1 अप्रैल से भोपाल में पेंशन प्रकरण निपटाने के फैसले का विरोध

वरिष्ठ नागरिक पेंशनरों पर ‘तुगलकी फरमान’, जिलों से व्यवस्था हटाने पर नाराज़गी


Junaid khan - शहडोल। भोपाल मध्यप्रदेश शासन द्वारा सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पेंशन प्रकरणों के निराकरण को 1 अप्रैल से जिलों के बजाय भोपाल में किए जाने के निर्णय का कड़ा विरोध शुरू हो गया है। इस फैसले को वरिष्ठ नागरिकों के लिए बेहद कष्टदायक बताते हुए वरिष्ठ नागरिक पेंशन एसोसिएशन मध्यप्रदेश के प्रांताध्यक्ष राजकुमार दुबे ने इसे “तुगलकी फरमान” करार दिया है। भोपाल के चक्कर लगाने को मजबूर होंगे बुज़ुर्ग पेंशनर राजकुमार दुबे ने कहा कि अब तक पेंशन प्रकरणों के लिए पेंशनरों को जिलों में ही कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन नए आदेश के बाद उन्हें भोपाल तक आना-जाना करना पड़ेगा। यह निर्णय प्रदेश के लाखों बुज़ुर्ग पेंशनरों पर अनावश्यक आर्थिक और शारीरिक बोझ डालेगा। 62 वर्ष के बाद यात्रा करना अधिकांश के लिए असंभव उन्होंने कहा कि 62 वर्ष की उम्र के बाद अधिकांश पेंशनर शारीरिक रूप से कमजोर हो जाते हैं। कई पेंशनर गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। ऐसी स्थिति में भोपाल जाकर पेंशन प्रकरण का निराकरण कराना उनके लिए लगभग असंभव होगा। यह फैसला बुज़ुर्गों को मानसिक और शारीरिक यातना देने जैसा है। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से निर्णय वापस लेने की मांग प्रांताध्यक्ष राजकुमार दुबे ने मध्यप्रदेश शासन के माननीय मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव से आग्रह किया है कि पेंशन प्रकरणों के निराकरण की व्यवस्था को पूर्व की भांति जिलों में ही यथावत रखा जाए, ताकि बुज़ुर्ग पेंशनरों को राहत मिल सके। पेंशनरों के हित में सरकार से संवेदनशील निर्णय की अपेक्षा एसोसिएशन का कहना है कि शासन को पेंशनरों की उम्र, स्वास्थ्य और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए। यह वर्ग पहले ही सीमित आय में जीवन यापन कर रहा है, ऐसे में अतिरिक्त परेशानियां अनुचित हैं। प्रेस विज्ञप्ति जारीकर्ता: राम नरेश तिवारी कार्यकारी प्रांताध्यक्ष वरिष्ठ नागरिक पेंशन एसोसिएशन, मध्यप्रदेश,6267837256,,

Previous Post Next Post