हुए चिकित्सीय व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए लगातार अस्पताल प्रबंधन से जीवंत संपर्क बनाए रखा, ताकि घायलों को इलाज में कोई कमी न आए। वहीं, मौके पर मौजूद पुलिस प्रशासन ने भी मुस्तैदी और तत्परता के साथ आमजन की मदद की और स्थिति को बिगड़ने से संभाला। दोनों घायलों की तबीयत में अब धीरे-धीरे सुधार होने की संभावना जताई जा रही है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने यह बड़ा यक्ष प्रश्न छोड़ दिया है कि 'अवैध' को 'वैध' करने और 'अच्छा काम' करने का दावा करने वाले विभाग आखिर जमीनी स्तर पर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे कर सकते हैं? यदि समय रहते इन कार्रवाइयों के तौर-तरीकों और सुरक्षा मानकों को नहीं बदला गया, तो भविष्य में किसी बड़ी अनहोनी की जिम्मेदारी किसकी होगी?


