व्यापारियों की आपत्तियों,नोटिस विवाद और हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
02 मीटर डिवाइडर पर भी उठे सवाल
Junaid khan - शहडोल। शहडोल शहर के प्रमुख एवं अत्यंत व्यस्त मार्ग इंदिरा चौक से न्यू बस स्टैंड तक प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण परियोजना को प्रशासन ने औपचारिक रूप से हरी झंडी दे दी है। 18 मीटर चौड़ी सड़क निर्माण के इस प्रस्ताव को लेकर पिछले कई महीनों से शहर में तीखी बहस, बाजार बंद, ज्ञापन, विरोध प्रदर्शन और न्यायालयीन प्रक्रिया तक की स्थिति बनी रही। हाल ही में कलेक्टर, नगर पालिका अध्यक्ष एवं नगर पालिका सीएमओ की बैठक के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
क्या है पूरा मामला
मुख्यमंत्री शहरी क्षेत्र अधोसंरचना निर्माण योजना के तहत इंदिरा चौक से न्यू बस स्टैंड मार्ग के चौड़ीकरण की स्वीकृति दी गई है। प्रस्तावित योजना के अनुसार सड़क की कुल चौड़ाई 18 मीटर रखी गई है, जिसमें 2 मीटर चौड़ा डिवाइडर भी शामिल है। नगर पालिका द्वारा प्रारंभिक स्तर पर सड़क की जद में आने वाले निर्माणों को लेकर अतिक्रमण हटाने के नोटिस जारी किए गए। यहीं से विवाद की शुरुआत हुई। कई व्यापारियों ने आरोप लगाया कि उनकी निजी भूमि और वैध निर्माण को भी अतिक्रमण की श्रेणी में दर्शाते हुए नोटिस थमा दिए गए, जो न्यायोचित नहीं है।
इसी के विरोध में व्यापारी संघ ने एक दिन का शहडोल बंद भी आयोजित किया था। व्यापारियों का कहना था कि उन्हें विकास कार्यों से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन बिना पर्याप्त सुनवाई और वैधानिक प्रक्रिया के निजी संपत्ति को अतिक्रमण बताना अनुचित है।
न्यायालय की शरण में पहुंचे व्यापारी
नोटिस के खिलाफ कई व्यापारी हाईकोर्ट की शरण में पहुंचे, जबकि कुछ ने जिला न्यायालय में याचिकाएं दायर कीं। इसके बाद नगर पालिका द्वारा एक अंतिम नोटिस जारी कर आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया गया। बड़ी संख्या में व्यापारियों ने अपने स्वामित्व से संबंधित दस्तावेजों सहित लिखित आपत्तियां नगर पालिका कार्यालय में जमा कराईं।
हालांकि व्यापारियों का कहना है कि आपत्तियां जमा करने के बाद अब तक उन्हें किसी अंतिम निर्णय, संशोधित नक्शे या सुनवाई की स्पष्ट सूचना नहीं दी गई है। इससे प्रभावित व्यापारियों में अनिश्चितता और भय का माहौल बना हुआ है।
16 मीटर सड़क का सुझाव, डिवाइडर पर आपत्ति
व्यापारी संघ का मुख्य तर्क यह है कि 18 मीटर के स्थान पर 16 मीटर चौड़ी सड़क भी पर्याप्त होगी। उनका कहना है कि प्रस्तावित 2 मीटर डिवाइडर की आवश्यकता पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। संघ का दावा है कि यदि डिवाइडर हटाया जाए तो जिन व्यापारियों की दुकानें पूरी तरह प्रभावित हो रही हैं, उनकी कम से कम आधी दुकान बचाई जा सकती है। इससे वे अपना व्यवसाय जारी रख सकेंगे और आजीविका का संकट नहीं खड़ा होगा। व्यापारी संघ के अध्यक्ष लक्ष्मण गुप्ता एवं अन्य पदाधिकारियों ने इस संबंध में कलेक्टर से दो बार बैठक कर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने रेलवे स्टेशन रोड का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां बिना डिवाइडर के भी यातायात सुचारु रूप से संचालित हो रहा है।
