कलेक्टर से शिकायत, ऑपरेशन के बाद भी दर्द कम न होने पर फिर उठे सवाल
Junaid khan - शहडोल। शहर के एक निजी अस्पताल पर आयुष्मान भारत योजना के नाम पर कथित वसूली का गंभीर आरोप लगा है। देवांता अस्पताल में हाथ की हड्डी के ऑपरेशन के बाद मरीज से 10 हजार रुपये लेने की शिकायत कलेक्टर और कोतवाली थाने तक पहुंची है। मामले ने तूल पकड़ लिया है और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। पीड़ित कमलेश गुप्ता का आरोप है कि दुर्घटना में हाथ की हड्डी टूटने के बाद उन्हें देवांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनके पास आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद ऑपरेशन के दौरान 10 हजार रुपये जमा कराने के लिए दबाव बनाया गया। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से जब आयुष्मान के तहत नि:शुल्क इलाज की बात कही तो कथित तौर पर जवाब मिला कि आयुष्मान में सभी सामान कवर नहीं होते, अतिरिक्त खर्च देना पड़ेगा। मरीज का कहना है कि ऑपरेशन के बाद भी समस्या जस की तस बनी रही। 10 दिन तक ड्रेसिंग के बावजूद खून बहना बंद नहीं हुआ। बाद में जिला अस्पताल में जांच कराने पर चिकित्सकों ने हाथ में डाली गई प्लेट को गलत तरीके से फिट किया जाना बताया और दोबारा ऑपरेशन की जरूरत जताई। इससे परिवार की चिंता और बढ़ गई है। कमलेश गुप्ता ने साफ कहा है कि जब तक आयुष्मान योजना के नाम पर हुई कथित गड़बड़ी की जांच और कार्रवाई नहीं होती, वे दोबारा उसी अस्पताल में ऑपरेशन नहीं कराएंगे। उनका आरोप है कि गरीब मरीजों को सरकारी योजना का लाभ देने के बजाय उनसे नकद राशि ली जा रही है। इधर, देवांता अस्पताल के चिकित्सक डॉ. बृजेश पांडेय ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि मरीज से उपचार के दौरान कोई अवैध राशि नहीं ली गई और लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि इलाज पूरी प्रक्रिया और नियमों के तहत किया गया। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन पर जांच का दबाव बढ़ गया है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल आयुष्मान योजना की साख पर आघात होगा, बल्कि निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर भी बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करेगा।
अब नजरें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं क्या आयुष्मान के नाम पर वसूली का सच सामने आएगा या मामला आरोप-प्रत्यारोप में ही उलझकर रह जाएगा?
