दम तोड़ने तक बोलेरो से रौंदी गई सांसद की महिला असिस्टेंट,07 दिन बाद SIT जांच
Junaid khan - शहडोल। शहडोल से भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह की महिला असिस्टेंट और भाजपा नेत्री रोशनी शुक्ला की मौत ने पूरे विंध्य क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। प्रारंभ में जिसे सड़क दुर्घटना माना जा रहा था, वह अब सामने आए तथ्यों और चश्मदीदों के बयानों के बाद एक सुनियोजित और निर्मम हत्या की ओर इशारा कर रहा है। जिस बेरहमी से रोशनी को बोलेरो वाहनों से बार-बार कुचला गया, उसने इस घटना को सामान्य हादसे से कहीं आगे पहुंचा दिया है। सूत्रों के अनुसार,14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन रोशनी शुक्ला को एक कॉल आया, जिसमें उसे रीवा के समीप स्थित एक दलिया प्लांट आने को कहा गया। यह जिम्मेदारी हाल ही में उसे सौंपी गई थी। दिल्ली से लौटने के बाद वह प्लांट पहुंची, जहां कुछ समय रुकने के बाद उसने घर पर सूचना दी कि काम पूरा हो गया है और वह बस से लौट रही है। रात करीब पौने नौ बजे बस ने उसे बेलवा मोड़ पर उतार दिया। अंधेरा हो जाने के कारण रोशनी ने अपने भाई को फोन कर लेने आने को कहा, लेकिन उसके पहुंचने से पहले ही वह पैदल आगे बढ़ गई। इसी दौरान रास्ते में खड़े दो बोलेरो वाहनों ने उसकी राह रोक ली। बताया जाता है कि वाहन सवार युवकों ने उससे बदतमीजी की, जिसका रोशनी ने विरोध किया और आगे बढ़ गई। इसके बाद दोनों वाहन उसका पीछा करने लगे। कुछ दूरी पर एक बोलेरो उसके आगे निकल गई और दूसरी पीछे चलने लगी। जान बचाने के लिए रोशनी इधर-उधर भागती रही। कुछ देर बाद दोनों वाहन आगे निकल गए, जिससे उसे लगा कि खतरा टल गया है। वह तेजी से आगे बढ़ी, लेकिन कुछ ही पलों में एक बोलेरो तेज रफ्तार में वापस आई और उसे कुचलते हुए आगे निकल गई। इसके तत्काल बाद दूसरी बोलेरो ने भी उसे रौंद दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चालक ने आगे-पीछे वाहन करते हुए तब तक रोशनी को कुचला, जब तक बोलेरो पलट नहीं गई। रोशनी वाहन के नीचे दबी रही और उसकी चीखें धीरे-धीरे खामोश हो गईं। घटना इतनी अचानक और भयावह थी कि आसपास के लोग तुरंत मौके पर नहीं पहुंच पाए।
करीब 15 लोगों ने लगभग 45 मिनट की मशक्कत के बाद बल्लियों की मदद से बोलेरो को उठाया और रोशनी को बाहर निकाला। उसकी हालत बेहद गंभीर थी। रीढ़ की हड्डी टूट चुकी थी, पैर कई जगह से चकनाचूर था और सिर से लगातार खून बह रहा था। शरीर का कोई भी हिस्सा सुरक्षित नहीं बचा था। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन हालत अत्यंत नाजुक बनी रही। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। महिलाएं और बुजुर्ग शाम ढलते ही घरों से निकलने से डर रहे हैं। लोगों का कहना है कि इस तरह सरेराह हुई निर्मम हत्या ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिजनों का दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। मां तारा शुक्ला ने रोते हुए कहा कि बेटी वर्षों से सांसद के साथ काम कर रही थी और दिल्ली से शहडोल तक उनकी जिम्मेदारियां संभालती थी। उन्होंने कहा कि बेटी को पढ़ाया-लिखाया ताकि वह आत्मनिर्भर बन सके, लेकिन दरिंदों ने उसकी जिंदगी छीन ली। पिता शिवाकांत शुक्ला ने कहा कि बेटी की शादी के सपने देख रहे थे, लेकिन उन्हीं कंधों पर उसकी अर्थी उठानी पड़ी। रोशनी के भाई का कहना है कि बहन पिछले कुछ दिनों से आशंकित रहती थी और कहती थी कि कुछ लोग उसके पीछे पड़े हैं। आखिरी दिन भी उसने जल्दी आने को कहा था, लेकिन पहुंचने से पहले ही यह दर्दनाक वारदात हो गई।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले में मर्ग कायम कर जांच की जा रही है। यह हिट एंड रन है या सुनियोजित हत्या, दोनों बिंदुओं पर गंभीरता से पड़ताल की जा रही है। घटना के सात दिन बाद रीवा एसपी शैलेंद्र सिंह द्वारा विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। पुलिस का दावा है कि सभी साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान जुटाए जा रहे हैं तथा जल्द ही मामले में स्थिति स्पष्ट की जाएगी। यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करती है। अब सबकी नजरें एसआईटी जांच पर टिकी हैं।

