शहडोल में शराब दुकानों की मनमानी चरम पर: प्रिंट रेट से अधिक वसूली, गाली-गलौज और मारपीट के आरोप, प्रशासन मौन
Junaid Khan - शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में शराब दुकानों का संचालन नए ठेकेदार के हाथों में जाने के बाद से पूरे शहर में अव्यवस्था और मनमानी की शिकायतें तेजी से सामने आ रही हैं। आम नागरिकों का आरोप है कि शराब की दुकानों में खुलेआम प्रिंट रेट से अधिक कीमत वसूली जा रही है, जबकि निर्धारित दरों का पालन पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। स्थिति यह है कि ग्राहकों को छोटी हो या बड़ी बोतल हर प्रकार की शराब पर मनमाना दाम चुकाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि यदि किसी शराब की बोतल पर प्रिंट रेट 200 रुपये अंकित है, तो दुकानों पर वही बोतल 230, 250 यहां तक कि 280 रुपये तक में बेची जा रही है। ग्राहक जब इस पर आपत्ति जताते हैं और प्रिंट रेट का हवाला देते हैं, तो दुकानदार और कर्मचारी “नए माल का नया रेट” बताकर बात टाल देते हैं, जबकि वास्तविकता में ग्राहकों को वही पुराना स्टॉक दिया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ आर्थिक शोषण का मामला नहीं है, बल्कि ग्राहकों के साथ दुर्व्यवहार भी आम हो चुका है। यदि कोई ग्राहक अधिक कीमत पर सवाल उठाता है, तो दुकान के मैनेजर और कर्मचारी अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं, गाली-गलौज करते हैं और कई मामलों में मारपीट तक की नौबत आ जाती है। इस तरह की घटनाओं के वीडियो भी सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि दुकान संचालक खुलेआम यह दावा करते नजर आते हैं कि उनका “ऊपर तक सेटिंग” है और कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। ग्राहकों के अनुसार, कई बार कर्मचारियों द्वारा यह तक कहा जाता है कि “जहां शिकायत करनी है कर लो, पुलिस या प्रशासन कुछ नहीं करेगा।” ऐसे बयान आम जनता में भय और आक्रोश दोनों पैदा कर रहे हैं।
इसके अलावा शराब दुकानों के निर्धारित समय का भी खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। कई दुकानों के बारे में शिकायत है कि वे तय समय से पहले खुल जाती हैं और देर रात तक संचालित होती रहती हैं, जिससे कानून व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। इसके बावजूद संबंधित विभागों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। लगातार सोशल मीडिया, स्थानीय समाचार पत्रों और चैनलों में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बावजूद प्रशासनिक उदासीनता लोगों को हैरान कर रही है। आम नागरिकों का सवाल है कि आखिर इतनी शिकायतों और प्रमाणों के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल नहीं उठना चाहिए? स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन, आबकारी विभाग और पुलिस प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी ठेकेदार, मैनेजर व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही दुकानों पर छापेमारी कर अवैध रूप से वसूली गई राशि और नियमों के उल्लंघन की जांच कर शराब जब्त की जाए। जनता का कहना है कि यदि समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है। लोगों का भरोसा प्रशासन से उठता जा रहा है और व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि शहडोल जिला प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब संज्ञान लेता है और आम जनता को इस मनमानी व अत्याचार से राहत दिलाने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।