दुकानें पूरी या आंशिक रूप से प्रभावित
जानकारी के अनुसार 18 मीटर चौड़ी सड़क के दायरे में आने से कई व्यापारियों की दुकानें पूरी तरह समाप्त हो जाएंगी, जबकि कुछ की दुकानें आंशिक रूप से प्रभावित होंगी। प्रभावित व्यापारियों का कहना है कि उनका व्यवसाय वर्षों से स्थापित है और अचानक दुकान टूट जाने से उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। कई दुकानों पर परिवार के एक से अधिक सदस्यों की आजीविका निर्भर है।
मुआवजा नहीं, लेकिन वैधानिक प्रक्रिया की मांग
जिन व्यापारियों ने नगर पालिका में अपने दस्तावेज जमा कर आपत्ति दर्ज कराई है, उनका कहना है कि यदि नगर पालिका को उनकी निजी भूमि की आवश्यकता है तो अधिग्रहण की वैधानिक प्रक्रिया प्रारंभ की जाए।
कुछ व्यापारियों ने यह भी कहा कि वे विकास के विरोध में नहीं हैं और यदि उनकी निजी भूमि भी सड़क में जाती है तो वे मुआवजा लेने पर जोर नहीं देंगे, बशर्ते सड़क 16 मीटर में बनाई जाए और डिवाइडर हटाया जाए। उनका कहना है कि विकास होना चाहिए, शहर सजना चाहिए, लेकिन लोगों के जीवन और रोजगार को ध्यान में रखकर संतुलित निर्णय लिया जाना चाहिए। व्यापारियों का कहना है कि वे शीघ्र ही कलेक्टर डॉ. केदार सिंह से पुनः मुलाकात कर अपना पक्ष विस्तार से रखेंगे और व्यावहारिक समाधान की मांग करेंगे।
प्रशासन का पक्ष
प्रशासन का कहना है कि यह परियोजना शहर के दीर्घकालिक विकास और यातायात सुगमता के लिए आवश्यक है। इंदिरा चौक से न्यू बस स्टैंड तक का मार्ग शहर का मुख्य और अत्यधिक व्यस्त मार्ग है, जहां लगातार बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए चौड़ीकरण अनिवार्य माना गया है। बैठक के बाद प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया नियमानुसार अपनाई जाएगी तथा वैध आपत्तियों पर विधिसम्मत विचार किया जाएगा। नगर पालिका का कहना है कि प्रभावित लोगों को सुनवाई का अवसर दिया गया है और आगे की कार्रवाई भी कानूनी प्रावधानों के तहत ही की जाएगी। ट्रांसफर के बाद शांत हुआ विवाद
विवाद के दौरान नगर पालिका सीएमओ अक्षत बुंदेला के ट्रांसफर आदेश के बाद मामला कुछ समय के लिए शांत हो गया था। इसके पश्चात कलेक्टर, नगर पालिका अध्यक्ष एवं संबंधित अधिकारियों की बैठक में परियोजना को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
आगे क्या?
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन 18 मीटर सड़क और 2 मीटर डिवाइडर के मूल प्रस्ताव पर कायम रहता है या व्यापारियों के सुझावों को आंशिक रूप से स्वीकार कर संशोधित डिजाइन पर विचार करता है। फिलहाल शहर के व्यापारियों में असमंजस और चिंता का माहौल है, जबकि प्रशासन इसे शहडोल के शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बता रहा है।
इंदिरा चौक न्यू बस स्टैंड मार्ग का यह चौड़ीकरण शहडोल के शहरी ढांचे को नया स्वरूप दे सकता है बशर्ते विकास और जनहित के बीच संतुलन कायम रखा जाए।
